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9 mobile-number
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आपने आस पास  मौजूद कई डरावनी जगहों के बारे में तो सुना होगा ,  जिनके लेकर कई प्रकार की अफवाहें फैली होती हैं , पर अपने किसी मोबाइल नंबर के बारे में सुना है ,जो लोगों को डराने का काम करता हो, इन दिनों एक ऐसा मोबाइल नंबर प्रचलित है जिससे लोग बस डरे जा रहे हैं ।


बता दें की एक ऐसा फोन नंबर जिसे जिसने भी खरीदा है वह मर गया , और इस नंबर को भूतिया नंबर माने जाने की पात कही जाती है, और बताया जाता है कि अब तक इस नंबर को जिसने भी इस्तेमाल किया है उसकी मौत हो गई है, और इस फोन नंबर से जुड़ी ऐसी घटनाएं कई बार हुईं है , जिसके बाद से लोगों के मन में खौफ जन्म ले रहा  है औऱ हर इंसान इस नंबर से कोसों दूर रहना चाहता है ।
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बताया जा रहा है कि यह नंबर  बुल्गारिया का है , साथ ये बात निकलकर सामने आई है कि सबसे पहले इस नंबर को मोबीटेल कंपनी के सीईओ ने खरीदा था। इस कंपनी की सीईओ व्लादमीर गेसनोव ने सबसे पहले इस नंबर को अपने लिए जारी करवाया था ।
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यह इंडियन बंदा कर चुका 110 महिलाओं को डेट, 365 का है इरादायह इंडियन बंदा कर चुका 110 महिलाओं को डेट, 365 का है इरादा
किसी लड़की से बात करने में अक्‍सर लड़के हिचकिचाते हैं। छोटी से छोटी बात का इजहार करने से पहले सौ बार सोचते हैं। ऐसे में कोई बंदा अगर सौ से अधिक बंदियों को डेट कर चुका हो तो।
110 महिलाओं को कर चुके हैं डेट
हम आप को एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जो अब तक 110 से ज्यादा महिलाओं के साथ डेट पर जा चुका है। ये जनाब कोई और नहीं सुंदर रामू हैं। सुंदर चेन्नई के फैशन फोटोग्राफर और तमिल फिल्मों के एक्टर है। रामू का मिशन है कि साल के अंत तक 365 महिलाओं के साथ डेट करेंगे। यानी हर रोज वो एक महिला के साथ डेट पर जायेंगे। डेट पर जाने से पहले सुंदर के कुछ अपने नियम हैं। वो कभी किसी सुंदर जगह का चुनाव नहीं करते। वो कभी खाने का आर्डर कभी नहीं देते। सामने वाला जो भी आर्डर करता है सुंदर वही खाते हैं। 
सुंदर ने 105 साल की महिला को भी किया डेट
सुंदर कभी भी खाने या घुमने का कोई बिल नहीं देते हैं। जो महिला उनके साथ डेट पर जाती है, वो ही सारे बिल चुकाती है। सुंदर अब तक 21 साल की युवती से लेकर पांडिचेरी की 105 साल की बुजुर्ग महिला के साथ भी डेट कर चुके हैं। सुंदर के इस मिशन का मकसद यूनीक फोटो प्रोजेक्ट के साथ ही हर उम्र की महिलाओं से मिलना और उनके विचारों को जानना है। सुंदर कई फेमस एक्ट्रेस, जर्नलिस्ट, फॉरेनर और सेलेब्रिटी को भी डेट कर चुके हैं। इनमें एक्ट्रेस श्रिया सरन, लेखा और एक्ट्रेस व आरजे सुचित्रा कार्तिक कुमार भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, सुंदर चेन्नई में एक डीएमके नेता के घर उनकी पत्नी के साथ भी डेट कर चुके हैं।

भारत में रहने वाली कुछ ऐसी जनजातियां भी हैं, जिनके बारे में समाज को बहुत कम पता है. इन जनजातियों के रहन-सहन का तरीक़ा, आज भी वैसा ही है जैसा आदिमानवों का था.
विकास और आधुनिकता से मीलों दूर, इन जनजातियों की जीवन शैली को सभ्य समाज, असभ्य कहता है. ऐसी ही कुछ जनजातियां अंडमान और निकोबार द्वीप पर भी रहती हैं, जिनके बारे में हम कुछ भी नहीं जानते.
अंडमान और निकोबार में Negrito और Mongoloid जनजातियां रहती हैं. इनमें Great Andamanese, Sentinelese, Jarawas और Onge प्रमुख हैं.
जनजातियों को आदिवासी भी कहा जाता है.

