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पिछले कुछ सालों में कई वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है कि टाइम ट्रैवलिंग संभव है. स्टिफ़न हॉकिंग का भी यही मानना है कि हम भूतकाल और भविष्यकाल में जा सकते हैं.
पिछले साल नवंबर में एक दिलचस्प ख़बर आई थी. Noah नामक एक व्यक्ति ने दावा किया था कि वो 2030 से आया है और 2017 में फंस गया है. Noah ने ये दावा किया कि वो 2030 से आया है और अपनी बात को साबित भी कर सकता है लेकिन भविष्यवाणियों से उसकी ज़िन्दगी को ख़तरा हो सकता है.
उस वक़्त Noah ने ये कहा था कि उसका सिर्फ़ एक मकसद है, दुनिया को बताना कि टाइम ट्रैवल संभव है. Noah ने ये भी दावा किया था कि वो असल में 2021 से है, लेकिन कुछ कारणों से उसे निकाल दिया गया था. Noah ने ये भी कहा था कि वो अवसादग्रसित है और दुखी है क्योंकि वो अपने वक़्त में वापस लौटने में असमर्थ है.
Noah के दावों ने सबको चौंका दिया था और अपनी बात साबित करने के लिए वो On-Camera Lie Detector Test के लिए तैयार हो गया.

Daily Mail की रिपोर्ट्स की मानें, तो Noah ने Lie Detector Test पास कर लिया है. Noah के सारे दावों पर Lie Detector की मोहर तो लग गई है. Noah के टेस्ट का एक वीडियो भी जारी किया गया है. ग़ौरतलब है कि वो मशीन वीडियो में दिखाई नहीं दे रही.
Noah ने कई अनुमान लगाये थे जैसे कि 2020 में ट्रम्प फिर से राष्ट्रपति चुने जायेंगे. Artificial Intelligence में क्रांति आयेगी और मनुष्य Google-Style Glasses पहनेंगे.
Noah अभी दक्षिण अमेरिका में रह रहा है और उसने कहा है कि भविष्य के बारे में आज के लोगों को बताना उसका मकसद है.
Noah के कुछ अन्य अनुमान-
1. 2028 तक मनुष्य मंगल ग्रह पर पहुंच जायेगा.
2. आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कार्स की गति डीज़ल-पेट्रोल कार जितनी ही होगी.
3. कई तरह के कैंसर की दवाई उपलब्ध होगी.
4. Age Rejuvenation Drug (जवानी लौटाने वाली दवाई) उपलब्ध होगी. Noah ने उसे खाने का भी दावा किया.
5. Bitcoin की Popularity बढ़ जायेगी लेकिन सिक्कों का भी चलन रहेगा.
Noah का दावा कितनी सही है या कितनी ग़लत ,ये तो 2030 तक ही पता चलेगा. एक बात ये भी है कि वक़्त में आगे या पीछे जाना बहुत रोमांचक है. 
Source- Daily Mail



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अगर आप सिर्फ़ टैग देख कर Vegetarian चीज़ें ख़रीदते हैं, तो ज़रा सावधान हो जाईये. शाकाहारी समझी जाने वाली इन डिशेज़ में Non-Veg चीज़ों का कुछ अंश होता हैं.

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अगली बार ज़रा ध्यान दें कि Vegetarian समझ कर आप असल में खा क्या रहे हैं!
source: GP

