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चाणक्य नीति : इन 4 बातों को हमेशा रखें गुप्त, नहीं तो झेलनी पड़ेगी भारी मुसीबत

हमारी जिंदगी में कई ऐसी निजी बातें होती है जो हमेशा हमें दूसरो से गुप्त रखनी चाहिए। अगर हम इन बातों को किसी के सामने सार्वजनिक करते हैं तो हम खुद अपने लिए भविष्य में परेशानियां पैदा करने के लिए रास्ता बना देते हैं। आज हम आपको ऐसी 4 बातें बताने जा रहे हैं जो आपको किसी भी सूरत में किसी के भी साथ साझा नहीं करनी चाहिए। तो चलिए जानते हैं वो बातें –
अपना अपमान :- अगर हमें जिंदगी में कभी भी घोर अपमान का सामना करना पड़े तो हमें यह बात हमेशा दूसरों से गुप्त रखनी चाहिए। अगर हम अपने घोर अपमान वाली बात दूसरों से साझा करेंगे तो हमें देर-सवेर इससे और ज्यादा अपमान झेलना ही पड़ेगा। इसलिए सदैव अपने अपमान की बात किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अगर आप ऐसी कोई भी बात किसी के साथ साझा करते हो तो आप भविष्य के लिए अपने लिए और अपमान की स्थिति पैदा कर रहे हो और लोग आपके ही कारण आपका मजाक बना सकते हैं।

धन की हानि :ज़माना बदलने के साथ ही आजकल व्यक्ति की शक्ति का पैमाना शारीरिक शक्ति को नहीं बल्कि पैसे को माना को जाता है। जिसके पास जितना पैसा होता है वह उतने ही रॉब-रुतबे से रहता है। आपने गौर किया होगा शादी के रिश्ते जुड़ते वक्त भी दूल्हे के पास और उसके परिवार के पास कितना पैसा है इसको काफी महत्व दिया जाता है। अगर पैसा अधिक रहता है तो सगे-संबंधियों से लेकर मित्रों तक सबको तवज्जो देते हैं। इसीलिए माना गया है कि अगर आपको धन की हानि होती है तो यह बात दूसरों को कभी नहीं बताना चाहिए।
अगर आप अपने धन के हानि की बात को जितना ज्यादा लोगो को बताएँगे उतना ही ज्यादा आपके मित्रो से लेकर आपके सगे-संबंधी आपका मजाक बनाएंगे और आपसे धीरे-धीरे दूर होते जाएंगे। अगर आप यह कहकर कि ‘आपको धन की हानि हुई है’ किसी से मदद मांगेंगे तो आपको मदद मिलनी काफी मुश्किल रहेगी। इसलिए कभी भी धन की हानि किसी को नहीं बताइये।
घर के झगड़े :- दुनिया में शायद कोई ऐसा परिवार नहीं होगा जिसमे छोटी-मोटी नोक-झोक से लेकर लड़ाई-झगड़ा ना हुआ होगा। आमतौर पर ऐसे झगड़े हर परिवार में होते हैं इसका मतलब ये नहीं कि आप अपने घर के झगड़ों को दोस्तों और रिश्तेदारों से बताने लगे। घर के लड़ाई-झगड़े अपने दोस्तों और रिश्तेदारो के आगे सार्वजानिक करने से आपको ही परेशानी झेलनी पड़ती है। कुछ समय बाद जब आपके परिवार का माहौल ठीक होता है तो वो ही रिश्तेदार और दोस्त आपके आपके परिवार का पीठ पीछे मजाक बनाते हैं। इसलिए  कभी भी भूल कर भी अपने परिवार के झगडे की बात किसी के भी साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
रतिक्रिया :स्त्री और पुरुष को हमेशा ही रतिक्रिया के दौरान एकांत रखना बहुत जरुरी है। इससे जुड़ी बाते हमेशा गुप्त रखनी चाहिए। अपने क़रीबी से करीबी दोस्त को भी इस क्रिया से जुड़ी बातें नहीं बतानी चाहिए नहीं तो ये आपके लिए अच्छा साबित नहीं होगा। अगर आप इसे अपने दोस्तों को बताते हैं तो आपके चरित्र और सामजिक जीवन पर गलत प्रभाव पड़ने की आशंका हमेशा बनी रहती है।

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भारतीय समाज में विवाह महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। शादी सिर्फ दो इंसानों के बीच का संबंध नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। जिस शादी से दो परिवारों की डोर बंधी होती है। शादी के लिए कैसा जीवनसाथी चुना जाए इसके लिए विशेष सावधानी बरतने की अवश्यकता होती है। 