1. Jarawas


Source: Cloud
Jarawa जनजाति दक्षिणी अंडमान में रहती है. इनकी संख्या 200 से 400 के बीच में है. इस जनजाति के लोगों का संपर्क आधुनिक समाज से कम ही है.

2. Onge


Source: Jarawa
इस जनजाति के लोगों का मुख्य काम शिकार और खाने की तलाश करना है. आधुनिक समाज से इनका संपर्क न के बराबर है.

3. Jangil


Source: Realunex
Jangil भी Jarawa जनजाति के ही वंशज हैं लेकिन Rutland Island की वजह से ये उनसे थोड़े कटे हुए हैं.

4. Shompen


Source: Blogspot
Shompen निकोबार के मूल निवासी हैं. ये निकोबार द्वीप के मध्य में बसते हैं.

5. Sentineles


Source: Independent
इस जनजाति का संपर्क बाहरी दुनिया से बिलकुल भी नहीं है. ये अंडमान के मूल निवासी हैं. ये दुनिया की सबसे ख़तरनाक जनजातियों में से एक है.

क्या ख़ास है अंडमान और निकोबार द्वीप में ?


Source: Cloud
दो बड़े द्वीपों में 572 छोटे-छोटे द्वीप बसे हैं. इस द्वीप का क्षेत्रफल लगभग 8,249 किलोमीटर है. Landfall Island और इंदिरा पॉइंट, भारतीय सीमा के आख़िरी दो छोर हैं. जानिये इस द्वीप की कुछ ख़ास बातों के बारे में.

अंडमान और निकोबार द्वीप के अनोखे पक्षी

1. White Starling


Source: Blogspot

2. निकोबार में पाया जाने वाला विचित्र कबूतर


Source: Nejohnston

3. Andaman Serpent Eagle


Source: Envis

4. White Bellied Sea Eagle


Source: Birdlife

अंडमान की Cellular जेल


Source: Youtube
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में, स्वतंत्रता सेनानियों को काले पानी की सज़ा दी जाती थी. सज़ा पाए क्रांतिकारी यहीं रखे जाते थे.

Barren Island


Source: HT
इस द्वीप में भारत की इकलौती जीवित ज्वालामुखी है. इस द्वीप पर कोई नहीं रहता.

Havelock Island


Source: Youtube
Havelock Island, अंडमान का सबसे बड़ा द्वीप है.

अंडमान और निकोबार के कुछ अनोखे जीव 

1. Leatherback Sea Turtle


Source: Wekimedia
ये कछुआ की सबसे बड़ी प्रजाति है.

2. Coconut Crab


3. Black Eared Flying Fox

Source: Youtube
ये चमगादड़ों की सबसे बड़ी नस्ल है.

4. Banded Sea Krait


Source: Wekimedia
ये दुनिया के सबसे ज़हरीले समुद्री सांपों में से एक है.

5. Reticulated Python


Source: Indianexpress
 दुनिया के सबसे बड़े और लंबे Pythons यहीं पाए जाते हैं. 
अंडमान और निकोबार द्वीप में 9 नेशनल पार्क हैं. यहां के वन्य जीव-जंतु बहुत से मामलों में दुनिया से अलग हैं. प्रकृति ने इतनी विविधता भारत के किसी भी राज्य को नहीं दी है जितनी यहां है. यहां की जनजातियों को समाज की मुख्य धरा में लाने की कोशिश सरकार कर रही है लेकिन अब तक सरकार को अपेक्षित सफ़लता नहीं मिली है. 

Article Soure: Walkthroughindia

दुनिया में लोग कई चीज़ों और हालातों से डरते हैं. लेकिन कुछ डर, डर न रहकर फ़ोबिया बन जाते हैं. आपने लोगों के ऊंचाई का डर, पानी का डर और संकरी जगहों से डरते हुए सुना या देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी किसी को कॉफ़ी के बबल्स से डरते हुए देखा है?
इस डर को ट्रायोफ़ोबिया कहते हैं. दरअसल, इस फ़ोबिया में लोगों को छोटे-छोटे छेद के झुंड से डर लगता है. एक रिसर्च में इसकी नई वजह सामने आई है. 



