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Jaipur: क्या आप या आपके किसी परिचित के सिर के बाल समय से पहले ही सफेद हो गए हैं? क्या कम उम्र में ही बुढ़ापे के लक्षण दिख रहे हैं? क्या उनकी हड्डियों में विकृति आ रही है या वह टेढ़ी हो रही हैं? अगर इन प्रश्नों में से किसी का भी जवाब हां में है तो आप इसकी वजह जरूर जानना चाहेंगे।
आपके जानने वाले, परिचित, रिश्तेदार और यहां तक कि आस-पड़ोस के लोग भी आपको कई तरह के सुझाव देंगे। कई लोग इसका कारण बताते हुए ऐसे-ऐसे उपाय बताएंगे जो शायद आप कर भी न पाएं। एक कारण हम आपको बता रहे हैं। हो सकता है यही वह कारण हो जिसने आपकी रातों की नींद उड़ा रखी हो। हम यहां आपको इस तरह की परेशानियों से बचने के उपाय भी बताएंगे।
पानी है आपकी समस्याओं की जड़
संभवत: आपकी समस्याओं की जड़ वह पानी ही है, जिसे आप पीते हैं। जिससे आप खाना पकाते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की हर जरूरत में इस्तेमाल करते हैं। हो सकता है पानी के बारे में भी आपको किसी ने कहा हो, लेकिन यहां हम आपको उदाहरण सहित बता रहे हैं कि कौन सा पानी आपको ऐसी बीमारियां दे रहा है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।
बुढ़ापा बांट रहा डीप बोरिंग का पानी

शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी पानी की सप्लाई में खामियों के चलते हम और आप जमीन में डीप बोरिंग करके जहां भू-गर्भ जल स्तर को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं अब इससे समय से पहले बुढ़ापा भी आ रहा है। टीएमबीयू पीजी भूगोल विभाग के हालिया शोध में यह बात सामने आई है।
बिहार में भागलपुर शहर के पांच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए एक शोध के बाद जो तथ्य एकत्रित किए गए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। 150 फीट से नीचे पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है। इससे दांत पीले होने के साथ-साथ हड्डियों में ढेढ़ापन जैसी बीमारी बढ़ रही और लोग जल्द बुढ़ापे के शिकार हो रहे हैं.
क्यों बढ़ रहा है खतरा
शोधकर्ता डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि भागलपुर के शहरी क्षेत्र के भूगर्भ में रूपांतरित चट्टानें हैं जो नाइस कहलाती हैं। नाइस जमीन के नीचे काफी गहराई तक फैली हैं, जिसके काले हिस्से में फ्लोराइड रहता है। जिस भूगर्भ जल का उपयोग हमलोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते हैं, वह भी वर्षा जल ही है। वर्षा जल भूगर्भ में 150 फीट की गहराई तक पहुंचता है। यह भूगर्भ में फ्लोराइड के प्रभाव को कम या संतुलित करता है। यही वजह है कि इतनी गहराई वाले जल से बीमारी का खतरा नहीं रहता है।
टीएमबीयू में भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एसएन पांडेय कहते हैं, फ्लोराइड की अधिक मात्रा मानव शरीर में जाने से हड्डियों में टेढ़ापन आता है। इस वजह से 35-40 के महिला-पुरुष भी 75-80 वर्ष के वृद्ध की तरह झुककर चलते हैं। दांत में पीलापन, थायरॉयड, आंख, कान और लीवर पर भी प्रभाव पड़ता है।
बता दें कि 200 फीट गहरे बोरिंग के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होती है। यहां आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि मानक से अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के सेवन से हड्डियों में विकृति आती है।
क्या करें?
अगर आपको लगता है कि इतनी गहराई से पानी निकालने के बाद आप उसे गर्म करके पीने के लिए सुरक्षित बना सकते हैं तो यह आपका भ्रम है। इस विषय पर दैनिक खबरे ने हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. केके अग्रवाल से बात की। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पहले तो इतनी गहराई पर बोरिंग करनी ही नहीं चाहिए। इसके बावजूद भी अगर आप इतनी गहराई तक बोरिंग करके पीने के लिए पानी निकाल रहे हैं तो आरओ के जरिए ही आप उसे पीने योग्य बना सकते हैं। उनके अनुसार उबालकर पानी से फ्लोराइड के नुकसान को कम नहीं किया जा सकता है। यही उन्होंने बताया कि विभिन्न शहरों के जल बोर्ड का पानी पीने के लिए सुरक्षित होता है, क्योंकि वह कई परिक्षणों के बाद आम जनता को सप्लाई किया जाता है।
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हम सभी जानते हैं कि बीमारियां कोई सूचना देकर नहीं आती हैं, इसलिए समझदार लोग समय पर ही अपने लिए एक अच्छी HEALTH INSURANCE/हेल्थ पॉलिसी खरीद लेते हैं। वहीं अगर आप किसी खास बीमारी से ग्रसित हैं तो भी बाजार में आपके लिए तरह तरह की पॉलिसियां मौजूद हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि हमें अपने लिए HEALTH INSURANCE/हेल्थ पॉलिसी का चुनाव काफी सोच समझकर करना चाहिए। हम अपनी इस खबर में आपको बताने जा रहे हैं कि हेल्थ पॉलिसी की खरीद के दौरान आपको किन सावधानियों को बरतना चाहिए।
क्या कहना है एक्सपर्ट का-
फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी का मानना है कि एक अच्छी HEALTH INSURANCE/हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले सबसे पहले इसकी कवरेज जान लें। साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि इसके दायरे में कौन-कौन सी बीमारियां और बेनिफिट्स नहीं आते हैं। इसके पैनल में जो भी अस्पताल हैं उनकी टॉप लिमिट क्या है, उसमें डॉक्टर के विजिट के चार्जेस, आईसीयू में भर्ती होने के घंटों पर कोई लिमिट तो नहीं है। यह भी जांच कर लें कि किन-किन स्थितियों में पॉलिसीधारक क्लेम का हकदार नहीं होता है।
पहले से चल रही बीमारियां-इंश्योरर ऐसा मानकर चलते हैं कि अगर कोई बड़ी उम्र में HEALTH INSURANCE/हेल्थ पॉलिसी खरीद रहा है तो जरूर कोई बीमारी होगी। अपने जोखिम को कम करने के लिए वे प्री एग्जिंस्टिंग क्लॉज में पॉलिसी को डाल देते हैं। इसमें आमतौर पर तीन से चार साल तक का वेटिंग पीरियड होता है। इसलिए हमेशा कोशिश करें कि ऐसी पॉलिसी का चयन करें जिसमें वेटिंग पीरियड कम हो, फिर चाहे उसके लिए आपको ज्यादा प्रीमियम ही क्यों न देना पड़ें।
आंशिक भुगतानइसे को-पेमेंट भी कहा जाता है। यह वो राशि होती है जो पॉलिसीधारक हॉस्पिटालाइजेशन के दौरान अदा करता है, शेष क्लेम की गई राशि इंश्योरर भुगतान करता है। आपको बता दें कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकांश HEALTH INSURANCE/हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में को-पेमेंट अनिवार्य होती है। हालांकि, कुछ इंश्योरर को-पेमेंट की राशि फिक्स्ड रखते हैं। जबकि कुछ एक रेंज निर्धारित कर देते हैं। यह 10 से 20 फीसद के बीच होती है। ऐसे प्लान को खरीदें जिसमें को-पेमेंट का क्लॉज न हो।
अस्पताल के रूम के किराये की सीमा-कुछ हेल्थ प्लान में सीमित किराये की कैप लगाई होती है। पॉलिसी के तहत अस्पताल के कमरे की निश्चित राशि तय होती है। अगर मरीज इससे ज्यादा का कमरा लेता है तो इंश्योरर मरीज से अस्पताल के कुल बिल इस अतिरिक्त राशि को चार्ज करता है। उदाहरण के तौर पर अगर कमरे का किराया 4000 रुपये प्रतिदिन है और मरीज 5000 रुपये प्रतिदिन का कमरा लेता है। तो रुम के किराये में 20 फीसद का इजाफा हो गया। अब अगर अस्पताल का कुल बिल 50,000 रुपये है तो इंश्योरर यह 20 फीसद का अतिरिक्त चार्ज कुल बिल में लगा देगा। इससे मरीज को 2000 रुपये की जगह 10,000 रुपये देने पड़े जाते हैं। इसलिए ऐसा प्लान खरीदें जिसमें अस्पताल के कमरे के किराये पर कोई सीमा नहीं है।
रेस्टोरेशन बेनिफिट-हर एक हेल्थ प्लान में एक सम एश्योर्ड लिमिट होती है जो कि पॉलिसीधारक के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। इस सम एश्योर्ड की एक साल में क्लेम करने की सीमा होती है। यदि सम एश्योर्ड से ज्यादा का खर्चा आता है तो पॉलिसीधारक को खुद देना पड़ता है। लेकिन अगर आपने हेल्थ प्लान रेटोरेशन बेनिफिट के साथ लिया हुआ है तो इंश्योरर सम एश्योर्ड को रीस्टोर करके रख देगा ताकि अगर उसी साल में फिर से पॉलिसीधारक बीमार होता है तो सम एश्योर्ड मिल जाए। जानकारी के लिए बता दें कि रेटोरेशन बेनिफिट केवल उस स्थिति में मिलेगा जब एक ही साल में अलग अलग बीमारी का ट्रीटमेंट हुआ हो। एक साल के भीतर एक ही बीमारी के लिए सम एश्योर्ड नहीं मिलता। उदाहरण के तौर पर आपकी पांच लाख की पॉलिसी है। आप बीमार होते हो और दो लाख रुपये का इस्तेमाल कर लेते हो। अब अगर आप उसी साल में फिर से बीमार पड़ते हो तो इंश्योरर वापस सम एश्योर्ड को बढ़ाकर पांच लाख कर देगा।
अस्पतालों का नेटवर्क-HEALTH INSURANCE/हेल्थ पॉलिसी डॉक्यूमेंट में अस्पतालों के पास उनके कोऑडिनेटर्स की एक लिस्ट होती है। पॉलिसीधारक को इस लिस्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए। साथ ही यह देखना चाहिए कि आपके घर के आसपास कौन कौन से अस्पताल हैं। अगर आप ऐसे किसी अस्पताल में भर्ती होते हों जो कि लिस्ट में नहीं है तो मरीज को कैशलैस ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा। अस्पताल का कुल बिल मरीज को अपनी जेब से भरना होगा। उसके बाद उसे यह राशि रींबर्स की जाएगी।
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अगर आप सिर्फ़ टैग देख कर Vegetarian चीज़ें ख़रीदते हैं, तो ज़रा सावधान हो जाईये. शाकाहारी समझी जाने वाली इन डिशेज़ में Non-Veg चीज़ों का कुछ अंश होता हैं.

