बोलिविया के दक्षिण -पश्चिम हिस्से में केरो रिको माउंटेन लोगों को खाने वाला पहाड़ बन चुका हैनई दिल्ली। इसे मौत का पहाड़ कहें तो भी गलत नहीं होगा। बोलिविया के दक्षिण -पश्चिम हिस्से में केरो रिको माउंटेन लोगों को खाने वाला पहाड़ बन चुका है। लेकिन यह हमेशा से ऐसा नहीं था। बोलिविया पर लंबे समय तक स्पेन के लोगों ने राज किया है। वे इस पहाड़ को रिच माउंटेन कहते थे, क्योंकि यहां काफी मात्रा में चांदी पाई जाती थी। स्पेनियों को लगता था कि यह पूरा पहाड़ ही चांदी के अयस्क से बना है। हालांकि स्थानीय लोग इस पहाड़ को अभिशाप के रूप में देखते हैं। अनुमान है कि 16वीं सदी से अब तक यह पहाड़ कुल 80 लाख लोगों की जिंदगी लील चुका है।
1545 में स्पेनियों ने केरो रिको पहाड़ की तलहटी में एक छोटा शहर स्थापित किया। उन्होंने बोलिविया के करीब 30 लाख मूल निवासियों को जबरदस्ती माइनिंग के काम में लगाया। इस पहाड़ से सदियों से चांदी निकाली जा रही है। अनुमान है कि स्पेनियों ने इस पहाड़ से 2 अरब औंस चांदी निकाली। कहते हैं कि इसी चांदी ने स्पेन को अमीर बनाया है। आलम यह है कि लगातार खनन के चलते इस पहाड़ की ऊंचाई काफी कम रह गई है। लगातार खनन होने के चलते यहां जगह-जगह गड्ढे और सुरंगें बनी हुई हैं। इस वजह से अब माइनिंग और कठिन हो गई है और हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह इस कदर पोला हो चुका है कि कभी भी भरभराकर बैठ सकता है। वर्तमान में यहां लगभग 15 हजार माइनर्स काम करते हैं। विधवाओं की स्थानीय एसोसिएशन का कहना है कि हर महीने औसतन 14-15 महिलाएं विधवा हो जाती हैं, क्योंकि उनके पति इन खदानों में काम करते हुए मारे जाते हैं। यहां परिस्थितियां बेहद खराब हैं। चारों तरफ धूल और चट्टानों से निकलने वाली जहरीली गैसों का साम्राज्य है। हर श्रमिक को दिनभर में खुदाई और अयस्क पीठ पर लादकर लाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके चलते यहां औसत जीवनकाल सिर्फ 40 साल ही है। इन भीषण परिस्थितियों में बचे रहने के लिए उन्होंने तमाम माइंस में एल टियो की मूर्तियां लगा रखी हैं। एल टियो डेविल है, जिसके सींग होते हैं। उसे गहराइयों का स्वामी माना जाता है।
इतिहासकार एडुआर्डो गेलीनो के अनुसार 16वीं सदी से अब तक इन पहाड़ों में 80 लाख लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि 80 लाख में उन लोगों को भी शामिल कर लिया गया है, जो इस जगह को छोड़कर चले गए थे। बहरहाल जो भी, मौतों का आंकड़ा बेशक बहुत बड़ा है।
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