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नई दिल्ली: पीएनबी धोखाधड़ी के बाद सबके मन में यह सवाल घूम रहा है कि कहीं बैंक में जमा उनकी रकम हमेशा के लिए डूब तो नहीं जाएगी। पिछले दिनों अफवाह उड़ी थी कि ऐसा नियम बनने जा रहा है जिससे बैंकों में जमा आम आदमी के रकम की गारंटी सरकार की नहीं होगी। जाहिर है, लोग काफी डर गए थे, लेकिन सरकार के खंडन के बाद लोग थोड़ा निश्चिंत हुए हैं। अब पीएनबी धोखाधड़ी के बाद लोगों को एक बार फिर डर सता रहा है कि धोखाधड़ी की वजह से अगर बैंक डूब जाए तो खून-पसीने के कमाए उसके पैसे की गारंटी कौन लेगा।

एक लाख तक की चिंता नहीं 

बैंकिंग मामलों के जानकार मनीष शाह कहते है,'बैंक में जमा 1 लाख रुपये तक की रकम इंश्योर्ड है। इसके अलावा जो पैसा है, वह किसी भी लॉ के तहत गारंटीड नहीं है। वैसे, आमतौर पर बैंकों में जमा लोगों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है क्योंकि कोई भी सरकार और रिजर्व बैंक किसी भी बैंक को फेल होने नहीं देती। आमतौर पर मजबूत बैंक भी कमजोर बैंक को सहारा दे देता है।' 

मार्केट के जानकार एस. पी. तुलसियान कहते हैं,'भले ही कोई बैंक कितना भी छोटा क्यों न हो, उसमें जमा आपके पैसे की सुरक्षा करने के लिए सरकार होती है। कोई भी सरकार किसी बैंक को फेल नहीं होने देती क्योंकि बैंक के फेल होने की राजनीतिक कीमत बहुत ज्यादा है।' 

नए बिल का फेर 

वर्तमान में डिपॉजिटर्स इंश्योरेंस स्कीम, जिसके अंतर्गत 1 लाख रुपये तक आपका पैसा बैंक में सुरक्षित है, उसके तहत सभी बैंक, कमर्शल, रीजनल, रूरल को-ऑपरेटिव बैंक आते हैं। प्रस्तावित एफआरडीआई बिल सुझाता है कि बेल-इन-प्रविजन में बहुत जरूरत होने पर बैंक अपनी लायबिलिटी का कैंसलेशन करता है तो इस हद में बैंक डिपॉजिटर्स का पैसा भी आ सकता है। लेकिन इस पर विवाद के कारण इसको अभी रिव्यू के लिए भेज दिया गया है

वर्तमान बिल की जगह अगर नया बिल आता है तो यह कितना सुरक्षित होगा? 

वर्तमान बिल की जगह अगर यह नया बिल आकर लेता है तो यह कितना सुरक्षित होगा? इसके जवाब में फिनसेक लॉ अडवाईजर्स के मैनेजिंग पार्टनर कहते हैं, 'वर्तमान इंश्योरेंस स्कीम नए बिल में समाहित होगी और 1 लाख रुपए का डिपॉजिट इंश्योरेंस डिपॉजिट जारी रहेगा। जहां तक बाकी डिपाजिट का सवाल है तो वह भी सुरक्षित माना जाना चाहिए क्योंकि किसी भी कमर्शल बैंक को पिछले 70 साल में बर्बाद नहीं होने दिया गया है। यही सॉवरिन गारंटी नए बिल की आत्मा में भी है। 

आखिर नए प्रपोज्ड बिल में ऐसा किया गया है जिसे लेकर इतनी चिंता है। सूत्रों के अनुसार जैसे ही कोई फाइनैंशल सर्विस कंपनी, जिसमें बैंक भी हैं, क्रिटिकल कैटिगरी में आएगी, उसका प्लान तैयार किया जाएगा। इसके तहत बैंक की लायबिलिटी को कैंसल करने जैसे स्टेप्स भी शामिल हैं। इस बेल-इन-क्लॉज में डिपॉजिटर्स का पैसा भी जद में आ सकता है। वैसे कस्टमर्स का पैसा 5वें नंबर की लायबलिटी है और ऐसा होना संभव नहीं लेकिन लोगों की चिंता को देखकर इसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। 

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महाशिवरात्रि को त्योहार इस साल 13 फरवरी को मनाया जाएगा। भोले बाबा के भक्त अभी से शिवरात्रि के लिए तैयारियां शुरू कर चुके हैं.