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अगली बार ज़रा ध्यान दें कि Vegetarian समझ कर आप असल में खा क्या रहे हैं!
source: GP

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इंटरनेट डेस्क। हमारी बॉडी में पानी का सबसे अधिक महत्व है, ये तो हम सभी जानते है। बिना पानी के हम जीवित नहीं रह सकते है। पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। पानी शारीर के विषैले पदार्थों का विनाश करता हैं। एक वयस्क पुरुष के शरीर में पानी उसके शरीर के कुल भार का लगभग 65 प्रतिशत और एक वयस्क स्त्री शरीर में उसके शरीर के कुल भार का लगभग 52 प्रतिशत तक होता है। शरीर में पानी कम होने के कारण आपको काफी प्रॉब्लम आ सकती हैं। आइये जानते है शरीर में पानी की कमी होने पर दिखने वाले संकेतों के बारें में…
अगर बिना किसी बीमारी या कारण आपके सिर में दर्द हो तो ये शरीर में पानी कम होने का संकेत हैं। पानी की कमी होने पर शरीर में ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह में कमी हो जाती है। जिस वजह से सिर में दर्द होने लगता हैं।
यह थोड़ा अजीब है, लेकिन दिन में कम से कम दो बार पेशाब करते वक्त उसका कलर नोटिस करें। अगर उसका रंग हल्का पीला है, तो ठीक है। लेकिन अगर गहरा पीला या भूरा है तो आपको तुरंत पानी पीने की ज़रूरत है।
पानी की कमी कारण आपकी याद्दाशत पर भी काफी फर्क पड़ता हैं। मस्तिषक में पानी की कमी होने पर सोचने-समझने की शक्ति पर भी इसका असर पड़ता है।
अचानक चक्कर आने के कई सारे कारण हो सकते हैं, मसलन दवाओं का असर, नींद की कमी, लेकिन पानी की कमी एक और अहम कारण है।
यदि आप बिना किसी वजह के थकावट महसूस करते हैं तो इसका कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है।