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Jaipur: राजस्थान में ऐतिहासिक  स्थल, विजय स्तम्भ, महल, मीनारें, बावडियाँ, हर स्थल से जुडी पौराणिक गाथा, हर एक स्थान का धार्मिक महत्त्व आदि देखने या सुनने में आता है। इन स्थानों पर लोगों को धर्म से जोडने के लिए यहाँ के  राजाओं ने मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारे एवं अन्य धार्मिक स्थान बनाये हैं। उनमे से एक है चाँद बावड़ी।
जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-11) पर स्थित दौसा जिले का ह्रदय कहे जाने वाले सिकंदरा कस्बे से उत्तर की ओर कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, आभानेरी गाँव। पुरातत्व विभाग को प्राप्त अवशेषों से ज्ञात जानकारी के अनुसार आभानेरी गाँव 3000 वर्ष से भी अधिक पुराना हो सकता है, इसी गाँव में स्थित है "चाँद बावडी"। 
चांद बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी हैं । इसकी संरचना विहंगम हैं जो कि मन मोह लेती हैं । यह बावड़ी 35 मीटर के वर्गाकार आकृति  में बनी हुई हैं । यह 100 फ़ीट गहरी हैं जो कि 13 मंजिला हैं । जिसमे भूलभुलैया की तरह 3500 सीढ़िया बनी हुई हैं। सबसे ज्यादा यह आकर्षण का केंद्र इसकी सीढ़ियों की वजह से ही हैं । जिस सीढ़ी के जरिये आप नीचे जाते हैं , उन्ही के जरिये आप वापस ऊपर नही जा पाते । और यही इसकी वास्तुकला का करिश्मा हैं ।
बावड़ी के ऊपर  हर्षत माता का मंदिर स्तिथ हैं जिसके बारे में लोगो का मानना हैं कि अगर आप सच्चे मन से माता से कुछ मांगोगे तो वह आपकी मन्नत जरूर पूरी करती हैं।  इस बावड़ी को इतना गहरा बनाया ही इसलिए गया था कि अगर कोई गिरे तो वापस ऊपर न आ सके और इसकी गुप्त सुरंगों का इस्तेमाल राजा अपने सेनापति और सैनिकों के साथ युद्ध के दौरान किया करते थे । खुद एक्सपर्ट्स ने भी रीसर्च के बाद ये माना हैं कि अपने समय मे यह बावड़ी बहुत ज्यादा इस्तेमाल होती थी ।
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New Delhi: आज से करीब 10 साल पहले राष्ट्रपति प्रतिभा पािटल ने जिस बच्चे को बहादुरी का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया था, वो आज पैसों की तंगी की वजह से जूते बनाने पर मजबूर है।


11 साल की उम्र में यमुना के तेज बहाव में दो युवकों की जान बचाने वाला शहंशाह आज जूता कारखाने में जूता बना रहा है। वीरता पुरस्कार मिलने के बाद शहंशास से कई वादे किए गए लेकिन 10 साल बाद भी सरकार के ये वादे पूरे नहीं हुए। 
तत्कालीन उपराष्ट्रपति के साथ शाहजहां (लाल घेरे में)
एत्माद्दौला यमुना ब्रिज की दलित बस्ती मे रेलवे ब्रिज के नीचे एक छोटी झोपड़ी में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाला यह बहादुर बच्चा सिर्फ 2500 रुपए की तनख्वाह में काम कर रहा है। 2 सितंबर 2007 मे शहंशाह अपनी वीरता की वजह से सुर्खियों में आया था जब उसने यमुना मे डूबते हुए दो युवको को अपनी जान पर खेलकर बचाया था।
तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल शाहजहां को सम्मानित करते हुए
उसकी इस वीरता के लिए वर्ष 2009 मे गणतंत्र दिवस पर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उसे वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था। इतना ही नहीं UPA चेयरमैन सोनिया गांधी, तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी, दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत कई हस्तियों ने उसकी पीठ थपथपाई थी। शहंशाह बताते है कि राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने के समय उसने अपनी पढ़ाई और सरकारी योजना मे एक मकान की इच्छा जताई थी। इसे पूरा करने का दिल्ली मे वादा भी किया गया था।
तत्कालीन मंत्री रेणुका चौधरी के साथ शाहजहां (लाल घेरे में)
पुरस्कार मिलने के कुछ महीने बाद सरकारी खर्च पर उसकी पढ़ाई का इंतजाम तो हो गया। 2013 मे उन्होने इंटर पास कर लिया। इसके बाद उनको सरकारी मदद मिलना बंद हो गई। शहंशाह ने आगे पढ़ने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भागदौड़ की, लेकिन सबकुछ कागजों में सिमट कर रह गया। वर्ष 2014 मे अधिकारियों ने नई सरकार बनने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इंजीनियर बनने का सपना संजोए शहंशाह को घर के हालात खराब होने पर मजबूरन जूते की फैक्ट्री मे काम करना पड़ा।
अपने पुरस्कार दिखाता शाहजहां
शहंशाह ने बताया कि वो काला महल स्थित एक जूते की फैक्ट्री में जूतों पर सोल लगाने का काम करता है। पूरे महीने काम करने के बाद वो दो से ढाई हजार रुपये कमा पाते है। इसी पैसे से आज उसका पूरा परिवार चल रहा है। शहंशाह का कहना है कि पुरस्कार मिलने के समय उनसे मकान दिलाने का वादा किया गया था। तत्कालीन डीएम ने भी उन्हे आश्वासन दिया था। 
जूता फैक्ट्री में सिर्फ 2500 रुपए महीने की पगार पर काम कर रहा है शाहजहां