हर साल की तरह इस बार भी भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। महाशिवरात्रि को हिन्दुओं का सबसे शुभ त्योहार माना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त भगवान शिव की पूजा कर फल और फूल अर्पित करते हैं।
महाशिवरात्रि को 'शिव की महान रात' के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाई जाएगी। गुजरात का सोमनाथ और उज्जैन का महाकलेश्वर मंदिर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर हैं, जहां हर साल शिवरात्रि के शुभ मौके पर लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा कई भक्त गंगा स्नान के लिए वाराणसी जाते हैं।
महाशिवरात्रि के पर्व का उत्सव एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है। महाशिवरात्रि की पूरी रात पूजा और कीर्तन किया जाता है। इतना ही नहीं कई पुराण के अंदर शिवरात्रि का उल्लेख मिलेगा, विशेषकर स्कंद पुराण, लिंग पुराण और पद्म पुराणों में महाशिवरात्रि का उल्लेख किया गया है। शैव धर्म परंपरा की एक पौराणिक कथा अनुसार, यह वह रात है जब भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश के स्वर्गीय नृत्य का सृजन किया था। हालांकि कुछ ग्रंथों में यह दावा किया गया है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था।
महाशिवरात्रि के दिन करें ये काम : महाशिवरात्रि के दिन महादेव के अभिषेक का खासा महत्व है। अगर आप ये एक काम ठीक तरह से कर लेते हैं तो आपको भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होगी। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद अपने मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक करना होगा। महाशिवरात्रि के दिन अभिषेक को काफी अहम माना जाता है। इस दिन शिव भक्त ओम नम: शिवाय मंत्र के उच्चारण के साथ शिवलिंग का दूध, शहद, दही और चंदन से अभिषेक करे तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा बेर, बेलपत्र और फूल आदि भी भगवान को अर्पित करने चाहिए।

व्रत का भी है महत्व: महाशिवरात्रि के दिन व्रत का भी खास महत्व है। इस दिन भक्त अगर विधि-विधान के साथ महाशिवरात्रि का उपवास करे तो महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि पर कुछ शिव भक्त उपवास के दौरान एक बूंद पानी भी नहीं पीते। ज्यादातर भक्त व्रत के दौरान फल के साथ दूध और पानी का सेवन करते हैं। शास्त्रों का कहना है अगर कोई भक्त पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ इस व्रत को करता है तो भगवान शिव उसे सभी प्रकार के पापों से मुक्त कर समृद्धि और आशीर्वाद देते हैं। शिवरात्रि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं खाया जाता। अमावस्या की सुबह अगले दिन पूजा के बाद भोजन किया जाता है। दूसरी तरफ जो लोग किसी कारणवश या बीमारी के चलते इस व्रत को नहीं रख पाते वह इस परंपरा को बनाएं रखने के लिए फल, दूध से बनें पदार्थो का सेवन कर सकते हैं।



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अनीता की शादी 18 साल की उम्र में हुई थी. सुहागरात के दिन उसके साथ जो रेप होने का का सिलसिला शुरू हुआ, वो कई महीनों तक चला. अनीता का पति IAS अफ़सर था. अकसर वो रात में पी कर घर लौटता और उसके साथ दरिंदों की तरह पेश आता. एक समय ऐसा था, जब वो सोचने लगी कि क्या शादीशुदा ज़िन्दगी ऐसी ही होती है. उसके पति के लिए उसकी इच्छा और सहमती कोई मायने नहीं रखती थी.
रात दर रात उसकी यातनाएं बढ़ती चली गयीं. एक बार तबियत ख़राब होने की वजह से जब अनीता ने अपने पति के साथ सोने से मना किया, तो उसने ज़बरदस्ती उसके गुप्तांग में कैंडल डाल दी. वो उसे जबरन पॉर्न दिखाता और उसके बाद उससे वो सब करने को कहता, जो पॉर्नस्टार्स पॉर्न में करते. एक रात जब वो बुखार में तप रही थी, उसने उसे अपने पास आने से रोकने के लिए धक्का दे दिया. इस पर उसने अनीता के बेहोश हो जाने तक गोल्फ़ स्टिक से उसे बेरहमी से पीटा.
ये मेरिटल रेप की शिकार हुई एक औरत की आपबीती है.
मेरिटल रेप, यानि शादी के बाद पति द्वारा पत्नी के साथ ज़बरदस्ती सम्बन्ध बनाना. ये कहानी सुन कर आप इसका अंदाज़ा तो लगा सकते हैं कि इस औरत पर क्या गुज़री होगी. लेकिन इससे ज़्यादा बुरा है भारत में ऐसी घटनाओं को अपराध की श्रेणी में न रखा जाना. हमारे देश में Marital Rape एक क्राइम नहीं है, न ही इसके लिए कोई सज़ा तय की गयी है.

