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शास्त्रों में वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के अनेक उपाय बताए गए हैं. स्त्री हो या पुरुष सभी को इन नियमों का पालन अच्छे से करना चाहिए तभी घर और परिवार में सुख,शान्ति और समृद्धि बनी रहती है. आइए आज हम आपको शास्त्रों के उन नियमों को बताने जा रहे हैं जिनके अनुसार स्त्री हो या पुरुष दोनों को ही कुछ बातें किसी को भी नहीं बतानी चाहिए-

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1. कामक्रिया:

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कामक्रिया पति-पत्नी के बीच होने वाली अतिगुप्त क्रिया होती है. पति-पत्नी की निजी बातें किसी तीसरे को पता चलना अक्सर शर्म और परेशानी का कारण बन सकता है इसलिए स्त्री हो या पुरुष, अपनी निजी बातों को कभी किसी दूसरे को ना बताएं.

2. दान:


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जो मनुष्य दूसरों की तारीफ़ पाने के लिए या लोगों के बीच अपनी महानता दिखाने के लिए दान करने का दिखावा करते हैं, उन्हें किये गए दान का फल कभी भी नहीं मिल पाता है.

3. मंत्र:


स्त्री हो
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भगवान की कृपा पाने के लिए आप जिन मन्त्रों का जाप करते हैं, वे किसी को भी नहीं बताना चाहिए. जो मनुष्य अपनी पूजा-पाठ और मन्त्रों को गुप्त रखता है, उसे इसका फल जरुर मिलता है.

4. धन:


स्त्री हो
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आपके धन की जानकारी जितने कम लोगों को हो, उतना ही अच्छा होता है. कई बार लोग हमसे सिर्फ धन सम्बंधित फायदा उठाने के लिए ही हमारे करीब आते हैं.

5. गृह दोष:

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गृह सम्बन्धी दोषों का जिक्र किसी से भी नहीं करना चाहिए. गृह शान्ति के लिए किये जा रहे उपायों का जिक्र किसी बाहरी व्यक्ति से करने पर उसका फल नहीं मिल पाता है.

6. मान-सम्मान:

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अपने मान-सम्मान का दिखावा करने से लोगों कि नजर में आपके प्रति नफरत का भाव आ सकता है. इसकी वजह से कभी-कभी आपके अपने या बहुत करीबी भी आपसे दुरी बना लेते हैं.

7. अपमान:


मनुष्य को अपने अपमान की बात हमेशा गुप्त ही रखनी चाहिए. यह बात दूसरों को पता चलने पर आप उनकी नजर में भी अपना सम्मान खो सकते हैं. इसके लिए कभी कभी आप हंसी के पात्र भी बन सकते हैं.

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Chanakya Niti for Success in Life


आज के समय में अधिकांश लोगों को धन संबंधी सुख पाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। फिर भी बहुत ही कम लोग अधिक श्रम के बाद भी पर्याप्त प्रतिफल प्राप्त कर पाते हैं। व्यक्ति को कुछ कामों में तो सफलता मिल जाती है, लेकिन कुछ कामों में असफलता का मुंह भी देखना पड़ता है। यदि आप सफलता का प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं तो यहां एक चाणक्य नीति बताई जा रही है। इस नीति का ध्यान रखेंगे तो आपको अधिकतर कार्यों में सफलता मिल सकती है। हम जब ज्यादा कामों में सफल होंगे तो धन संबंधी लाभ भी मिलेगा और इस प्रकार धन संचय होने लगेगा।


चाणक्य कहते हैं कि-

क: काल: कानि मित्राणि को देश: कौ व्ययागमौ।
कस्याऽडं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुंहु:।।

यह चाणक्य नीति के चतुर्थ अध्याय का 18वां श्लोक है। इस श्लोक में चाणक्य ने बताया है कि हमें कार्यों में सफलता पाने के लिए किन 6 बातों को हमेशा सोचते रहना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखकर काम करेंगे तो असफलता मिलने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।