इस स्टडी से पहले ये ये समझा जाता था कि लोगों में धीरे-धीरे गोल छेदों से घबरा जाने की प्रवृत्ति आ जाती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ऐसी आकृतियां कई ज़हरीले जानवरों, जैसे सांप, ऑक्टोपस आदि में पाए जाती हैं.
ब्रिटेन में University of Kent के टॉम कूफ़र की रिसर्च बताती है कि ये स्थिति किसी संक्रामक बीमारी के प्रति सेन्सिटिविटी का परिणाम है. ये सेन्सिटिविटी आपके अंदर धीरे-धीरे विकसित होती है. कई संक्रामक बीमारियों की वजह से त्वचा पर ऐसे ही गोल धब्बे बनते हैं.
Cognition And Emotion नाम के जर्नल में छपे इस शोध में 300 से ज़्यादा लोगों को शामिल किया गया था. तुलना के लिए 300 ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया था, जिन्हें ट्रायोफ़ोबिया नहीं था. इन दोनों ग्रुप्स को कुछ तस्वीरें दिखाई गईं. कुछ संक्रामक बीमारियों की तस्वीरें थीं, जिनमें स्मॉल पॉक्स, चकत्ते वगैरह थे. जबकि बाकी तस्वीरों में ऐसी चीज़ें थीं जिसमें गोल छेद तो होते हैं, लेकिन इनका किसी बीमारी से कोई संबंध नहीं है, जैसे दीवार की ईंटों में छेद, कमल के बीज आदि.
संक्रामक बीमारियों वाली तस्वीरें दोनों ही ग्रुप के लोगों को बुरी लगीं. जिन्हें ट्रायोफ़ोबिया नहीं था, उन्हें बाकी तस्वीरों से कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ट्रायोफ़ोबिया वाले लोगों को ये तस्वीरें भी स्किन पर चकत्तों वाली तस्वीरों जितनी ही बुरी लगीं.
ट्रायोफ़ोबिक लोगों को किसी भी गोल छेद के झुंड से डर लगता है फिर चाहे वो कॉफ़ी बबल्स हों या साबुन का झाग. इसकी वजह भी इस रिसर्च के बाद अब साफ़ हो चुकी है.

Article Source : Hindustantimes

हमारे देश में कुछ और हो न हो, पर Talented लोगों की भरमार है. किसी में ढेरों मिर्चियां खाने का Talent है, तो कोई कोबरा को भी किस करने की हिम्मत रखता है. जो भी हो अपन लोगों की बात ही कुछ और है.
ऐसे ही एक अत्यन्त Talented बंदे हैं, 32 वर्षीय, मुकेश कुमार फ़्रॉम हरियाणा. मुकेश ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर उल्टे चढ़ जाते हैं. चाहे वो नारियल का पेड़ हो, या खजूर का, इन सब पर चढ़ना मुकेश के उल्टे शरीर का काम है.

बचपन में तो हम सभी को पेड़ों पर चढ़ने का शौक़ रहता है, मुकेश को भी था. 13-14 साल की उम्र में ये शौक़ Addiction बन गया, पेड़ों पर चढ़े बिना, उन्हें चैन ही नहीं आता. ठीक बाहुबली के प्रभास माफ़िक.
बिना अभ्यास के तो कोई भी काम नामुमकिन है. मुकेश ने भी पेड़ पर चढ़ने का ख़ूब अभ्यास किया. कई बार गिरे और घायल हुए. कई बार चोटिल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

मनोज एक मज़दूर हैं और दो जून की रोटी के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, पर इस आम आदमी की आंखों में एक ख़्वाब था, एक अनोखा रिकॉर्ड बनाने का और Guinness Books of World Records में अपना नाम दर्ज कराने का.
शुरू-शुरू में मुकेश सिर्फ़ 2-3 फ़ीट ही चढ़ पाते थे, पर अब उनका दावा है कि वे 50 फ़ीट के भी पेड़ पर आसानी से चढ़ सकते हैं.
अब इस वीडियो में मुकेश के टैलेंट का लुत्फ़ उठा सकते हैं. हमारी आपसे गुज़ारिश है कि इस ऐक्ट को कॉपी करने की कोशिश न करें.
Source: Dw