बहुत से पुरूष महिलाओं की खूबसूरती के मोहपाश में बंधकर उनसे शादी कर लेते हैं। कुछ समय के उपरांत महिलाओं की खूबसूरती से उनका मोह भंग हो जाता है। सभी खूबसूरत महिलाएं विवाह योग्य नहीं होती। सूरत से अधिक सिरत महत्वपूर्ण होती है। 

आचार्य चाणक्य अपनी नीति में बताते हैं की विवाह के लिए कैसी स्त्री का चुनाव करना चाहिए। 

चाणक्य कहते हैं - 

वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्। 
रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।। 


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अर्थात - 

बुद्धिमान और प्रशस्त पुरूष वह है जो ऊंचे कुल, संस्कारी एवं शिष्ट परिवार की कन्या से विवाह करता है। ऐसे परिवार की कन्या देखने में चाहे सुंदर न हो लेकिन अपने सद्गुणों की महक से परिवार की बगीया को महकाती है। 

अधिकतर पुरूष महिला के बाहरी अवरण से प्रभावित होकर उन्हें जीवन संगिनी बनाने का निर्णय कर लेते हैं फिर चाहे वह कन्या अधार्मिक और नीच कुल की ही क्यों न हो। 

विवाह हमेशा अपने कुल में ही करना चाहिए। अपने से उच्च एवं निम्न कुल की कन्या विवाह उपरांत परिवार में कलह करती हैं। जिससे की परिवार टूट जाता है। उच्च कुल की कन्या को अपने कुल का अभिमान होता है और निम्न कुल की कन्या का स्वभाव व आचरण निम्न ही रहता है। 

धार्मिक और आस्तिक विचारों वाली महिला का शिष्ट चाल-ढाल होता है। जो गृहस्थ जीवन को धर्म, अर्थ व काम से सुख-समृद्ध बनाती है। 

आचार्य चाणक्य की यह नीति स्त्रियां भी ध्यान रखें, जिन पुरुषों में ऐसे अवगुण हों, उन्हें अपना जीवनसाथी न बनाएं। 


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Chanakya Niti for Success in Life


आज के समय में अधिकांश लोगों को धन संबंधी सुख पाने के लिए अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है। फिर भी बहुत ही कम लोग अधिक श्रम के बाद भी पर्याप्त प्रतिफल प्राप्त कर पाते हैं। व्यक्ति को कुछ कामों में तो सफलता मिल जाती है, लेकिन कुछ कामों में असफलता का मुंह भी देखना पड़ता है। यदि आप सफलता का प्रतिशत बढ़ाना चाहते हैं तो यहां एक चाणक्य नीति बताई जा रही है। इस नीति का ध्यान रखेंगे तो आपको अधिकतर कार्यों में सफलता मिल सकती है। हम जब ज्यादा कामों में सफल होंगे तो धन संबंधी लाभ भी मिलेगा और इस प्रकार धन संचय होने लगेगा।


चाणक्य कहते हैं कि-

क: काल: कानि मित्राणि को देश: कौ व्ययागमौ।
कस्याऽडं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुंहु:।।

यह चाणक्य नीति के चतुर्थ अध्याय का 18वां श्लोक है। इस श्लोक में चाणक्य ने बताया है कि हमें कार्यों में सफलता पाने के लिए किन 6 बातों को हमेशा सोचते रहना चाहिए। इन बातों का ध्यान रखकर काम करेंगे तो असफलता मिलने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं।

पहली बात: यह समय कैसा है

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि वही व्यक्ति समझदार और सफल है, जिसे इस प्रश्न का उत्तर हमेशा मालूम रहता है। समझदार व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है। अभी सुख के दिन हैं या दुख के। इसी के आधार पर वह कार्य करता हैं। यदि सुख के दिन हैं तो अच्छे कार्य करते रहना चाहिए और यदि दुख के दिन हैं तो अच्छे कामों के साथ धैर्य बनाए रखना चाहिए। दुख के दिनों में धैर्य खोने पर अनर्थ हो सकता है।

