महाशिवरात्रि को त्योहार इस साल 13 फरवरी को मनाया जाएगा। भोले बाबा के भक्त अभी से शिवरात्रि के लिए तैयारियां शुरू कर चुके हैं.
हर साल की तरह इस बार भी भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। महाशिवरात्रि को हिन्दुओं का सबसे शुभ त्योहार माना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त भगवान शिव की पूजा कर फल और फूल अर्पित करते हैं।
महाशिवरात्रि को 'शिव की महान रात' के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाई जाएगी। गुजरात का सोमनाथ और उज्जैन का महाकलेश्वर मंदिर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर हैं, जहां हर साल शिवरात्रि के शुभ मौके पर लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा कई भक्त गंगा स्नान के लिए वाराणसी जाते हैं।
महाशिवरात्रि के पर्व का उत्सव एक दिन पहले ही शुरू हो जाता है। महाशिवरात्रि की पूरी रात पूजा और कीर्तन किया जाता है। इतना ही नहीं कई पुराण के अंदर शिवरात्रि का उल्लेख मिलेगा, विशेषकर स्कंद पुराण, लिंग पुराण और पद्म पुराणों में महाशिवरात्रि का उल्लेख किया गया है। शैव धर्म परंपरा की एक पौराणिक कथा अनुसार, यह वह रात है जब भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश के स्वर्गीय नृत्य का सृजन किया था। हालांकि कुछ ग्रंथों में यह दावा किया गया है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था।
महाशिवरात्रि के दिन करें ये काम : महाशिवरात्रि के दिन महादेव के अभिषेक का खासा महत्व है। अगर आप ये एक काम ठीक तरह से कर लेते हैं तो आपको भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होगी। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद अपने मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक करना होगा। महाशिवरात्रि के दिन अभिषेक को काफी अहम माना जाता है। इस दिन शिव भक्त ओम नम: शिवाय मंत्र के उच्चारण के साथ शिवलिंग का दूध, शहद, दही और चंदन से अभिषेक करे तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। इसके अलावा बेर, बेलपत्र और फूल आदि भी भगवान को अर्पित करने चाहिए।
व्रत का भी है महत्व: महाशिवरात्रि के दिन व्रत का भी खास महत्व है। इस दिन भक्त अगर विधि-विधान के साथ महाशिवरात्रि का उपवास करे तो महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि पर कुछ शिव भक्त उपवास के दौरान एक बूंद पानी भी नहीं पीते। ज्यादातर भक्त व्रत के दौरान फल के साथ दूध और पानी का सेवन करते हैं। शास्त्रों का कहना है अगर कोई भक्त पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ इस व्रत को करता है तो भगवान शिव उसे सभी प्रकार के पापों से मुक्त कर समृद्धि और आशीर्वाद देते हैं। शिवरात्रि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं खाया जाता। अमावस्या की सुबह अगले दिन पूजा के बाद भोजन किया जाता है। दूसरी तरफ जो लोग किसी कारणवश या बीमारी के चलते इस व्रत को नहीं रख पाते वह इस परंपरा को बनाएं रखने के लिए फल, दूध से बनें पदार्थो का सेवन कर सकते हैं।
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