शादी के बंदन में बंधी बनी औरतें

रेप एक जघन्य अपराध है, ये हम सब जानते हैं. वो रेप का ही अपराध था, जिससे आक्रोशित होकर सारा देश 2012 में सड़कों पर उतर आया था. लेकिन यही रेप जब शादी के बाद होता है, तो अपराध नहीं कहलाता. इससे यही समझ आता है कि एक तरह से शादी पति के लिए रेप करने का लाइसेंस बन जाती है. Consent, सहमती, ये सभी शब्द शादी के बाद एक औरत के लिए अपने मायने खो देते हैं. ये चौंकाने वाली बात है कि ऐसे अपराध को सामान्य ठहराने के लिए भी किसी के पास कोई तर्क हो सकता है.
Source: Lawnn

औरत मात्र उपभोग की वस्तु?

अमेरिका में शादी के बाद बलात्कार को 1993 से अपराध माना जाने लगा था. पोलैंड, रूस और नॉर्वे जैसे कुछ देशों में पचास साल पहले ही इसके खिलाफ़ क़ानून बन गए थे, लेकिन भारत में आज भी इसके खिलाफ़ कोई क़ानून नहीं है. ये सोचने वाली बात है कि क्या देवी का रूप मानी जाने वाली नारी, शादी के बाद मात्र एक उपभोग की वस्तु रह जाती है?
Source: Bridebox

अनजान व्यक्ति द्वारा बलात्कार से भी बुरा है ये

अगर कोई कहे कि पति द्वारा किया जाने वाला रेप भी उतना ही अमानवीय है, जितना कि किसी अनजान द्वारा किया गया रेप, तो मैं इससे सहमत नहीं हूं. जब रेप एक अनजान व्यक्ति द्वारा किया जाता है, तो आपका उससे कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता, वो इंसान शायद आपको दोबारा कभी दिखाई भी न दे, आप उसके खिलाफ़ रिपोर्ट कर सकती हैं, क़ानून के तहत वो दोषी होता है, उसे सज़ा मिलती है और आपके दर्द को भी लोगों की सहानुभूति मिलती है.
ज़रा एक बार पति द्वारा किये जाने वाले रेप के बारे में सोचिये. जो शादी के वक़्त आपका रक्षक बनने का वचन देता है, वो ही भक्षक बन जाता है, आपको उससे भावनात्मक जुड़ाव होता है, अपेक्षाएं होती हैं. ज़ाहिर है ऐसी दरिंदगी सहने के बाद आपको उससे नफ़रत हो जाएगी, लेकिन फिर भी आपको रोज़ उसका चेहरा देखना होगा, आप उसके साथ एक घर में रहने को मजबूर होंगी, आप इसके खिलाफ़ शिकायत ही नहीं कर सकतीं, तो इंसाफ़ मिलने का सवाल ही नहीं उठता, शायद आपके परिवारवाले भी कह दें कि शादी की है, निभाओ किसी भी तरह. जो हर रात बार-बार आपकी आत्मा को रौंद रहा है, उसके साथ एक बंधन में बंधा होना कई अधिक बुरा है, लेकिन फिर भी हमारा क़ानून इसे अपराध नहीं मानता.
Source: Sulekha

दिए जाते हैं बेहूदा तर्क:

मेरिटल रेप को अपराध न मानने के लिए जो तर्क दिए जाते हैं, वो औरत की सहमति को महत्वहीन मानने की मानसिकता को दर्शाते हैं. क़ानून का दुरुपयोग न हो, इसलिए इसके लिए क़ानून नहीं बनाया गया. क्या वाकयी? वैसे दुरूपयोग किस क़ानून का नहीं होता? क्या दुरूपयोग को रोकने का यही तरीका है कि क़ानून ही न बनाये जायें? भारत में एक पीड़िता को ही ये साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है कि उसका बलात्कार हुआ है. आरोपी को भी खुद को निर्दोष साबित करने के पर्याप्त मौके दिए जाते हैं, ऐसे में क्यों इसी एक क़ानून के दुरुपयोग का भय इतना ज़्यादा है?
महिलाओं को समाज में समान अधिकार प्राप्त नहीं है, इसके लिए तमाम आन्दोलन भी होते रहते हैं. लेकिन हर जीव का अपने शरीर पर पूरा अधिकार होता है, अगर शादी के बाद औरत से ये अधिकार भी छिन जाता है, तो ये कहना गलत नहीं होगा कि औरतों को जानवरों से बद्तर ज़िन्दगी मिली है.
एक रेपिस्ट, रेपिस्ट ही होता है. शादी के रूप में उसे सुरक्षाकवच दे दिया जाना, इस अपराध के प्रति संवेदनहीनता का प्रतीक है. अगर भारतीय क़ानून के अनुसार, क्रूरता को तलाक़ का आधार बनाया जा सकता है, तो क्या रेप क्रूरता नहीं है? अगर है, तो ये तलाक का आधार क्यों नहीं बन सकता? ये कुछ सवाल हैं, जिनके बारे में हर एक नागरिक को सोचने की ज़रूरत है, ताकि सिस्टम को भी इनके बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़े और वो क़ानून बनाया जा सके, जिसे बहुत पहले ही बना दिया जाना चाहिए था. अगर शादी के बाद बेटियों का रेप क़ानून की नज़र में गलत नहीं है, तो 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' जैसे आन्दोलन अर्थहीन हो जाते हैं. 

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ज्योतिष डेस्क। तिल चौथ माता का व्रत माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है। इस व्रत को माही चौथ और संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रीगणेश की आराधना करना सुख-सौभाग्य की दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है। उत्तर भारत समेत मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ रखा जाता है। इस संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ के पर्व पर महिलाएं अपने परिवार की सुख और समृद्धि के लिए निर्जल व्रत रखेंगी और गणेश जी की पूजा करेंगी। जिससे उनके परिवार पर कभी भी किसी भी तरह से कोई परेशानी नहीं आए।
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संकट चौथ का शुभ मुहूर्त
तिल चौथ संकट चौथ पर चंद्रोदय का वक्त रात्रि 8.20 मिनट पर शुभ मुहूर्त हैं इसमें चन्द्रमा को जल अर्पित किया जाता हैं उसके बाद ही व्रत खोलकर खाना खाया जाता हैं। सबसे पहले भगवान् गणेश की मूर्ति को पंचामृत से स्नान करने के बाद फल, लाल फूल, अक्षत, रोली, मौली अर्पित करें और फिर तिल से बनी वस्तुओं अथवा तिल-गुड से बने लड्डुओं का भोग लगाकर भगवान गणेश की स्तुति की जाती है। सकट चौथ पर 108 बार गणेश मंत्र – ओम गणेशाय नम: का जप करें, अपने हर दु:ख को भगवान गणेश से कहे। इससे आप पर आने वाली हर समस्या का समाधान होगा और जो भी परेशानियां चली आ रही हैं उससे भी मुक्ति मिलेंगी।

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संकट चौथ पर पूजा करने की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करते वक्त अपना मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखें। भगवान गणेश की पीठ का दर्शन नहीं करें। भगवान गणेश की पूजा में मोदक का भोग तो लगता ही है परन्तु इस दिन भगवान गणेश की पूजा में तिल के लड्डू भी चढाने चाहिए। मोदक के अलावा दुर्वा, पुष्प, रोली, फल सहित पंचामृत को भी पूजन में शामिल करें। संकट चौथ को भगवान गणपति की आरती जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए।

संकट चौथ पौराणिक कहानी
माघ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी गणेश चतुर्थी, तिलकूट चतुर्थी, संकटा चौथ, तिलकुट चौथ व्रत को लेकर एक कथा भी प्रचलित है। सतयुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार कुम्हार ने बर्तन बना कर आंवा लगाया, पर आंवा पका ही नहीं बर्तन कच्चे रह गए। इससे कुम्हार बहुत परेशान हो गया और बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक के पास जाकर पूछा तो उसने कहा कि इस संकट से बचने के लिए किसी एक बच्चे की बलि देना पड़ेगा।
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बलि के बाद तुम्हारे सभी संकट दूर हो जाएगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र को पकड़ कर संकट चौथ के दिन आंवा में डाल दिया। परन्तु सौभाग्यवश बालक की माता ने उस दिन गणेशजी की पूजा की थी। बहुत खोजने के बाद भी जब पुत्र नहीं मिला तो गणेशजी से प्रार्थना की। सुबह कुम्हार ने देखा कि आंवा तो पक गया, परन्तु बच्चा जीवित और सुरक्षित था। डर कर उसने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार कर लिया। राजा ने माता से इस चमत्कार का रहस्य पूछा तो उसने गणेश पूजा के बारे में बताया। तब से प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकटहारिणी माना जाता है और इस दिन गणेश जी की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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दक्षिण अफ्रीका के जाने माने शहर केपटाउन में पानी की किल्लत इतनी बढ़ चुकी है कि आने वाले 29 अप्रैल से घरों में पानी की सप्लाई बंद कर दी जाएगी और पानी को राशन की तरह 200 सेंटरों पर बेचा जाएगा.