पहली बात: यह समय कैसा है

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वही व्यक्ति समझदार और सफल है, जिसे इस प्रश्न का उत्तर हमेशा मालूम रहता है। समझदार व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है। अभी सुख के दिन हैं या दुख के। इसी के आधार पर वह कार्य करता हैं। यदि सुख के दिन हैं तो अच्छे कार्य करते रहना चाहिए और यदि दुख के दिन हैं तो अच्छे कामों के साथ धैर्य बनाए रखना चाहिए। दुख के दिनों में धैर्य खोने पर अनर्थ हो सकता है।

दूसरी बात: हमारे मित्र कौन-कौन हैं

हमें यह मालूम होना चाहिए कि हमारे सच्चे मित्र कौन-कौन हैं और मित्रों के वेश में शत्रु कौन-कौन हैं। शत्रुओं को तो हम जानते हैं और उनसे बचते हुए ही कार्य करते हैं, लेकिन मित्रों के वेश में छिपे शत्रु का पहचाना बहुत जरूरी है। यदि मित्रों में छिपे शत्रु को नहीं पहचान पाएंगे तो कार्यों में असफलता ही मिलेगी। ऐसे लोगों से भी बचना चाहिए। साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखें कि सच्चे मित्र कौन हैं, क्योंकि सच्चे मित्रों की मदद लेने पर ही सफलता मिल सकती है। यदि गलती से मित्र बने हुए शत्रु से मदद मांग ली तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है।

तीसरी बात: यह देश कैसा है

यह देश कैसा है यानी जहां हम काम करते हैं, वह स्थान, शहर और वहां के हालात कैसे हैं। कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इन बातों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे तो असफल होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी।

चौथी बात: हमारी आय और व्यय की सही जानकारी

समझदार इंसान वही है तो अपनी आय और व्यय की सही जानकारी रखता है। व्यक्ति को अपनी आय देखकर ही व्यय करना चाहिए। जो लोग आय से अधिक खर्च करते हैं, वे परेशानियों में अवश्य फंसते हैं। अत: धन संबंधी सुख पाने के लिए कभी आय से अधिक व्यय नहीं करना चाहिए। आय से कम खर्च करेंगे तो थोड़ा-थोड़ा ही सही पर धन संचय हो सकता है।

पांचवीं बात: मैं किसके अधीन हूं

हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारा प्रबंधक, कंपनी, संस्थान या बॉस हमसे क्या चाहता है। हम ठीक वैसे ही काम करें, जिससे संस्थान को लाभ मिलता है। यदि संस्थान को लाभ होगा तो कर्मचारी को भी लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

अंतिम बात: मुझमें कितनी शक्ति है

अंतिम बात सबसे जरूरी है, हमें यह मालूम होना चाहिए कि हम क्या-क्या कर सकते हैं। वही काम हाथ में लेना चाहिए, जिसे पूरा करने का सामर्थ्य हमारे पास है। यदि शक्ति से अधिक काम हम हाथ में ले लेंगे तो असफल होना तय है। ऐसी परिस्थिति में कार्य स्थल और समाज में हमारी छबि पर बुरा असर होगा।

कौन हैं चाणक्य

प्राचीन समय में आचार्य चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे। चाणक्य की राजनीति में गहरी पकड़ थी। इनके पिता का नाम आचार्य चणीक था, इसी वजह से इन्हें चणी पुत्र चाणक्य भी कहा जाता है। संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था। जब इन्होंने अपनी कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त कूटनीति से ही इन्होंने चंद्रगुप्त जैसे सामान्य बालक को अखंड भारत का सम्राट भी बनाया। आचार्य चाणक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ रचा गया है। इसमें दी गई नीतियों का पालन करने पर जीवन में सफलताएं प्राप्त होती हैं।

आचार्य चाणक्य ने कुछ बातें ऐसी बताई हैं जो किसी को भी बतानी नहीं चाहिए।

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चाणक्य नीति के महान पंडित आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में अपने जीवन के महान अनुभवों को साझा किया है. इसमें उन्होंने जीवन को सही तरीके से जीने के कई महत्वपूर्ण बातें शेयर की है. आचार्य चाणक्य को आज भारतीय इतिहास के महान विद्वानों में स्थान दिया जाता है.
आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में लिखा है की हमें कभी भी जीवन में चार बातें किसी को बतानी नहीं चाहिए. आइये पढ़े आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति से – कभी भी ये 4 बातें किसी को नही बतानी चाहिए !

