ये नोट कहां और किस तरह बनाए जाते हैं। इन्हें खपाने में किस तरह का उपयोग या जाता है, इसकी तहकीकत में लगे। 16 दिन लगे।

जयपुर.यह खबर आपको चौंका देगी। बीते साल 8 नवम्बर को सरकार ने नोटबंदी की तलवार चलाकर काले धन और जाली नोटों के धंधे पर जोरदार प्रहार किया था। अभी एक साल भी नहीं बीता कि नकली नोटों के कारोबार ने फिर पैर पसारने शुरू कर दिए। भास्कर रिपोर्टर को जानकारी मिली कि राजस्थान में भी नकली नोट बनाए जा रहे हैं। 

यहां बिन किसी मशीन या सेटअप के बनाते हैं नकली नोट...


ये नोट कहां और किस तरह बनाए जाते हैं। इन्हें खपाने में किस तरह का उपयोग या जाता है, इसकी तहकीकत में लगे। 16 दिन लगे उस व्यक्ति का पता करने में, जो इन नोट बनाने वालों के बारे में जानकारी रखता था। सामने आया कि भरतपुर जिले से महज 13 किलोमीटर दूर अजान नाम के गांव में ये नोट बनाए जा रहे हैं। किसी तरह रिपोर्टर ने गांव के इन लोगों से संपर्क किया। नकली नोट बनाने वालों ने हमारी पूरी पड़ताल की और दो दिन बाद आने के लिए बोला। 22 जुलाई की सुबह अजान गांव में उसे व्यक्ति के घर पहुंचे।

वीडियो में दिखाया किस तरह बनते हैं नकली नोट

आश्चर्य यह कि युवक ने बिना किसी मशीन या सेटअप के हमें 500 रुपए का नकली नोट का सेंपल बना कर दे दिया। यहां तक कि 2000 रुपए के नोट बनाने का दावा किया गया लेकिन, उसका पूरा सामान नहीं होना बताया गया। युवक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। बताया- उत्तरप्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश तक के लोग नोट लेने आते हैं। भास्कर ने पहले खुद पड़ताल की और एटीएस आईजी को नकली नोट बनाने वालों की सूचना दी। इसके अलावा एसओजी के आला अधिकारियों को भी वीडियो और नोट दिखाए कि किस तरह नकली नोट बनाए गए।


इस गांव में चलता है जाली नोटों के कारोबार...

कड़ी से कड़ी जोड़ी और 22 जुलाई को पहुंच गए अजान गांव में जाली नोटों के कारोबार तक

भरतपुर से महज 13 किमी दूर अजान नाम के गांव में कुछ लोगों द्वारा नकली नोट बनाने की सूचना मिली। हम उस व्यक्ति का पता करने में जुटे, जो यहां तक हमें पहुंचा सकता था। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए हम उस युवक तक पहुंचे जिसे नकली नोट बनाने वाले लालच दे चुके थे कि उसे भी मोटी कमाई होगी। सुजीत नाम के इस युवक को भरोसा दिलाया गया कि हम नोट खरीदेंगे, लेकिन पहले सेंपल नोट चाहिए।

सुजीत ने तीन दिन का समय मांगा और नोट बनाने वालों से संपर्क करने के बाद हमें कहा कि वे लोग मिलने के लिए तैयार हैं। जैसे ही हमने हां कहा, नोट बनाने वालों ने सुबह दस बजे मिलने के लिए बुलाया। 22 जुलाई को हम जयपुर से रवाना हुए और सुबह 9.10 बजे भरतपुर पहुंचे। नोट बनाने वालों ने एक व्यक्ति को हमारे पास भरतपुर भेजा। उसने कुछ सवाल पूछे और संतुष्ट होने के बाद कहा कि मेरे पीछे चले आओ। करीब 13 किमी. बाद गांव में घुस चुके थे और सिंगल रोड आ चुका था। जैसे-जैसे गांव में अंदर गए, सड़क छोटी होती गई। अन्त में एक महज एक गाड़ी जाने लायक रोड रह गई। हमें उस घर से काफी पहले ही उतरने को कह दिया गया। भीगते हुए हमे उस घर में लगाया गया, जहां हमें नकली नोट दिए जाने थे। हमें घर के अंदर ले जाया गया और एक कमरे में बैठा दिया गया।

