रायपुर। आमतौर पर यही कहा जाता है कि जन्म और मृत्यु का समय तय होता है, लेकिन इन दिनों जन्म के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। लोग अपनी सुविधा और पसंदीदा दिन व समय का ध्यान रख रहे हैं। महिलाएं स्वयं ही दर्द से बचने के लिए पसंदीदा दिन, समय और मुहूर्त में सीजर डिलीवरी करवा रही हैं।

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बताया जा रहा है कि शासकीय अस्पताल ज्यादातर सीजर से बचते हैं, इसलिए इन दिनों निजी अस्पतालों की ओर ज्यादा रुख हो रहा है। गायनेकोलॉजिस्ट का कहना है कि लोग इन दिनों डिलीवरी के लिए शुभ दिन और शुभ मुहूर्त का ध्यान रख रहे हैं।
पहले से ही वे पंडितों से पूछताछ कर लेते हैं और उसके आधार पर ही चिकित्सकों से संपर्क करते हैं। इसके साथ ही दूसरा बड़ा कारण तो यह है कि महिलाएं भी इन दिनों दर्द से बचना चाहती हैं।
विशेषज्ञों द्वारा दिए गए समय में अगर विलंब होता है तो परिजन स्वयं ही अपनी पसंदीदा तारीखों में सीजर डिलीवरी के लिए कह देते हैं। सीजर डिलीवरी के मामले में शासकीय अस्पतालों की तुलना में राजधानी के निजी अस्पतालों का आंकड़ा बहुत अधिक है। निजी अस्पतालों में करीब 60 फीसदी सीजेरियन डिलीवरी फीसदी होती है।
अच्छा दिन था
विश्व योग दिवस के दिन बच्ची को जन्म देने वाली गीता सोनी पति पंकज सोनी ने बताया कि डॉक्टर ने पहले से 20 से 23 जून के बीच का समय दिया था। विश्व योग दिवस का दिन था तो उन्होंने इसी दिन सीजर डिलीवरी के लिए कहा।
डिलीवरी शुभ दिन चाहिए थी
पूनम मिश्रा पहले से ही पेन से काफी डरी हुई थी। इसके अलावा शुभ दिन में ही डिलीवरी चाहिए थी, इसलिए उन्होंने पहले ही तय कर लिया था सीजर डिलीवरी करानी है। 

प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा
नॉर्मल डिलीवरी से पैदा हुए बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है, इसलिए सीजर डिलीवरी का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। विशेषकर पहले प्रसव के दौरान तो यह बहुत ही जरूरी है।- डॉ. ज्योति जायसवाल, प्रोफेसर, पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

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