अर्थनाशं मनस्तापं गृहिणीचरितानि च।
नीचवाक्यं चाऽपमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्।।

ज़िन्दगी में अपमान –

आचार्य चाणक्य कहते है की हमें अपने जीवन में हुए अपमान को कभी भी किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए. जीवन में कई बार हमारे साथ ऐसी घटनाएँ घट जाती है जब हमारा मजाक बन जाता है. अगर आपका कभी भी जीवन में अपमान हुआ है तो उसे हमेशा गुप्त ही रखे.
अगर आप उसे अन्य लोगो को बताओगे तो वह आपका मजाक ही बनायेंगे और आप पर हँसेंगे. बहुत कम लोग ऐसे होते है जो हमारी ज़िन्दगी में कद्र करते है, अधिकतर लोग तो एक – दूसरे से ईर्ष्या करते रहते है.
इसलिए अपने जीवन में हुई अपमानजनक घटनाओ को खुद के सिवा किसी और को नहीं बताना चाहिए. हमें अपने सुखद जीवन व अच्छाई को दूसरे तक पहुँचाना चहिये न की अपने बुरे समय के अपमान को. इसलिए अपने जीवन में याद रखे की कभी भी अपनी पोल खुद ही मत खोले और अपने अपमान को एक सपना समझ कर भूल जाए.

घर – परिवार की गुप्त बाते –

अधिकतर घरो में इसलिए फूट नहीं पड़ती की उन्होंने आपस में झगड़ा किया हो बल्कि हमेशा बाहर वाला ही घर में झगड़ा पैदा करता है. कहने का मतलब यह है की जब हम अपने घर की बातें बाहरी लोगो को बताने लग जाते है तो हमारे घर की छोटी से छोटी बात बाहर वालो को पता लगने लग जाती है.
वे हमारे घर के राज को जान जाते है. जिसका फायदा बाहरी लोग उठाते है और षड्यंत्र करके घर में क्लेश पैदा करते है. कभी भी घर की बात बाहरी लोगो से कहने से बचे. विशेषकर किसी व्यक्ति द्वारा अपने पत्नी के चरित्र की बातें कभी भी किसी इंसान से शेयर नहीं करनी चहिये क्योंकि पत्नी का सीधा सम्बन्ध पति के साथ होता है. और पत्नी के अपमान का मतलब है पति का अपमान.
इसलिए अगर पत्नी भले ही कैसी भी क्यों न हो. उसकी बातें समाज में करने से हमेशा बचे. इससे आप कई problems से दूर रहोगे.

मन का दुःख –

यह समस्या बहुत लोगो की होती है की वे अपनी छोटी – छोटी problems को भी हर किसी को बताने लग जाते है. क्या ऐसा करना सही होता है. अपने मन की दुःख, तकलीफे और दर्द दूसरे को बताकर हम अपना बहुत बड़ा नुकसान करते है.
दूसरे लोगो के पास इतना time नहीं होता की वह आपके दुःख – दर्द को समझे. अधिकतर लोगआपके सामने आपको सांत्वना तो देंगे पर आपके जाने के बाद आपका मजाक बनाने लग जायेंगे.
हर किसी के सामने अपने दुखो का बखान मत करते रहे. अपने मन के दुःख और तकलीफों को सिर्फ उन्ही लोगो को बताये जो आपके बहुत करीबी होते है और जिनपर आपको विश्वास होता है.
हर दोस्त या रिश्तेदार के साथ अपनी राम – कहानी शुरू न करे. यह आपका दुःख कम करने के बदले और अधिक बढ़ा देगा. ऐसे कभी भी दुःख कम नहीं होता बल्कि अपने दुःख को जानकर उसे दूर करने की सोचे. अपने problems का solution निकाले.