शहंशाह ने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों के रवैए से वो दुखी है। जब वो उन्हे बताते थे कि राष्ट्रपति ने उन्हें वीरता पुरस्कार दिया है तो कई कर्मचारी उन पर हंसते थे। उनसे यहां तक कहा गया कि हम क्या करें जो तुमने जान बचाई थी। कई बार वो राष्ट्रपति द्वारा दिए गया मेडल और प्रशस्ति पत्र भी लेकर गए तो उनसे कहा गया कि अपने पास रखो इसकी कोई वैल्यू नहीं है। शहंशाह की मां अनीसा को मकान न मिलने से ज्यादा मलाल अपने बेटे के मेडल और प्रशस्ति पत्र को टांगने के लिए घर मे जगह न होने का है। जब भी कोई उनके घर आता है तो वो एक टूटे से सूटकेस को लाती है। उससे धूल हटाकर बेटे को मिली बहादुरी की निशानी को दिखाती है।

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Jaipur: भारत जैसे देश में जब बच्चे सेक्स या इससे जुड़े किसी मुद्दे पर माता-पिता से सवाल हो तो वो असमंजस में पड़ जाते हैं। इतना ही नहीं उनके पास जवाब नहीं होता तो वो चुपचाप ही रह लेते हैं। 
टीवी पर अगर कॉन्‍डोम या सैनिटरी नैपकिन का कोई विज्ञापन आ रहा हो और उस वक्‍त बच्‍चा कोई सवाल पूछ ले तो घर के बड़े चुपचाप वहां से चले जाने में ही भलाई समझते हैं। या चेहरे पर बिना कोई एक्‍सप्रेशन दिए टीवी चैनल बदल दिया जाता है।
 
हमारे देश में अभी भी लोग सेक्स को लेकर जागरूक नहीं है। वो इस बारे में अभी भी खुलकर बात नहीं करना पसंद करते हैं। यही वजह है कि यहां सेक्‍स एजुकेशन जैसी कोई चीज है ही नहीं। 


आज के समय में जहां इंटरनेट पर सूचनाओं की कोई कमी नहीं है ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह सेक्‍स को कोई गुपचुप या रहस्‍यमयी चीज न बनाएं। माता-पिता की यह नैतिक जिम्‍मेदारी हे कि वे अपने बच्‍चों को सेक्‍स के बारे में बताएं। इससे ना केवल बच्चों को इसकी जानकारी होगी बल्कि भविष्‍य में उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका भी कम हो जाती है। 