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Jaipur: आप बर्फ का इस्तेमाल तो खूब करते होंगे. कभी पानी में या शरबत या अन्य किसी चीज़ में लेकिन क्या आप जानते हैं बर्फ का इस्तेमाल आप और भी कई चीज़ों में कर सकते हैं।
 बर्फ का इस्तेमाल दवाई के रूप में भी कर सकते हैं तो, सुंदर दिखने के लिए भी कर सकते हैं आइये जानते हैं बर्फ के ये फायदे।
 1. कड़वी दवाई खाने से पहले मुंह में बर्फ का टुकड़ा रख लें, दवाई कड़वी ही नहीं लगेगी।
2. यदि आपने बहुत ज्यादा खा लिया है और खाना पच नहीं रहा, तो थोड़ा-सा बर्फ का टुकड़ा खा ले। खाना शीघ्र पच जाएगा।
3. यदि आपके पास मेकअप का भी समय नहीं है या आपकी त्वचा ढीली पड़ती जा रही है तो एक बर्फ का छोटा-सा टुकड़ा लेकर उसे किसी कपड़े में (हो सके तो मखमल का) लपेट चेहरे पर लगाइए। इससे आपके चेहरे की त्वचा टाइट होगी और यह टुकड़ा आपकी त्वचा में ऐसा निखार ला देगा जो और कहीं नहीं मिलेगा।
4. प्लास्टिक में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर सिर पर रखने से सिरदर्द में राहत मिलती है।
5. यदि आपको शरीर में कहीं पर भी चोट लग गई है और खून निकल रहा है तो उस जगह बर्फ मसलने से खून बहना बंद हो जाता है।
6. कांटा चुभने पर बर्फ लगाकर उस हिस्से को सुन्न कर ले, कांटा या फांस आसानी से निकल जाएगा और दर्द भी नहीं होगा।
7. अंदरुनी यानी गुम चोट लगने पर बर्फ लगाने से खून नहीं जमता व दर्द भी कम होता है।
8. नाक से खून आने पर बर्फ को कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों और रखें, थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाएगा।
9. धीरे-धीरे बर्फ का टुकड़ा चूसने से उल्टी बंद हो जाती है।
10. पैरों की एड़ियों में बहुत ज्यादा तीखा दर्द हो तो बर्फ की क्यूब मलने से आराम मिलेगा।
11. आंखों के काले घेरे दूर करने के लिए खीरे के रस और गुलाब जल को मिलाकर बर्फ जमा लीजिए, फिर उस टुकड़े से काले घेरों पर मालिश करे, बहुत जल्द आपकी समस्या दूर होगी। और यदि ज्यादा देर मोबाइल या कंप्यूटर चलाने के बाद आपकी आंखें दर्द कर रही हैं तो बर्फ के टुकड़े को अपनी आंखों पर रखिए, जल्द ही राहत मिलेगी।
12. यदि आइब्रो बनवाते समय दर्द होता है तो एक बर्फ का टुकड़ा आइब्रो के चारों और घिस लीजिए, इससे यह हिस्सा थोड़ी देर के लिए सुन्न हो जाएगा और आपको दर्द भी नहीं होगा। यही तरीका शरीर के किसी और हिस्से पर भी लागू कर सकते हैं।
13. बर्फ का टुकड़ा गले के बाहर धीरे-धीरे मलने से गले की खराश ठीक हो जाती है।
14. जल जाने के तुरंत बाद बर्फ का टुकड़ा जले हुए स्थान पर लगाने से छाले और जलन शांत होती है। और निशान भी गहरा नही पड़ेगा।

15. इंजेक्शन लगने पर या पैर में मोच आने पर बर्फ मलने से दर्द, सूजन व खुजली कम होती है।


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Jaipur: शराब अक्सर हमारे समाज में आनन्द के लिए पी जाती है। ज्यादातर शुरूआत दोस्तों के प्रभाव या दबाव के कारण होता है और बाद में भी कई अन्य कारणों से लोग इसका सेवन जारी रखते है।
फिर धीरे धीरे उस व्यक्ति को शराब की लत लग जाती है। यदि आप या फिर आपको कोई भी वाला शराब का बहुत ज्यादा आदी हो गया है। आज हम आपको ऐसे अचूक उपाय बताएंगे जिनके माध्यम से केवल एक सप्ताह में शराब को आसानी से अलविदा कहा जा सकता है।



ऐसे पाएं शराब से छुटकारा..