धन की हानि –

जीवन में कई बार ऐसा मौका आ जाता है जब हमें पैसो को तंगहाली हो जाती है. हम अपने धन – दौलत से हाथ धो बैठते है. पैसो की कमी के कारण हमारा moral एकदम घट जाता है और हम खुद को कंगाल महसूस करने लग जाते है. ऐसे में कभी भी अपने कंगाली हालत को दूसरे लोगो से बोलने से बचे.
अपने खोये हुए धन की अगर आप हर जगह चर्चा करोगे तो लोग आपका मजाक बनाने लग जायेंगे आपकी मदद करना तो दूर की बात है.
आजकल की दुनिया में ऐसे इंसान की कोई help नहीं करना चाहता जिसके पास धन – दौलत नहीं होती है. जब भी आपके साथ ऐसे हालात हो जाये तो खुद को मजबूत बनाये और ऐसे हालात से निकलने की सोचे. धन की हानि हो जाने से सबकुछ खत्म नहीं हो जाता. अपनी पॉवर और खुद पर भरोसा रखे.
यह दुनिया बदलती रहती है और दुःख – सुख लगा रहता है. इसलिए अपना सम्मान करे और दूसरे लोगो को अपनी इन बातो को बताने से बचे.


दोस्तों ! इस आर्टिकल में हमने आपके साथ चाणक्य नीति की चार बहुमूल्य बातें शेयर की. इन टिप्स को आप पढ़े और अपने जीवन में अपनाये. जीवन में गुप्त रखने वाली इन बातो को आप कभी भी किसी को न बताये. ऐसा करने पर आप ज़िन्दगी में हमेशा खुश रहोगे और आपके जीवन में खुशहाली आएगी.


हमें नितांत निजी बातों को सदैव छिपाकर ही रखना चाहिए. यदि ये बातें दूसरों को बता दी जाती हैं तो भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यहां जानिए 7 ऐसी बातें, जिन्हें गुप्त रखना चाहिए…
1. अपमान
यदि किसी वजह से हमें अपमान का सामना करना पड़ा हो तो इस बात को गुप्त रखना फायदेमंद होता है. यदि दूसरों को यह मालूम होगा की हमें अपमान का सामना करना पड़ा है तो लोग हमारा मजाक बना सकते हैं.
2. धनहानि
आज के समय में धन को किसी भी व्यक्ति की शक्ति का पैमाना माना जाता है. अधिकांश परिस्थितियों में धन के आधार पर ही रिश्ते निभाए जाते हैं और मित्रता की जाती है. अत: यदि हमें कभी भी धन हानि का सामना करना पड़े तो इस बात को गुप्त रखना चाहिए. धन हानि की बात दूसरों को बता दी जाएगी तो कई लोग हमसे दूरियां बढ़ा लेंगे. धन हानि से उबरने के लिए धन की आवश्यकता होती है, इस बात के जाहिर होने पर कोई धन की मदद भी नहीं करेगा. साथ ही, यदि हमारे पास बहुत सारा धन है तो इस बात को भी गुप्त रखना चाहिए.
3. घर-परिवार के झगड़े
अधिकांश परिवारों में वाद-विवाद होते रहते हैं, ये बहुत ही आम बात है, लेकिन आपसी झगड़े घर के बाहर किसी को भी नहीं बताने चाहिए. ऐसा करने पर समाज में परिवार की प्रतिष्ठा कम होती है. परिवार का अहित चाहने वाले लोग हमारे आपसी झगड़े से लाभ उठा सकते हैं.
4. मंत्र
गुरु द्वारा दिए गए मंत्र को गुप्त रखना चाहिए. गुरु मंत्र, तब ही सिद्ध होते हैं, जब इन्हें गुप्त रखा जाता है. मंत्रों को गुप्त रखने पर जल्दी ही शुभ फल प्राप्त होते हैं.
5. दान
गुप्त दान का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि जो लोग गुप्त रूप से दान करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य के साथ ही देवी-देवताओं की कृपा से सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं. दूसरों को बता-बताकर दान करने पर पुण्य प्राप्त नहीं हो पाता है.
6. पद-प्रतिष्ठा
यदि हम किसी बड़े पद पर हैं और समाज में हमें बहुत मान-सम्मान प्राप्त होता है तो इस बात को भी गुप्त रखना चाहिए. किसी अन्य व्यक्ति के सामने इस बात को जाहिर करेंगे तो इससे अहंकार का भाव पैदा होता है. अहंकार पतन का कारण बनता है और इससे हमारी प्रतिष्ठा कम हो सकती है..
7. रतिक्रिया
स्त्री-पुरुष को रतिक्रिया के समय एकांत का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस कर्म से जुड़ी बातें भी गुप्त रखनी चाहिए. यदि ये बातें दूसरों को मालूम हो जाती हैं तो यह हमारे चरित्र और सामाजिक जीवन के लिए अच्छा नहीं होता है.