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस सवाल के जवाब में माता-पिता को बच्‍चों को बताना चाहिए कि ये एक कॉन्‍ट्रासेप्टिव है। और अगर बच्‍चा यह कहे कि उसे समझ नहीं आया तो उसे बताइए कि आप इसके बारे में डिटेल में तब बताएंगे जब वो अपने शरीर के तमाम अंगों के बारे में ठीक से जानने लगेगा। हालांकि माता-पिता को बच्‍चों से कभी ये नहीं कहना चाहिए कि ये बड़ों के समझने की बात है और तुम अभी छोटे हो इसे नहीं समझ पाओगे। इससे बच्‍चे उस चीज के बारे में और ज्‍यादा उत्‍सुक हो जाते हैं और फिर दूसरे तरीकों से जानकारी हासिल करने लगते हैं। 
विशेषज्ञों की राय में इस उम्र के बच्‍चों को बताना चाहिए कि यह एक कॉन्‍ट्रासेप्टिव है और इसका इस्‍तेमाल तब किया जाता है जब कपल्‍स बच्‍चा नहीं करना चाहते। अगर इसके बाद भी बच्‍चे सवाल करें तो हंसी-मजाक करने के बजाए उसी टोन में बात कीजिए जिस टोन में आपने पहले सवाल का जवाब दिया है। ऐसे सवालों में बच्‍चों को डांटना, झिड़कना या दूर चले जाने के लिए कह देना बिलकुल भी सही नहीं है। 
जब 10 से 13 साल की उम्र के बच्‍चे स तरह के सवाल करते हैं ते आप उन्‍हें बताइए कि यह एक कॉन्‍ट्रोसेप्टिव है जो बर्थ कंट्रोल करने के काम आता है। आप चाहें तो डायग्राम की मदद से भी उन्‍हें कॉन्‍डोम के बारे में बता सकते हैं कि ये क्‍या है और कैसे काम करता है। हां, आपके बताने का अंदाज फ्रेंडली होने के साथ ही इंफॉर्मेशन देने वाला होना चाहिए। 
बच्‍चे की जिज्ञासा पर हैरानी जताने के बजाए उसे सेक्‍स और सेक्‍सुएलिटी के बारे में बताएं। याद रखिए कि बच्‍चे किशोरावस्‍था में कदम रख चुके हैं, ऐसे में उन्‍हें सपोर्ट करना आपकी जिम्‍मेदारी है। इस उम्र के बच्‍चों के साथ अंडस्‍टैंडिंग रवैया अपनाना और खुला दिमाग रखना बेहद जरूरी है। 



अगर 14 साल की उम्र तक भी आपके बच्‍चे ने आपसे कॉन्‍डोम के बारे में नहीं पूछा है तो आपको वक्‍त निकालकर उन्‍हें इसके बारे में एजुकेट करना होगा। इस उम्र में बच्‍चों के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। साथ ही सेक्‍स की इच्‍छा और दूसरे लिंग के प्रति आकर्षण भी चरम पर होता है। अपने बच्‍चे से डिटेल में बात कीजिए और इस दौरान उन्‍हें सहज महसूस कराएं।


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Jaipur: पुरानी कहावत है कि जिस जगह मन ना लगे वह काम छोड़ देना चाहिए। कुछ ऐसी ही कहानी है Australia में रहने वाले एक भारतीय इंजीनियर की। 33 साल के मधुर मल्होत्रा पेशे से इंजीनियर हैं और Australia में नौकरी करते थे, लेकिन उनका काम में मन नहीं लगता था। हमेशा से कुछ अलग करने की चाह में मधुर अपनी 30 लाख की नौकरी छोड़कर भारत वापस लौट आए।
2009 में भारत लौटे मधुर ने नौकरी छोड़ चाय की दुकान खोल ली। जहां उन्होंने अपना नया काम शुरू किया, वहां की कल्पना उन्होंने कभी नहीं की थी। उनका कहना है कि चाय सदाबहार पेय है, सर्दी और बारिश में चाय की चुस्कियों का मजा ही कुछ और होता है।
आईटी और कम्यूनिकेशन में Australia से ही मास्टर्स कर चुके मधुर की मां एक बार गंभीर रूप से बीमार हो गईं, जिसके बाद उन्हें मां की देखभाल करने के लिए तुरंत Australia से India आना पड़ा। वह बताते हैं कि मेरी मां की ओपन हार्ट सर्जरी होनी थी। वह 72 साल की हैं और मेरे पिता 78 साल के। India वापस लौटने के बाद मधुर ने फैमिली का कंस्ट्रक्शन बिजनेस शुरू किया, लेकिन पुराना काम होने की वजह से उन्हें मजा नहीं आ रहा था और वह इससे असंतुष्ट हो रहे थे।
एक बार वह अपनी दोस्त के साथ चाय पीने निकले। तब उन्होंने देखा कि चाय बनाने वाले के हाथ साफ नहीं है और वह उन्हीं खुले हाथों से दूध निकालकर चाय बना रहा था। इसके अलावा वहां चाय की दुकान पर अधिकतर लोग सिगरेट फूंकने वाले थे। इसके बाद मधुर ने सोचा कि क्यों न इससे बेहतर कोई चाय की दुकान खोली जाए। फिर क्या था मधुर और उनके दोस्त ने मिलकर एक छोटा-सा चाय का कैफे खोलने का प्लान बनाया जहां अच्छे माहौल में लोग अपनी फैमिली या दोस्त के साथ सिर्फ चाय पीने आएं।
 