किसी मॉडल या एक्ट्रेस को बिकिनी पहने बहुत बार देखा है, लेकिन ये ख़्याल कभी नहीं आया कि बिकिनी ने अपनी यात्रा कैसे की. भारत में भले ही किसी आम इंसान का बिकिनी पहने देखे जाना आज भी Rare Sights में से एक है, लेकिन दुनिया में भी जब पहली बार बिकिनी आयी थी, तो हर किसी के कान खड़े हुए थे.

Source: cntraveler 
अपने पहले दिन से लेकर अभी तक बहुत ख़ास और मज़ेदार रही है इस टू-पीस स्विम ड्रेस की जर्नी:

अमेरिका में परमाणु परिक्षण साइट का नाम है बिकिनी


Source: usnews
Surprise मिला न? बिकिनी को बनाने वाले Louis Reard ने अपनी इस बोल्ड ड्रेस का नाम US Pacific Nuclear साइट पर रखा. 1940 का वो दशक था, जब दुनिया के सामने ये नाम आया और कभी न भूलने वाला नाम बन गया.

Louis कोई डिज़ाइनर नहीं, ऑटोमोबाइल इंजीनियर थे


Source: lolawho
बिकिनी किसी फैशन डिज़ाइनर नहीं, एक इंजीनियर के दिमाग की उपज थी. वैसे इसे बनाने के बाद Louis का नाम दुनिया के सबसे बड़े डिज़ाइनर के रूप में स्थापित हो गया था.

मॉडल नहीं, डांसर थी बिकिनी पहनने वाली महिला


लुइस को अपनी इस बोल्ड ड्रेस के लिए कोई मॉडल नहीं मिल रही थी इसलिए उन्होंने डांसर Micheline Bernardini को इसके लिए ढूंढा.

सबसे पहली बिकिनी ने पास किया था रिंग टेस्ट


Source: ftwmedia
Louis का मानना था कि बिकिनी को एक अंगूठी के अंदर से निकल जाना चाहिए और उनका पहला बिकिनी पीस ऐसा ही था. Micheline ने जब पहली बार इसके लिए पोज़ किया था, तो उनके हाथ में एक बेहद छोटा बॉक्स था, जिसमें शायद रुमाल जितनी जगह हो. इस बॉक्स में बिकिनी आसानी से आ जाती थी.

फ़िल्मों ने फ़ेमस की बिकिनी

Source: agnautacouture
बिकिनी को ट्रेंड बनाने में सबसे बड़ा रोल हॉलीवुड फ़िल्मों का था. इन सभी फ़िल्मों मं बीच के बिकिनी दिखा कर, इसे Popularize करने की कोशिश की गयी. 
Source: Huffpost

शहर के अलग-अलग चौराहों पर घूमने वाले एक मानसिक विमंदित भिखारी के अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद लोगों ने उसके कपड़े खोले तो सभी की आंखें फटी रह गई।



उदयपुर: शहर के अलग-अलग चौराहों पर घूमने वाले एक मानसिक विमंदित भिखारी के अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद लोगों ने उसके कपड़े खोले तो सभी की आंखें फटी रह गई। पेट पर तार से बंधा एक कार्टून, उसमें फटे-पुराने तरह-तरह के नोट के अलावा 1 से 10 रुपए तक के जंग खाए सिक्के मिले। करीब 2100 रुपए के तो सिक्के ही निकले। नोटों का तो कोई हिसाब ही नहीं। 


दुर्गन्ध मारते इन कपड़ों को खोलने में अगर पलभर भी देर हो जाती तो भिखारी की मौत हो जाती। कपड़े इतने सख्त हो गए थे कि लोगों को इन्हें चाकू से फाडऩा पड़ा। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है, अभी चिकित्सकों ने उसकी हालत स्थिर बताई है।