घर-दुकान में घड़ी लगाते समय ध्यान रखें ये बातें वरना हो सकता है नुकसान

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वास्तु शास्त्र में हर चीज को लेकर खास नियम बताए गए है, जिनका पालन करने पर वहां रहने वालों को पॉजिटिवीटि और कई लाभ मिलते हैं। घर-दुकान में लगाई जाने वाली घड़ी भी जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि इससे जुड़ी वास्तु की कुछ आसान बातों का ध्यान न रखा जाए तो यह आपके अच्छे समय को भी बुरे समय भी बदल सकती है। 

जानिए, घड़ी से जुड़ी वास्तु की 6 खास बातें-

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भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है, क्योंकि तुरंत और तत्काल प्रसन्न होने वाले देवता हैं।


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भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है, क्योंकि तुरंत और तत्काल प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इसलिए उन्हें आशुतोष कहा जाता है। आइए जानते हैं भगवान शिव को प्रिय ऐसी चीजों को अर्पित करने से भोलेनाथ हर कामना पूरी करते हैं।

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दूध- सावन के महीने में दूध का सेवन निषेध है। दूध इस महीने में स्वास्थ्य के लिए गुणकारी होने के बजाए हानिकारक हो जाता है। इसलिए सावन मास में दूध का सेवन न करते हुए उसे शिव को अर्पित करने का विधान बनाया गया है। माना जाता शिवजी को दूध चढ़ाने से हर तरह की मानसिक परेशानी खत्म होती है।

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चावल- अक्षत न हो तो शिव पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। यहां तक कि पूजा में आवश्यक कोई सामग्री अनुप्लब्ध हो तो उसके एवज में भी चावल चढ़ाए जाते हैं। सावन शिवजी को चावल चढ़ाने से अपार धन आैर सौन्दर्य मिलता है।

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चंदन- चंदन का संबंध शीतलता से है। भगवान शिव मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड लगाते हैं। चंदन का प्रयोग अक्सर हवन में किया जाता है और इसकी खुशबू से वातावरण और खिल जाता है। यदि शिव जी को चंदन चढ़ाया जाए तो इससे समाज में मान सम्मान यश बढ़ता है।

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धतूरा -भगवान शिव को धतूरा भी अत्यंत प्रिय है। वैज्ञानिक दृष्टि से धतूरा सीमित मात्रा में लिया जाए तो औषधि का काम करता है और शरीर को अंदर से गर्म रखता है। धतूरा चढ़ाने से शिव हर मनोकामना पूरी करते हैं।

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भांग-शिव हमेशा ध्यानमग्न रहते हैं। भांग ध्यान केंद्रित करने में मददगार होती है। इससे वे हमेशा परमानंद में रहते हैं। भांग चढ़ाने से शिवजी चिंताएं व रोग दूर करते हैं।






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