उन्होंने चाय पर काफी रिसर्च की और पाया कि अगर कुल्हड़ में सामान्य चाय को बेहतर बनाकर बेचा जाए तो लोग आकर्षित हो सकते हैं। फिर क्या था उन्होंने कुल्हड़ वाली चाय को एक अलग अंदाज में पेश किया। साथ ही पाया कि कुल्हड़ पर्यावरण के लिहाज से भी अच्छा विकल्प है। धीरे-धीरे मधुर ने चाय की 22 कैटिगरी बना दीं। कैफे 'चाय-34' की 22 तरह के स्वाद की अलग-अलग खासियत वाली चाय वो भी कुल्हड़ में। Bhopal के शिवाजी नगर में चलने वाले चाय का ये कैफे मधुर की पहचान बन गई है।

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Jaipur: हमारे बड़े-बुजुर्गों ने भी कहा है कि शादी कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है। हर आदमी यही चाहता है कि वह अपनी पत्नी की जिंदगी में एक परफेक्ट पति हो लेकिन जाने -अनजाने वो अपनी पत्नी से कुछ ऐसा कह जाता है जिससे उसकी पत्नी खीझ उठती है। कई बार अनजाने में आपके साथ भी ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं, तो संभल जाएं….
जहा तक है हर पति अपनी पत्नी की तुलना अपनी मां से करता है। अगर आप अपनी मां के हाथ का बना खाना पसंद करते हैं तो इसमें कोई बुराई वाली बात नहीं है लेकिन इसकी तुलना अपनी पत्नी से करना बेककूफी से कम नहीं है। जिस तरह दो रंग कभी एक जैसे नहीं हो सकते वैसे ही दो इंसान भी कभी एक जैसे नहीं हो सकते।
क्या आप भी बिस्तर पर बैठे-बैठे अपनी पत्नी को हमेशा हुक्म देते रहते हैं? अगर आप ऐसा करते हैं तो हम आपको बता दें कि आप पत्नी की नजर में अपनी इज्जत खोते जा रहे हैं। पत्नी को नौकरानी समझना छोड़ दीजिए तभी आप उसके प्यार के काबिल बन पाएंगे।
कुछ पतियों की बहुत बुरी आदत होती है कि वो बिना अपनी पत्नी को बताए अपने दोस्तों को डिनर पर घर ले आते हैं। आपको ये ध्यान रखना चाहिए कि आपकी पत्नी के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि उसे घुमाते ही सारी तैयारियां हो जाएंगी। उसे भी पहले से तैयारी करनी पड़ती है।
कुछ पतियों की आदत होती है कि वो अपनी पत्नी के घर वालों में हमेशा दोष ही निकालते रहते हैं। अगर आपकी पत्नी आपके माता-पिता को कभी कुछ कह देती है तो आपको बहुत बुरा लगता है। फिर खुद ऐसा व्यवहार करना कहां तक सही है। और वैसे भी आपकी पत्नी के घर वाले आप के भी अपने ही हैं ना।
शादी के पहले जहां आप अपने फैसले लेने के आजाद होते हैं वहीं शादी के बाद आपके फैसले आपकी पत्नी को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में अपने फैसलों में अपनी पत्नी को शामिल ना करना बहुत गलत बात है। अपने हर फैसले में अपनी पत्नी को भी बराबर का भागीदार बनाइए।

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अभी हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक 16 वर्षीय लड़के ने अपनी माँ और बहन की हत्या कर दी क्योंकि बहन ने शिकायत कर दी थी कि भाई दिन भर मोबाइल फोन पर खतरनाक गेम खेलता रहता है और इसलिए माँ ने बेटे की पिटाई की, उसे डाँटा और उसका मोबाइल फोन ले लिया। मोबाइल पर मारधाड़ वाले गेम खेलते रहने के आदी लड़के का गुस्सा इससे बढ़ गया और उसने अपनी माँ और बहन की हत्या कर दी और घर से भाग गया।