थोड़ी सी अदरक लेकर उसे छोटे-छोटे टुकड़े काट ले। फिर इन पर सेंधा नमक लगा ले। अब इन टुकड़ों पर नीबू का रस निचोड़ ले और इन टुकड़ों को धूप में सूखने के लिए रख दे। सूखने के बाद आपकी दवा तैयार हो जाएगी। अब जब शराबी को नशा करने की इच्छा हो वह इस टुकड़े को मुँह में रखे ले और चूसते रहे। यह टुकड़ा मुँह में पिघलता नहीं है और इसे आप सुबह से लेकर शाम तक मुँह में रख सकते है।

अदरक ही क्यों… 

जब किसी व्यक्ति को शराब या नशे की लत लगती हैं तो उसका शरीर सल्फर की मांग करता है। इस दौरान यदि हम शरीर में सल्फर की कमी पूरी कर दे तो फिर शरीर को ये नशे वाली लत नहीं लगेगी। ये प्रयोग आप 3 से 4 दिन करोगे तो ही आप नशा मुक्त हो जाओगे और यदि कोई व्यक्ति ज्यादा ही नशेड़ी है तो इसका प्रयोग एक सप्ताह तक करें।

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इंटरनेट डेस्क। हर कोई सर्दियों के दिनों में नहाने का नाम सुनकर ही पूरी बॉडी सिहर उठती है। इसके लिए हम सभी अक्सर गर्म पानी का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है, ठंडे पानी की बजाय गरम पानी से नहाने से आपकी सेहत को कितना नुकसान हो सकता है।
सर्दियों के दिनों में गरम पानी से नहाने के नुकसान…
त्वचा का फीकी होना 

आपको सावधान कर दें कि ठंड के दिनों में गर्म पानी से स्नान करने से चमकने वाली आपकी त्वचा डल हो जाती है। ऐसे ​में जितना हो सके नहाते वक्त गरम पानी के इस्तेमाल से बचें। अन्यथा चाहे कितना मेकअप क्यों ना कर लें, वो चमक दोबारा वापस नहीं आ सकती है।

रूखे-सूखे बाल 

गरम पानी से नहाने का सबसे ज्यादा असर बालों पर ही देखने को मिलता है। गरम पानी से आपके बाल रफ और ड्राय हो सकते हैं। बाल धोने के लिए हमेशा सामान्य टेंपरेचर वाले पानी का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से बाल सिल्की बने रहते हैं। गर्म पानी से नहाने से बालों में रूसी की समस्या आ जाती है, लिहाजा बाल झड़ने लगते हैं।

चेहरे पर झुर्रियां 

गरम पानी आपके चेहरे को नुकसान पहुंचा सकता है। गरम पानी से स्नान करने से स्किन के टिशूज डैमेज होने लगते हैं। लिहाजा त्वचा पर समय से पहले ही झुर्रियां आ जाती हैं। परिणाम यह होता है कि आप समय से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं। इसलिए जितना हो सके गरम पानी का कम से कम इस्तेमाल करें।

बदन में खुजली

ठंड में रूखी त्वचा को मॉइश्चर की सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है। हमसभी को पता है कि सफाई न करने से शरीर में खुजली की समस्या होती है। लेकिन जाड़े दिनों में गर्म पानी से नहाने के चलते पूरे बदन में खुजली की समस्या हो जाती है। गर्म पानी स्किन की नमी भी सोख लेता है।

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लाइफस्टाइल। शोध में कहा गया है कि ज्यादा पानी पीने से आपकी दिमागी क्षमता में वृद्धि हो सकती है। वहीँ बात करे तो आइंस्टाइन चाणक्य आदि कोई विशेष दिमाग लेकर नहीं आये थे, बस उनमें और साधारण मानव में इतना अंतर था कि वे अपने दिमाग को अन्य मनुष्यों से ज्यादा इस्तेमाल करना जानते थे। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ बताएंगे जो आपके दिमाग को और स्ट्रांग बनाएंगे, आईये जानते है कैसे.....
अजवाइन की पत्तियां 
अजवाइन की पत्तियां में एंटी ऑक्सीडेंट्स होता हैं, जो कि हमारे दिमाग को तेज करने में मदद करते हैं।इसलय इसके सेवन से आपको तेज दिमाग मिल सकता है।
काली मिर्च 
काली मिर्ची को भी खाने के पदार्थो में इस्तेमाल किया जाता है। काली मिर्ची में पेपरिन होता है , जो कि इंडोरफिन्स के लेवल को बढ़ाता है। इसके सेवन से आप तेज दिमाग पा सकते है और साथ ही तनाव की समस्या भी दूर होने लगती है।
दालचीनी
दालचीनी किसी ब्यूटी प्रोडक्ट से कम नही है। लेकिन तेज दिमाग के लिए आप दालचीनी के साथ शहद  मिलकर इसका सेवन करे ऐसे में आप तेज दिमाग पा सकते है।
जायफल
जायफल के सेवन से दिमाग तेज होने लगता है  इसका सेवन आप दूध  में मिलाकर करे  इसका रोजना सेवन करने से आप तेज दिमाग पा सकते है।

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