दूसरी बात: हमारे मित्र कौन-कौन हैं

हमें यह मालूम होना चाहिए कि हमारे सच्चे मित्र कौन-कौन हैं और मित्रों के वेश में शत्रु कौन-कौन हैं। शत्रुओं को तो हम जानते हैं और उनसे बचते हुए ही कार्य करते हैं, लेकिन मित्रों के वेश में छिपे शत्रु का पहचाना बहुत जरूरी है। यदि मित्रों में छिपे शत्रु को नहीं पहचान पाएंगे तो कार्यों में असफलता ही मिलेगी। ऐसे लोगों से भी बचना चाहिए। साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखें कि सच्चे मित्र कौन हैं, क्योंकि सच्चे मित्रों की मदद लेने पर ही सफलता मिल सकती है। यदि गलती से मित्र बने हुए शत्रु से मदद मांग ली तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है।

तीसरी बात: यह देश कैसा है

यह देश कैसा है यानी जहां हम काम करते हैं, वह स्थान, शहर और वहां के हालात कैसे हैं। कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इन बातों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे तो असफल होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी।

चौथी बात: हमारी आय और व्यय की सही जानकारी

समझदार इंसान वही है तो अपनी आय और व्यय की सही जानकारी रखता है। व्यक्ति को अपनी आय देखकर ही व्यय करना चाहिए। जो लोग आय से अधिक खर्च करते हैं, वे परेशानियों में अवश्य फंसते हैं। अत: धन संबंधी सुख पाने के लिए कभी आय से अधिक व्यय नहीं करना चाहिए। आय से कम खर्च करेंगे तो थोड़ा-थोड़ा ही सही पर धन संचय हो सकता है।

पांचवीं बात: मैं किसके अधीन हूं

हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारा प्रबंधक, कंपनी, संस्थान या बॉस हमसे क्या चाहता है। हम ठीक वैसे ही काम करें, जिससे संस्थान को लाभ मिलता है। यदि संस्थान को लाभ होगा तो कर्मचारी को भी लाभ मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

अंतिम बात: मुझमें कितनी शक्ति है

अंतिम बात सबसे जरूरी है, हमें यह मालूम होना चाहिए कि हम क्या-क्या कर सकते हैं। वही काम हाथ में लेना चाहिए, जिसे पूरा करने का सामर्थ्य हमारे पास है। यदि शक्ति से अधिक काम हम हाथ में ले लेंगे तो असफल होना तय है। ऐसी परिस्थिति में कार्य स्थल और समाज में हमारी छबि पर बुरा असर होगा।

कौन हैं चाणक्य

प्राचीन समय में आचार्य चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे। चाणक्य की राजनीति में गहरी पकड़ थी। इनके पिता का नाम आचार्य चणीक था, इसी वजह से इन्हें चणी पुत्र चाणक्य भी कहा जाता है। संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था। जब इन्होंने अपनी कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त कूटनीति से ही इन्होंने चंद्रगुप्त जैसे सामान्य बालक को अखंड भारत का सम्राट भी बनाया। आचार्य चाणक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ रचा गया है। इसमें दी गई नीतियों का पालन करने पर जीवन में सफलताएं प्राप्त होती हैं।

आचार्य चाणक्य ने कुछ बातें ऐसी बताई हैं जो किसी को भी बतानी नहीं चाहिए।

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चाणक्य नीति के महान पंडित आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में अपने जीवन के महान अनुभवों को साझा किया है. इसमें उन्होंने जीवन को सही तरीके से जीने के कई महत्वपूर्ण बातें शेयर की है. आचार्य चाणक्य को आज भारतीय इतिहास के महान विद्वानों में स्थान दिया जाता है.
आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में लिखा है की हमें कभी भी जीवन में चार बातें किसी को बतानी नहीं चाहिए. आइये पढ़े आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति से – कभी भी ये 4 बातें किसी को नही बतानी चाहिए !

अर्थनाशं मनस्तापं गृहिणीचरितानि च।
नीचवाक्यं चाऽपमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्।।

ज़िन्दगी में अपमान –

आचार्य चाणक्य कहते है की हमें अपने जीवन में हुए अपमान को कभी भी किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहिए. जीवन में कई बार हमारे साथ ऐसी घटनाएँ घट जाती है जब हमारा मजाक बन जाता है. अगर आपका कभी भी जीवन में अपमान हुआ है तो उसे हमेशा गुप्त ही रखे.
अगर आप उसे अन्य लोगो को बताओगे तो वह आपका मजाक ही बनायेंगे और आप पर हँसेंगे. बहुत कम लोग ऐसे होते है जो हमारी ज़िन्दगी में कद्र करते है, अधिकतर लोग तो एक – दूसरे से ईर्ष्या करते रहते है.
इसलिए अपने जीवन में हुई अपमानजनक घटनाओ को खुद के सिवा किसी और को नहीं बताना चाहिए. हमें अपने सुखद जीवन व अच्छाई को दूसरे तक पहुँचाना चहिये न की अपने बुरे समय के अपमान को. इसलिए अपने जीवन में याद रखे की कभी भी अपनी पोल खुद ही मत खोले और अपने अपमान को एक सपना समझ कर भूल जाए.