पानी संकट में केपटाउन: 29 अप्रैल से सप्लाई बंद, 200 सेंटर पर राशन की तरह मिलेगा पानी (फोटो- साभार न्यूयॉर्क टाइम्स)
पानी संकट में केपटाउन: 29 अप्रैल से सप्लाई बंद, 200 सेंटर पर राशन की तरह मिलेगा पानी (फोटो- साभार न्यूयॉर्क टाइम्स)











नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका का सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन केपटाउन दुनिया का पहला बड़ा शहर बनने जा रहा है जहां पानी संकट के कारण अगले साल अप्रैल में बड़ा बखेड़ा खड़ा हो सकता है. केपटाउन शहर के पास अभी डैम में 33 परसेंट पानी है लेकिन बारिश न हुई तो स्टॉक और मौजूदा खपत को देखते हुए अनुमान है कि 29 अप्रैल, 2018 को डैम का लेवल ‘डे जीरो’ तक गिर जाएगा. केपटाउन नगर प्रशासन ने डैम में पानी के लेवल का 13.5 परसेंट तक गिर जाने को डे जीरो लेवल मान रखा है. डैम का लेवल डे जीरो होने के बाद लोगों के घर पाइपलाइन से पानी जाना बंद हो जाएगा और फिर शहर में 200 सेंटर पर लोगों को लाइन में लगकर पानी लेना होगा जैसे हमारे यहां राशन की दुकान में लोग किरोसिन और दूसरे सामान लेते हैं. सरकार ने उस हालात के लिए सेना और पुलिस को तैयार रहने कहा है. हालात ऐसे हैं कि केपटाउन पहुंच रहे टूरिस्टों का स्वागत एयरपोर्ट से लेकर होटल तक ऐसे पोस्टर कर रहे हैं जिसमें लिखा है कि पानी का एक भी बूंद बर्बाद ना करें.
अंग्रेजी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केपटाउन दुनिया का पहला ऐसा बड़ा शहर होगा जहां पानी के लिए इमरजेंसी जैसे हालात होंगे. उस हालात में लोगों के घरों में पानी की सप्लाई बंद करके उन्हें 200 सेंटर से पानी लेने के लिए लाइन में लगने कहा जाएगा और वहां उन्हें उतना ही पानी मिलेगा जितना उनके लिए शहर का प्रशासन जरूरी समझता है. उस भयावह हालात की तैयारी में पहले से सतर्क केपटाउन प्रशासन ने पानी सप्लाई में कटौती शुरू कर दी है ताकि पानी कटौती करने के लिए भी अप्रैल में पानी बचा रह सके. इस समय प्रति व्यक्ति प्रति दिन 87 लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है. लोगों से कहा गया है कि दो मिनट से ज्यादा शॉवर में ना नहाएं, टॉयलेट को बार-बार फ्लश ना करें और ब्रश या शेव करते समय नल चालू ना रखें. लोगों से कहा गया है कि स्विमिंग पुल में पानी ना डालें और बागीचा में रिसाइकल पानी डालें और हाथ धोने के लिए साबुन और पानी के बदले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
गौरतलब है कि इतने लोकप्रिय स्थान पर इस तरह की परेशानी से टूरिस्टों से आने वाली आय में बड़ी कमी आ सकती है. बता दें कि देश में कई जगह पानी की भारी परेशानी को देखते हु भारत सरकार भी हमेशा से पानी की बूंद- बूंद बचाने को लेकर कई अभियान चलाती रही है. देश की राजधानी दिल्ली में भी लगातार पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है.

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नई दि‍ल्‍ली। आने वाली छुट्टि‍यों को देखते हुए तमाम हवाई कंपनि‍यां एक से बढ़कर एक छूट ऑफर कर रही हैं, मगर एक कंपनी ऐसी भी है जि‍सने छूट देने के मामले में सबको पीछ़े छोड़ दि‍या है। स्‍पाइस जेट ने फ्लाई फॉर फ्री ऑफर (SpiceJet Fly For Free Offer) लॉन्‍च कि‍या है। इसके तहत आप फ्री में हवाई टि‍कट हासि‍ल कर सकते हैं। यात्री स्‍पाइस्‍टाइल पर पूरी टि‍कट के पैसे रि‍डीम कर सकता है। स्‍पाइस स्‍टाइल कंपनी का ई कॉमर्स पोर्टल है। यह ऑफर 31 दि‍संबर 2017 तक ही वैलि‍ड है। इसके तहत आप 31 मार्च 2018 तक का टि‍कट ले सकते हैं।

