शिल्पग्राम में गुजरात का युवा कलाकार बिखेर रहा 'नेल आर्ट ऑन पेपर' से नवरंग

आप भी इस शख्स के नाखूनों का कमाल देखकर चौंक जाएंगे.. इस काम में करते हैं नाखूनों का यूज

उदयपुर
हर कलाकार के मन में कुछ नया करने-गढऩे की चाह होती है। अपने आसपास दूसरों को कुछ भी सृजित करते देखकर वह उनसे अलहदा करने का मानस बना लेता है। कभी विधाएं बदलती हैं तो कभी शैलियां लेकिन जरिया जुदा होते हैं। एेसे में हर सृजनकार की रचना दूसरे से अलग होना लाजिमी है। सुरेन्द्र नगर (गुजरात) निवासी प्रकाश मकवाना की दास्तान भी कुछ एेसी ही है। अपने स्कूली जीवन में कोरे कागज के नीचे सिक्का रखकर पेंसिल रगडऩे की प्रक्रिया से उभरी आकृतियों से उपजे कौतुक ने उन्हें नाखून से चित्राकृतियां गढऩे वाला अनूठा कलाकार बना दिया। वे बताते हैं कि उनके परिवार में कोई भी पेशेवर चित्रकार नहीं है, बस शौकिया काम करते-करते वे इस मुकाम तक पहुंच गए।

शुरुआत नाम उकेरने से 
प्रकाश बताते हैं कि करीब 15 साल पूर्व जब वे शिल्पग्राम आए तो ज्यादातर पुराने पोस्टकार्ड या कोरे कागज पर नाखून से पर्यटकों के नाम उकेरा करते थे। काफी समय तक वही सब करते रहने से मन को संतुष्टि नहीं मिली। क्योंकि, उसमें ज्यादा क्रिएटिविटी नहीं थी। फिर तय किया मोर-तोते-चिडि़या और बेलबूटे बनाने का। हां, नाखून से उकेरी इन चित्राकृतियों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए अपनी सृजनशीलता से एक नई तकनीक ईजाद की। वो थी डेनिम जींस के कपड़े पर ऑइल मिक्स ड्राई कलर पाउडर टेक्निक। इसके प्रयोग से मिनटों में एम्बोस कृति रंगबिरंगी होकर लोगों को बरबस आकृष्ट करने लगी।




गणपति की सर्वाधिक मांग
सामान्यत: प्रकृति चित्रण के साथ गणपति के विभिन्न रूप पर्यटक सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इसके अलावा डेकोरेटिव आर्ट में मॉडर्न पेंटिंग डिमांड में रहती हैं। किसी विदेशी ग्राहक के सुझाव पर बीच में 'बुक मार्क' भी बनाए और खूब पसंद किए गए। प्रकाश की अनूठी कृतियों की प्रदर्शनी देश के सभी महानगरों में लग चुकी हैं।

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