फिर उठा पुराना सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठा है कि बच्चों को किस उम्र में मोबाइल फोन दिया जाना चाहिए। मनोचिकित्सकों का भी कहना है कि बच्चों को जितना संभव हो स्मार्टफोन से दूर रखना चाहिए। दरअसल होता यह है कि पहले माता-पिता ही लाड़-प्यार में बच्चों को स्मार्टफोन या टैबलेट अथवा आईपैड आदि दे देते हैं और फिर बाद में उसके दुष्परिणाम भुगतते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं स्मार्टफोन से होने वाले नुकसान और बच्चों को अगर स्मार्टफोन की लत लग गयी है तो उसे कैसे छुड़ाएँ-


स्मार्टफोन या टैबलेट से होने वाले नुकसान

-सबसे बड़ा नुकसान तो यह होता है कि बच्चे पूरी तरह स्मार्टफोन पर निर्भर हो जाते हैं। यदि बच्चा स्मार्टफोन का उपयोग अपनी पढ़ाई के लिए भी कर रहा है तो भी नुकसान हो रहा है। जिस उत्तर को खोजने के लिए उसे पुस्तक का पाठ पढ़ना चाहिए या फिर जिस शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी के पन्नों को पलटना चाहिए वह काम उसका झट से गूगल पर हो जाता है इसलिए बच्चों ने पुस्तकों को पढ़ना कम कर दिया है।

-स्मरण शक्ति को भी पहुँचता है नुकसान। पहले लोग एक दूसरे का फोन नंबर बड़ी आसानी से याद कर लेते थे, कोई घटजोड़ करना हो तो वह भी झट से उंगलियों पर कर लिया करते थे। यही नहीं लोगों के जन्मदिन या सालगिरह इत्यादि भी आसानी से याद रहती थीं लेकिन अब सब कुछ स्मार्टफोन करता है और बच्चों को अपना दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

-पर्याप्त नींद नहीं लेने से होता है नुकसान। बच्चों को पर्याप्त नींद लेना जरूरी है लेकिन स्मार्टफोन की लत लग जाये तो बच्चे माता-पिता से छिप कर रात को स्मार्टफोन पर गेम खेलते रहते हैं या फिर कोई मूवी आदि देखते हैं जिससे उनके सोने के समय में तो कटौती होती ही है साथ ही लगातार स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों को भी नुकसान होता है।

-स्वभाव में आता है परिवर्तन। ज्यादातर बच्चे जिनको स्मार्टफोन की लत लग चुकी है अगर आप उनकी तुलना उन बच्चों से करेंगे जोकि स्मार्टफोन से दूर हैं तो पाएंगे कि स्मार्टफोन उपयोग करने वाले बच्चे सिर्फ वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे हैं और घर वालों से उन्हें कोई मतलब नहीं है। साथ ही उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो चुका होता है। अगर आप उन्हें थोड़ी देर के लिए भी स्मार्टफोन से दूर करेंगे तो वह गुस्से में आ जाएंगे या फिर चिल्लाना शुरू कर देंगे।

-उम्र से पहले ही पता लग जाता है सब कुछ। स्मार्टफोन में आप तरह तरह के एप डाउनलोड कर सकते हैं साथ ही यूट्यूब पर जो भी वीडियो चाहे देख सकते हैं और इंटरनेट पर हर तरह की सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में बच्चों को जो चीजें एक उम्र में जाननी चाहिए वह उन्हें कम उम्र में ही पता लगने लगती हैं जिसका उनके दिमाग पर असर होता है। हाल ही में दिल्ली में एक खबर आई कि एक पांच साल के लड़के ने अपनी हमउम्र लड़की से बलात्कार किया। इस घटना के पीछे भी यही माना गया कि संभवतः मोबाइल फोन पर कोई क्लिप आदि देख कर वह लड़का प्रेरित हुआ होगा।

-हिंसक भी हो जाते हैं या अवसाद में चले जाते हैं। कई ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं कि किसी कारण से बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है और ऐसे किसी सोशल फोरम को ज्वॉइन कर लेता है जहां उसे अपनापन लगता है तो उसका गलत फायदा उठा लिया जाता है। ब्लू व्हेल गेम इसका सशक्त उदाहरण है जिसे खेलने वाले को खुद ही मौत को गले लगाना होता है। इसके अलावा बहुत से ऐसे गेम हैं जोकि हिंसक हैं और इसे लगातार खेलते रहने से स्वभाव हिंसक हो जाता है।