कैसे मि‍लेगा ऑफर
1 इस ऑफर का लाभ लेने के लि‍ए यात्री को सबसे पहले स्‍पाइट जेट की ऑफीशि‍यल वेबसाइट से टि‍कट बुक करनी होगी।
2 बुकिंग करने के बाद आपके पास बुकिंग की कनफर्मेशन से जुड़ा ई मेल आएगा, जि‍समें पीएनआर डि‍टेल और वाउचर कोड होगा। यह वाउचर उतने का होगा, जि‍तने की टि‍कट आपने खरीदी है।
3 इसके बाद आपको spicestyle.com पर जाकर इस वाउचर को रि‍डीम करना होगा। 

ऑफर के नि‍यम व शर्तें -

1 यह वाउचर केवल उन लोगों को मि‍लेगा जो स्‍पाइट जेट की ऑफीशि‍यल वेबइसाइट से डायरेक्‍ट टि‍कट बुक करेंगे।
2 कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबि‍कि‍, एक पीएनआर पर केवल एक वाउचर जारी कि‍या जाएगा।
3 वाउचर टि‍कट की वैल्‍यू के बराबर होगा।
4 स्‍पाइस स्‍टाइल डॉट कॉम पर मौजूद सभी प्रोडक्‍ट पर ये वाउचर लागू होगा।
5 यह वाउचर केवल 31 मार्च 2018 तक वैलि‍ड रहेगा।
6 एक ट्रांजेक्‍शन में शॉपिंग कार्ट वैल्‍यू का केवल 30 फीसदी वाउचर के माध्‍यम से भुनाया जा सकता है।
7 इस वाउचर का इस्‍तेमाल कि‍सी अन्‍य ऑफर के साथ नहीं कि‍या जा सकता, हां अगर कंपनी की ओर से इसकी छूट दी गई है तो ऐसा हो सकता है।

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लाईफस्टाइल: हमारी स्किन की खूबसूरती ही किसी को हमारे प्रति पहली नज़र में आकर्षित करती है। मंहगे ब्यूटी प्रॉडक्ट इस्तेमाल करने की बजाए इसके लिए घरेलू तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। त्वचा पर अलग-अलग तरह के निशान या चकते उभरते देख सकते हैं। चहरे पर जिससे निशान हो जाते है। ऐसे ही चेहरे पर धूल के कारण कई प्रॉब्लम हो जाती है। आईये इन प्रॉब्लम का सोलुशन जानते है…
गौरतलब है की भारतीय खाने में लौंग ने ना केवल अपने लिए एक ख़ास जगह बनाई है, इसके अलावा भी यह धार्मिक पूजा एवं अनुष्ठान में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आपके खाने में इसकी सुगन्धित महक जायका लाती है, तो इसके पौष्टिक गुण आपकी सेहत में सुधार लाते है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। यह गुण एक क्लिजर का काम करते है, पोर्स में जमा गंदगी और बैक्टीरिया इससे साफ हो जाती है जिससे चेहरे पर निखार भी आता है व मुंहासे नहीं होते।
इस तरह करे पैक का इस्तेमाल
सेब का पेस्ट करके, ग्रीन टी की पत्तियां से भी आप पैक का उपयोग कर सकते है। लौंग का तेल व शहद से भी हम पैक का उपयोग कर सकते है।
फेस पैक की विधि
ग्रीन टी की पत्तियां एक कप पानी में उबाल लें और जरूरतानुसार ठंड़ा होने पर सेब के पेस्ट डालें। इस पैक में इसके बाद लौंग तेल की 3 बूंदे और शहद मिक्स करके पैक तैयार करें। चेहरे और गर्दन पर 10-15 मिनट के लिए इसे अप्लाई करें। सूख जाने पर हल्के हाथों से रगड़कर हटा दें और गुनगुने पानी से साफ करें।

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क्या आपने सुना.. एक ऐसा पेड़ भी है जिस पर उगती है औरतें...जी हां !

