शहर के अलग-अलग चौराहों पर घूमने वाले एक मानसिक विमंदित भिखारी के अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद लोगों ने उसके कपड़े खोले तो सभी की आंखें फटी रह गई।
उदयपुर: शहर के अलग-अलग चौराहों पर घूमने वाले एक मानसिक विमंदित भिखारी के अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद लोगों ने उसके कपड़े खोले तो सभी की आंखें फटी रह गई। पेट पर तार से बंधा एक कार्टून, उसमें फटे-पुराने तरह-तरह के नोट के अलावा 1 से 10 रुपए तक के जंग खाए सिक्के मिले। करीब 2100 रुपए के तो सिक्के ही निकले। नोटों का तो कोई हिसाब ही नहीं।
दुर्गन्ध मारते इन कपड़ों को खोलने में अगर पलभर भी देर हो जाती तो भिखारी की मौत हो जाती। कपड़े इतने सख्त हो गए थे कि लोगों को इन्हें चाकू से फाडऩा पड़ा। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है, अभी चिकित्सकों ने उसकी हालत स्थिर बताई है।
पुलिस ने बताया कि एक भिखारी पुराने कंट्रोल रूम से बापूबाजार वाले मार्ग पर मदहोशी हालत में लोगों के पीछे दौड़ रहा था। हुडदंग के बीच वह अचानक गिर गया। बेहोशी हालत में ही उसके मुंह से झाग निकलने लगे। लोगों ने उसकी हालत समझते देर नहीं लगी। उन्होंने उसके तुरंत कपड़े खोले। भिखारी ने चार से पांच शर्ट पहन रखे थे जो बारिश के पानी से गिले हो गए थे। नमी के कारण शरीर पर फफोले व चकते पड़ गए थे। इन कपड़ों पर उसने तार से कस कर गत्ते का कार्टून, थैलियां व मैले कुचले फटे कपड़े बांध रखे थे। इनमें कागज, थैलियों के बीच पुराने नोट के साथ ही सिक्के रखे हुए थे। लोगों ने उसके दुर्गन्ध मारते कपड़ों को खोलकर उस पर पानी डालकर साफ किया। उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया।
फूले पेट का खुला राज
पुलिस को कपड़ों के बीच गत्ते के कार्टून में काफी नोट व सिक्के मिले। नोट फटे-पुराने थे। सिक्कों पर जंग आ गया था। बताया जाता है कि यह भिखारी उदियापोल से देहलीगेट के बीच ही घूमता रहता था, छेडऩे पर यह हर किसी के पीछे मारने तक दौड़ता। इसका पेट काफी आगे निकलने के कारण इसकी अलग ही पहचान होने से अमूमन उसे सब जानते थे। अगर गलती से उसे कोई हाथ लगा देता तो वह पत्थर तक मार देता। बाजार में निकलने के दौरान हर किसी पर बड़बड़ाता हुआ निकलता था। अचानक बेहोश होने पर उसके कपड़े खोले तो फूले हुए पेट पर कचरा, नोट व सिक्के मिले।

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