पुलिस ने बताया कि एक भिखारी पुराने कंट्रोल रूम से बापूबाजार वाले मार्ग पर मदहोशी हालत में लोगों के पीछे दौड़ रहा था। हुडदंग के बीच वह अचानक गिर गया। बेहोशी हालत में ही उसके मुंह से झाग निकलने लगे। लोगों ने उसकी हालत समझते देर नहीं लगी। उन्होंने उसके तुरंत कपड़े खोले। भिखारी ने चार से पांच शर्ट पहन रखे थे जो बारिश के पानी से गिले हो गए थे। नमी के कारण शरीर पर फफोले व चकते पड़ गए थे। इन कपड़ों पर उसने तार से कस कर गत्ते का कार्टून, थैलियां व मैले कुचले फटे कपड़े बांध रखे थे। इनमें कागज, थैलियों के बीच पुराने नोट के साथ ही सिक्के रखे हुए थे। लोगों ने उसके दुर्गन्ध मारते कपड़ों को खोलकर उस पर पानी डालकर साफ किया। उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया। 

फूले पेट का खुला राज 
पुलिस को कपड़ों के बीच गत्ते के कार्टून में काफी नोट व सिक्के मिले। नोट फटे-पुराने थे। सिक्कों पर जंग आ गया था। बताया जाता है कि यह भिखारी उदियापोल से देहलीगेट के बीच ही घूमता रहता था, छेडऩे पर यह हर किसी के पीछे मारने तक दौड़ता। इसका पेट काफी आगे निकलने के कारण इसकी अलग ही पहचान होने से अमूमन उसे सब जानते थे। अगर गलती से उसे कोई हाथ लगा देता तो वह पत्थर तक मार देता। बाजार में निकलने के दौरान हर किसी पर बड़बड़ाता हुआ निकलता था। अचानक बेहोश होने पर उसके कपड़े खोले तो फूले हुए पेट पर कचरा, नोट व सिक्के मिले।  

किसी शिकारी जानवर के लिए छुपने की कला बहुत ज़रूरी होती है. अब वो इंसान तो है नहीं कि दूर से निशाना लगाया और शिकार चित्त. अधिकतर शिकारी जानवरों में ये खूबी होती है, वो पेड़ की हरियाली में भी छिप जाते हैं और सूखी घास में भी. 
हाल ही में जर्मनी के वाइल्ड लाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र Ingo Gerlach ने, केन्या के मसाई मारा में ऐसे ही घात लगाए चीते को अपने कैमरे में कैद किया. ये चीता Ingo को तो दिख गया पर हमें खोजने में 10 मिनट लग गए.

अगर आपको ये चीता दिख रहा है तो कमेंट करिए !

और अगर नहीं दिख रहा तो देख ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

रायपुर। आमतौर पर यही कहा जाता है कि जन्म और मृत्यु का समय तय होता है, लेकिन इन दिनों जन्म के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। लोग अपनी सुविधा और पसंदीदा दिन व समय का ध्यान रख रहे हैं। महिलाएं स्वयं ही दर्द से बचने के लिए पसंदीदा दिन, समय और मुहूर्त में सीजर डिलीवरी करवा रही हैं।

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बताया जा रहा है कि शासकीय अस्पताल ज्यादातर सीजर से बचते हैं, इसलिए इन दिनों निजी अस्पतालों की ओर ज्यादा रुख हो रहा है। गायनेकोलॉजिस्ट का कहना है कि लोग इन दिनों डिलीवरी के लिए शुभ दिन और शुभ मुहूर्त का ध्यान रख रहे हैं।
पहले से ही वे पंडितों से पूछताछ कर लेते हैं और उसके आधार पर ही चिकित्सकों से संपर्क करते हैं। इसके साथ ही दूसरा बड़ा कारण तो यह है कि महिलाएं भी इन दिनों दर्द से बचना चाहती हैं।
विशेषज्ञों द्वारा दिए गए समय में अगर विलंब होता है तो परिजन स्वयं ही अपनी पसंदीदा तारीखों में सीजर डिलीवरी के लिए कह देते हैं। सीजर डिलीवरी के मामले में शासकीय अस्पतालों की तुलना में राजधानी के निजी अस्पतालों का आंकड़ा बहुत अधिक है। निजी अस्पतालों में करीब 60 फीसदी सीजेरियन डिलीवरी फीसदी होती है।
अच्छा दिन था
विश्व योग दिवस के दिन बच्ची को जन्म देने वाली गीता सोनी पति पंकज सोनी ने बताया कि डॉक्टर ने पहले से 20 से 23 जून के बीच का समय दिया था। विश्व योग दिवस का दिन था तो उन्होंने इसी दिन सीजर डिलीवरी के लिए कहा।
डिलीवरी शुभ दिन चाहिए थी
पूनम मिश्रा पहले से ही पेन से काफी डरी हुई थी। इसके अलावा शुभ दिन में ही डिलीवरी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने पहले ही तय कर लिया था सीजर डिलीवरी करानी है। 