घर – परिवार की गुप्त बाते –

अधिकतर घरो में इसलिए फूट नहीं पड़ती की उन्होंने आपस में झगड़ा किया हो बल्कि हमेशा बाहर वाला ही घर में झगड़ा पैदा करता है. कहने का मतलब यह है की जब हम अपने घर की बातें बाहरी लोगो को बताने लग जाते है तो हमारे घर की छोटी से छोटी बात बाहर वालो को पता लगने लग जाती है.
वे हमारे घर के राज को जान जाते है. जिसका फायदा बाहरी लोग उठाते है और षड्यंत्र करके घर में क्लेश पैदा करते है. कभी भी घर की बात बाहरी लोगो से कहने से बचे. विशेषकर किसी व्यक्ति द्वारा अपने पत्नी के चरित्र की बातें कभी भी किसी इंसान से शेयर नहीं करनी चहिये क्योंकि पत्नी का सीधा सम्बन्ध पति के साथ होता है. और पत्नी के अपमान का मतलब है पति का अपमान.
इसलिए अगर पत्नी भले ही कैसी भी क्यों न हो. उसकी बातें समाज में करने से हमेशा बचे. इससे आप कई problems से दूर रहोगे.

मन का दुःख –

यह समस्या बहुत लोगो की होती है की वे अपनी छोटी – छोटी problems को भी हर किसी को बताने लग जाते है. क्या ऐसा करना सही होता है. अपने मन की दुःख, तकलीफे और दर्द दूसरे को बताकर हम अपना बहुत बड़ा नुकसान करते है.
दूसरे लोगो के पास इतना time नहीं होता की वह आपके दुःख – दर्द को समझे. अधिकतर लोगआपके सामने आपको सांत्वना तो देंगे पर आपके जाने के बाद आपका मजाक बनाने लग जायेंगे.
हर किसी के सामने अपने दुखो का बखान मत करते रहे. अपने मन के दुःख और तकलीफों को सिर्फ उन्ही लोगो को बताये जो आपके बहुत करीबी होते है और जिनपर आपको विश्वास होता है.
हर दोस्त या रिश्तेदार के साथ अपनी राम – कहानी शुरू न करे. यह आपका दुःख कम करने के बदले और अधिक बढ़ा देगा. ऐसे कभी भी दुःख कम नहीं होता बल्कि अपने दुःख को जानकर उसे दूर करने की सोचे. अपने problems का solution निकाले.

धन की हानि –

जीवन में कई बार ऐसा मौका आ जाता है जब हमें पैसो को तंगहाली हो जाती है. हम अपने धन – दौलत से हाथ धो बैठते है. पैसो की कमी के कारण हमारा moral एकदम घट जाता है और हम खुद को कंगाल महसूस करने लग जाते है. ऐसे में कभी भी अपने कंगाली हालत को दूसरे लोगो से बोलने से बचे.
अपने खोये हुए धन की अगर आप हर जगह चर्चा करोगे तो लोग आपका मजाक बनाने लग जायेंगे आपकी मदद करना तो दूर की बात है.
आजकल की दुनिया में ऐसे इंसान की कोई help नहीं करना चाहता जिसके पास धन – दौलत नहीं होती है. जब भी आपके साथ ऐसे हालात हो जाये तो खुद को मजबूत बनाये और ऐसे हालात से निकलने की सोचे. धन की हानि हो जाने से सबकुछ खत्म नहीं हो जाता. अपनी पॉवर और खुद पर भरोसा रखे.
यह दुनिया बदलती रहती है और दुःख – सुख लगा रहता है. इसलिए अपना सम्मान करे और दूसरे लोगो को अपनी इन बातो को बताने से बचे.


दोस्तों ! इस आर्टिकल में हमने आपके साथ चाणक्य नीति की चार बहुमूल्य बातें शेयर की. इन टिप्स को आप पढ़े और अपने जीवन में अपनाये. जीवन में गुप्त रखने वाली इन बातो को आप कभी भी किसी को न बताये. ऐसा करने पर आप ज़िन्दगी में हमेशा खुश रहोगे और आपके जीवन में खुशहाली आएगी.
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