बच्चों की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएँ

-कहते हैं ना कि बदलाव खुद से ही शुरू होता है, इसके लिए आप खुद भी दिन भर स्मार्टफोन से चिपके रहने की आदत को बदलें और घर पर परिवार के साथ समय बिताएँ ना कि फोन पर। घर पर बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में बात करें और जितना समय घर पर रहें बच्चों के साथ किसी ना किसी गतिविधि में लगे रहें। इससे बच्चे धीरे-धीरे स्मार्टफोन से दूर होते जाएंगे और आपके साथ समय बिताना उन्हें अच्छा लगेगा।

-हर बच्चे की किसी ना किसी चीज में रुचि होती है आप उसके मुताबिक उसे डांस क्लास, स्पोर्ट क्लास, म्यूजिक क्लास, पेंटिंग क्लास या अन्य कोई ज्वॉइन करवा सकते हैं।

-बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और उनके साथ खुद भी खेलें। इससे बच्चों का शारीरिक विकास भी होगा और आपको भी मजा आयेगा।

-बच्चों को हम हर तरह की सुविधा देना चाहते हैं और उनसे कोई काम नहीं करवाते, यह तरीका गलत है। बच्चों को घर के रोजमर्रा के कामों में कुछ ना कुछ योगदान लें इससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का भी अहसास होगा और चीजों का महत्व भी पता चलेगा।

-बच्चों को अगर सिर्फ इसलिए फोन देना है कि वह आपके साथ संपर्क में रहे तो उसे स्मार्टफोन देने की बजाय साधारण फोन दें इसका दुरुपयोग होने की संभावना कम होती है।

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New Delhi: अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी Boeing ने एक ऐसा जेट तैयार किया है, जो एक पेंट हाउस जैसी सुविधाओं से लैस है। इस विमान में 40 पैसेंजर्स एक बार में यात्रा कर सकते हैं।

1 घंटे का किराया 49 लाख

विमान के अंदर बेडरूम, आलीशान डाइनिंग रूम, ऑफिस एरिया, सिनेमा और पेंटहाउस की सभी लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं।
ये प्राइवेट जेट है Boeing-787 '2-DEER'। हालांकि, Boeing ने जब इसे तैयार किया था, तो ये साधारण कमर्शियल प्लेन था जिसमें 250 से 350 पैसेंजर्स सफर कर सकते थे। इस प्राइवेट जेट को 40 लोगों के लिए खासतौर पर कन्वर्ट किया गया और इसमें खर्चा आया कुल 2 हजार करोड़ रुपए का।
Flying penthouse के नाम से प्रख्यात इस ड्रीम जेट में पेंटहाउस की तरह फुल साइज का मास्टर बेडरूम सुइट, गेस्ट रूम, लिविंग रूम और एंटरटेनमेंट सुइट समेत सभी सुविधाएं हैं। इसके अलावा प्लेन में सभी मॉडर्न टेक्नोलॉजी यूज की गई हैं। जेट में पैसेंजर्स को टैबलेट भी दिया जाता है ताकि वो अपने आसपास की लाइटिंग कंट्रोल करने के साथ टीवी भी ऑपरेट कर सकें।
प्लेन के पिछले हिस्से में बिजनेस क्लास की तरह ही 18 फुल फ्लैट सीट्स दी गई हैं। ड्रीम जेट में केबिन क्रू के लिए अलग से रेस्ट स्पेस है। इस प्लेन को तैयार करने में करीब 2159 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके डिजाइन पर बोइंग के साथ-साथ Yatch और Aircraft डिजाइनर Pierrejean Design ने काम किया है।

इसमें लगी एयर टेक्नोलॉजी के जरिए ट्रैवल सिकनेस और केबिन में मौजूद हवा से कीटाणु फिल्टर करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ड्रीम प्लेन में एक बड़े होटल के जैसी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इससे नॉनस्टॉप 17 घंटे और 10 हजार मील तक का सफर तय किया जा सकता है।

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