प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा
नॉर्मल डिलीवरी से पैदा हुए बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है, इसलिए सीजर डिलीवरी का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। विशेषकर पहले प्रसव के दौरान तो यह बहुत ही जरूरी है।- डॉ. ज्योति जायसवाल, प्रोफेसर, पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज


दुनिया में ऐसे तमाम तरह के रोमांच हैं जिन्हें करने से खुशी मिलती है। लेकिन इसी दुनिया में एक ऐसा टॉयलेट भी बनाया गया है जहां रोमांच (एडवेंचर) का अनुभव लिया जा सकता है। जिंदगी में कोई बड़ी खुशी जितना सुकून देती है उतनी ही खुशी एक इंसान को तब भी मिलती है जब वो शरीर से हल्का होता है। भारत में पुरुषों के लिए सड़क के किनारे या पब्लिक प्लेस पर भी हल्का होने की मान्यता प्राप्त है लेकिन महिलाओं के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है।

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शायद इसी बात को ध्यान में रखकर लोनावला के 'डेला एडवेंचर रिसोर्ट' में ऐसा टॉयलेट बनाया गया है जहां पुरुषों को हल्का होते वक्त अपनी मर्दानगी पर खतरा मंडराते हुए दिखाई देता है। लेकिन इस टॉयलेट में मूत्र विसर्जन करना अपने आप में एक बड़ा एडवेंचर है। क्योंकि इस टॉयलेट में हल्का होते वक्त हर आदमी लड़कियों के नजर में रहता है।

दरअसल ये लड़कियां स्क्रीन के पीछे रहती हैं। पर इनकी हरकतें देख कर कोई भी टेंशन में आ सकता है। कोई कैंची ले कर खड़ी होती है, तो कोई इंच टेप लेकर। बाकी आप समझदार हैं, अगर नहीं हैं, तो इस वीडियो को देख लीजिए! 

Image result for यह है लोगों को खाने वाला पहाड़, अब तक 80 लाख लोगों की हो चुकी है मौत

बोलिविया के दक्षिण -पश्चिम हिस्से में केरो रिको माउंटेन लोगों को खाने वाला पहाड़ बन चुका है
नई दिल्ली। इसे मौत का पहाड़ कहें तो भी गलत नहीं होगा। बोलिविया के दक्षिण -पश्चिम हिस्से में केरो रिको माउंटेन लोगों को खाने वाला पहाड़ बन चुका है। लेकिन यह हमेशा से ऐसा नहीं था। बोलिविया पर लंबे समय तक स्पेन के लोगों ने राज किया है। वे इस पहाड़ को रिच माउंटेन कहते थे, क्योंकि यहां काफी मात्रा में चांदी पाई जाती थी। स्पेनियों को लगता था कि यह पूरा पहाड़ ही चांदी के अयस्क से बना है। हालांकि स्थानीय लोग इस पहाड़ को अभिशाप के रूप में देखते हैं। अनुमान है कि 16वीं सदी से अब तक यह पहाड़ कुल 80 लाख लोगों की जिंदगी लील चुका है।
1545 में स्पेनियों ने केरो रिको पहाड़ की तलहटी में एक छोटा शहर स्थापित किया। उन्होंने बोलिविया के करीब 30 लाख मूल निवासियों को जबरदस्ती माइनिंग के काम में लगाया। इस पहाड़ से सदियों से चांदी निकाली जा रही है। अनुमान है कि स्पेनियों ने इस पहाड़ से 2 अरब औंस चांदी निकाली। कहते हैं कि इसी चांदी ने स्पेन को अमीर बनाया है। आलम यह है कि लगातार खनन के चलते इस पहाड़ की ऊंचाई काफी कम रह गई है। लगातार खनन होने के चलते यहां जगह-जगह गड्ढे और सुरंगें बनी हुई हैं। इस वजह से अब माइनिंग और कठिन हो गई है और हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह इस कदर पोला हो चुका है कि कभी भी भरभराकर बैठ सकता है। वर्तमान में यहां लगभग 15 हजार माइनर्स काम करते हैं। विधवाओं की स्थानीय एसोसिएशन का कहना है कि हर महीने औसतन 14-15 महिलाएं विधवा हो जाती हैं, क्योंकि उनके पति इन खदानों में काम करते हुए मारे जाते हैं। यहां परिस्थितियां बेहद खराब हैं। चारों तरफ धूल और चट्टानों से निकलने वाली जहरीली गैसों का साम्राज्य है। हर श्रमिक को दिनभर में खुदाई और अयस्क पीठ पर लादकर लाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके चलते यहां औसत जीवनकाल सिर्फ 40 साल ही है। इन भीषण परिस्थितियों में बचे रहने के लिए उन्होंने तमाम माइंस में एल टियो की मूर्तियां लगा रखी हैं। एल टियो डेविल है, जिसके सींग होते हैं। उसे गहराइयों का स्वामी माना जाता है।
इतिहासकार एडुआर्डो गेलीनो के अनुसार 16वीं सदी से अब तक इन पहाड़ों में 80 लाख लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि 80 लाख में उन लोगों को भी शामिल कर लिया गया है, जो इस जगह को छोड़कर चले गए थे। बहरहाल जो भी, मौतों का आंकड़ा बेशक बहुत बड़ा है।