प्रकृति से हमें कई चीजें प्राप्त हुई है प्रकृति से ही हमारा जीवन जुड़ा हुआ है प्रकृति ने हमें उपहार स्वरुप कई उपहार दिए हैं उन्हीं में से एक उपहार है पेड़ पेड़ों के बिना मनुष्य का जीवन असंभव है क्योंकि पेड़ों से ही हमें मनुष्य की प्राण दायक वायु ऑक्सीजन मिलती है और मनुष्य जो कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ते हैं उन्हें पेड़ ग्रहण करते हैं और पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं जिसके फलस्वरुप पेड़ हमारे लिए काफी अहम होते हैं यदि पेड़ नहीं हो तो ऑक्सीजन भी नहीं होगी और ऑक्सीजन नहीं होगी तो मनुष्य जीवित नहीं रह सकता
पेड़ों का मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है लेकिन आज के समय में पेड़ों की अंधाधुन हो रही कटाई को देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य में मनुष्य को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि पेड़ कम होंगे और मनुष्य बढ़ेंगे तो कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाएगी और ऑक्सीजन ना होने के कारण मनुष्य का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है वैसे तो पेड़ों पर फल फूल पत्ती यह सब होते हैं यह तो नॉर्मल ही बातें लेकिन क्या आपने सुना है कि पेड़ पर औरत  उगती है जी हां हम सही कह रहे हैं पेड़ पर फल नहीं औरतें उगती है.
अभी तक तो आपने सुना होगा कि पेड़ पर फल फूल आते हैं लेकिन एक पेड़ ऐसा भी है जहां पर फल-फूल नहीं बल्कि औरत का निर्माण होता है इस पेड़ पर फलों का निर्माण नहीं बल्कि औरत का निर्माण होता है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह पेड़ थाईलैंड में है जहां पर फल-फूल नहीं बल्कि औरत उगती है सोशल मीडिया पर इस पेड़ की तस्वीरें अत्यधिक वायरल हो रही है और यहां पर सब की चर्चा का विषय भी बना हुआ है हर कहीं सिर्फ इसी पेड़ की चर्चा हो रही है थाईलैंड में इस पेड़ का रहस्य अभी तक सुलझा नहीं यह एक गुत्थी बन कर सभी को परेशान कर रहा है कि आखिर ऐसा क्या है इस पेड़ में कि फल की जगह एक औरत उस पेड़ की डालियों पर उगती है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस पेड़ पर एक लड़की के आकार का फल उगता है इस पेड़ को लेकर कई व्यक्ति अलग-अलग कहानी भी बताते हैं और उनमें से एक कहानी बहुत मान्यताओं पर आधारित है इस पेड़ को बहुत-बहुत मान्यताओं से जोड़कर कई कहानियां बताई जाती है थाईलैंड में इस पेड़ को नैरीफन के नाम से जानते हैं जहां पर नारी के आकार का एक पल पेड़ पर उगता है जो सभी के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.
मान्यताओं की माने तो इस पेड़ को बोद्ध धर्म में से जोड़ा गया है और कहा जाता है कि इस पेड़ को खुद भगवान ने हिमाचल के जंगलों में लगाया था इसलिए इस पेड़ पर फल नहीं बल्कि लड़की के आकार का फल उगता है इस पेड़ पर उगने वाले फल का आकार हूबहू लड़की के शरीर का आकार होता है हालांकि अभी तक कोई भी इस बात को सिद्ध नहीं कर पाया है कि लड़की के आकार का यह फल है या फिर कुछ और है यह रहस्य अभी भी रहा जिस तरह से आज तक कोई भी पड़ता उठा नहीं पाया.


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इन दिनों सोशल मीडिया के एक ख़ास वर्ग में ईरानी शायर सबीर हका की काफ़ी चर्चा हो रही है. ईरानी कवि सबीर के बारे में कहा जाता है कि लेखन से वो इतने पैसे नहीं कमा पाते कि पेट भर सकें इसलिए वो मज़दूरी भी करते हैं. सबीर के लेखन को ईरान की श्रमिक कविता स्‍पर्धा में प्रथम पुरस्‍कार भी दिया जा चुका है, पर यदि पुरस्कारों से ही पेट भरता, तो सबीर को ईंट-रोड़ा नहीं ढोना पड़ता.