जिहा..

ब्रिटेन में ऐसा पहली बार हुआ है जब 21 वर्षीय एक पुरुष ने बच्चे को जन्म दिया है. ऐसा उसने लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरने के दौरान एक शुक्राणुदाता के सहयोग से किया.

 
ब्रिटेन में पहली बार 21 साल के पुरुष ने दिया बच्चे को जन्म
क्रॉस का 21 साल पहले एक लड़के के रूप में जन्म हुआ था.

खास बातें

  1. लड़की का जन्म 16 जून को ग्लॉस्टरशायर रॉयल अस्पताल में हुआ
  2. लिंग परिवर्तन के बाद महिला से पुरुष बने थे हेडन क्रॉस
  3. फेसबुक के जरिए उन्हें शुक्राणुदाता मिला था
नई दिल्ली: ब्रिटेन में ऐसा पहली बार हुआ है जब 21 वर्षीय एक पुरुष ने बच्चे को जन्म दिया है. ऐसा उसने लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरने के दौरान एक शुक्राणुदाता के सहयोग से किया. इस साल की शुरुआत में एक शुक्राणुदाता के सहयोग से गर्भवती होने की घोषणा करने के बाद से हेडन क्रॉस दुनिया भर में सुर्खियों में आ गए थे. उन्होंने एक लड़की को जन्म दिया है. क्रॉस ने 'द सन' को बताया कि उनकी बेटी ट्रिनिटी-लेई 'परी' है. क्रॉस ने ऑपरेशन से बेटी को जन्म दिया है. लड़की का जन्म 16 जून को ग्लॉस्टरशायर रॉयल अस्पताल में हुआ.लिंग परिवर्तन के बाद महिला से पुरुष बने क्रॉस कानूनी रूप से तीन साल से एक पुरुष के रूप में रह रहे हैं. हालांकि ब्रिटेन के सरकारी नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने उन्हें अपना शुक्राणु फ्रिज करने की प्रक्रिया से मना कर दिया था. इससे परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. इस कारण भविष्य में शुक्राणु की मदद से वह बच्चा पैदा करने की संभावना रखते थे.

फेसबुक के जरिए उन्हें शुक्राणुदाता मिला और वह गर्भधारण में सफल रहे. क्रॉस ने कहा, वह हर तरीके से अच्छे हैं. वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं. मैं काफी भाग्यशाली हूं. लड़की को जन्म देने के बाद क्रॉस अब जल्द से जल्द पूरी तरह से लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजरना चाहते हैं. क्रॉस का 21 साल पहले एक लड़की के रूप में जन्म हुआ था और उनका नाम पेज था.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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