एक इंटरव्यू में सबीर अपने शब्दों को कविताओं में पिरोते हुए कहते हैं कि

''मैं थका हुआ हूं. बेहद थका हुआ.
मैं पैदा होने से पहले से ही थका हुआ हूं.
मेरी 'मां' मुझे अपने गर्भ में पालते हुए मज़दूरी करती थी,
मैं तब से ही एक मज़दूर हूं.
मैं अपनी 'मां' की थकान महसूस कर सकता हूं.
उसकी थकान अब भी मेरे जिस्‍म में है.''
सबीर ने ज़्यादा नहीं लिखा, पर जितना भी लिखा वो ऐसा था कि आंतरिक मन पर प्रहार करने के साथ ही सोचने को मजबूर कर देने वाला है. इस बारे में साबिर कहते हैं कि 'उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वो सोने का कोई स्थाई ठिकाना बना सके. उनकी कई रातें सड़क पर भटकते हुए गुज़रती हैं. इस वजह से उन्‍हें इतना वक़्त नहीं मिलता कि वो अपना कोई उपन्‍यास पूरा कर सकें.'
आज जब एक बार फिर सबीर के बारे में सोशल मीडिया में चर्चा होने लगी है, तो हम भी उनकी कुछ कविताओं का संकलन आपके लिए ले कर आये हैं. ये कवितायें मूल रूप से पारसी में छपी हैं, पर गीत चतुर्वेदी के अनुवाद के कारण ये हिंदी में भी उपलब्ध हैं. गीत चतुर्वेदी ख़ुद भी एक जाने-माने हिन्दू लेखक हैं और मौजूदा साहित्य जगत में अपने लेखन द्वारा दख़लन्दाज़ी करते रहते हैं. इन कविताओं का अनुवाद करते वक़्त गीत ने इस बात का ख़ास ख़्याल रखा है कि कविताओं के मूल भाव को बचाया जा सके.

दोस्‍ती

मैं 'ईश्‍वर' का दोस्‍त नहीं हूं
इसका सिर्फ़ एक ही कारण है
जिसकी जड़ें बहुत पुराने अतीत में हैं
जब छह लोगों का हमारा परिवार
एक तंग कमरे में रहता था
और (ईश्‍वर) के पास बहुत बड़ा मकान था
जिसमें वह अकेले ही रहता था

बंदूक़

अगर उन्‍होंने बंदूक़ का आविष्‍कार न किया होता,
तो कितने लोग, दूर से ही,
मारे जाने से बच जाते.
कई सारी चीज़ें आसान हो जातीं.
उन्‍हें मज़दूरों की ताक़त का अहसास दिलाना भी
कहीं ज़्यादा आसान होता.

घर

मैं पूरी दुनिया के लिए कह सकता हूं यह शब्‍द
दुनिया के हर देश के लिए कह सकता हूं
मैं आसमान को भी कह सकता हूं
इस ब्रह्मांड की हरेक चीज़ को भी.
लेकिन तेहरान के इस बिना खिड़की वाले किराए के कमरे को
नहीं कह सकता,
मैं इसे घर नहीं कह सकता.

आस्‍था

मेरे पिता मज़दूर थे
आस्‍था से भरे हुए इंसान
जब भी वह नमाज़ पढ़ते थे
(अल्‍लाह) उनके हाथों को देख शर्मिंदा हो जाता था.

ईश्‍वर

ईश्‍वर भी एक मज़दूर है
ज़रूर वह वेल्‍डरों का भी वेल्‍डर होगा.
शाम की रोशनी में
उसकी आंखें अंगारों जैसी लाल होती हैं,
रात उसकी क़मीज़ पर
छेद ही छेद होते हैं.

शहतूत

क्‍या आपने कभी शहतूत देखा है,
जहां गिरता है, उतनी ज़मीन पर
उसके लाल रस का धब्‍बा पड़ जाता है.
गिरने से ज़्यादा पीड़ादायी कुछ नहीं.
मैंने कितने मज़दूरों को देखा है
इमारतों से गिरते हुए,
गिरकर शहतूत बन जाते हुए.

सरहदें

जैसे कफ़न ढंक देता है लाश को
बर्फ़ भी बहुत सारी चीज़ों को ढंक लेती है.
ढंक लेती है इमारतों के कंकाल को
पेड़ों को, क़ब्रों को सफ़ेद बना देती है
और सिर्फ़ बर्फ़ ही है जो
सरहदों को भी सफ़ेद कर सकती है.
हालांकि हम ये नहीं जानते कि सबीर की कविताओं के साथ फैलाई जा रही कहानियां सच हैं या झूठ? पर उनकी कवितायें वाकई में उस संसार की तरफ़ सोचने को विवश कर रही हैं, जिसे लोग देखकर भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं. इसके लिए गीत चतुर्वेदी भी उतने ही बधाई के पात्र हैं, जितने कि साबिर, जो उन्होंने इतनी ख़ूबसूरत कविताओं को अनुवाद कर हिंदीभाषी लोगों को भी पढ़ने और समझने का मौका दिया.


Poem Translated By: GeetChaturvedi




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