विजय गैंग ने रिपोर्टर के सामने यूं बनाया नोट

1.करीब 25 मिनट इंतजार के बाद विजय नाम का युवक आया। उसने हमसे 500 रूपए के दो असली नोट लिए। उनके नम्बर ढकने के लिए उसने दो नम्बर साइज के छोटे कागज (नम्बरनुमा) लिए और असली नोट के नम्बर पर चिपका दिए। फिर उसने पास की ही एक आलमारी से एक पैकेट निकाला और उसमें से ऐसा कागज निकाला जिसका साइज असली नोट के बराबर था।


2. विजय ने एक छोटी डिब्बी में से केमिकल निकाला। उसे पूरे कागज पर दोनों तरफ लगाया। कागज को सुखाने के लिए अखबार में दबा दिया। फिर इस कागज को दोनों असली नोटों के बीच क्रमवार रखा और लगा दिया।



3. थोड़ी देर बाद दो कांच के बीच असली नोट के बीच लगाए गए टुकडे को रखा। विजय ने एक व्यक्ति को उस कांच गर्म करने के लिए कहा। उसने गैस पर करीब डेढ़ मिनट कांच को गर्म किया और विजय को दे दिया।



4.विजय ने कांच के उन दो हिस्सों में से कागज को निकाला और तीन गिलास मंगाए। दो गिलास में केमिकल थे और एक में सादा पानी। फिर उसने गर्म हुए कागज को असली नोट से अलग किया और उसके उपर सीरियल नम्बर के लिए एक कागज चिपका कर उसे फोल्ड कर लिया।



5.इसके बाद एक खाकी रंग का कागज लिया और उस नोट को लपेट कर धागे से बांध दिया। मंगाए गए दो केमीकल के गिलास में एक गिलास में इसे डुबो दिया। विजय ने बताया कि इस गिलास वाले केमिकल से नोट पर रंग आ जाएगा। करीब चार मिनट उसे केमिकल में डुबो कर रखा।



6.केमिकल में से निकाल कर धागा खोला और खाकी कागजों में से इस जाली नोट को बाहर निकाला। जाली नोट के पेपर को सीधा किया और दूसरे गिलास के केमिकल में डाला। विजय ने बताया कि इस केमिकल से नोट साफ हो जाएगा। हुआ भी यही। विजय ने केमिकल में से नोट निकाला और उसे हाथ से ही रगड़ कर साफ करने लगा। इस कागज पर 500 के नोट जैसा छप गया।



7.इस जाली नोट को हुबहू बनाने के लिए अखबार के बीच इस नोट को रखा और प्रेस से सुखा दिया। हमें नोट देकर बोला- ये रहा असली नोट। अब इसे कहीं भी चला सकते हो। वह बिलकुल असली नोट जैसा लग रहा था। हां, नोट के नम्बर अलग थे। हमने कहा कि ये नम्बर किसी ओर के पास हुए तो बैंक में पकड़े जा सकते हैं। उसने दावा किया- ये नम्बर और कहीं नहीं मिलेंगे।



भास्कर- नोट छापने के लिए सामान कहां से लाते हो?

विजय- नासिक प्रेस में सेटिंग है, सब वहीं से मंगाते हैं

ऐसे नोट कैसे बना लेते हो, यह सामान कहां से आता है?
विजय – देश में तीन ही जगह नोट बनते हैं। नासिक से माल मंगवाते हैं। सब कागज और केमीकल पर 
डिपेंड है।


कागज, केमिकल कितना महंगा आता है?

विजय- एक लाख के नोट बनाने में करीब 25 हजार रुपए का खर्चा आता है। 25 हजार हम लेते हैं। 50 हजार दोगे तो एक लाख रुपए देंगे।


नोट कैसे नकली है, ये तो बिलकुल असली लग रहा है?

विजय- असली ही है। बस, समय के साथ रंग उड़ता जाएगा। ज्यादा से ज्यादा चार महीने अपने पास रख सकते हो। 
कहीं ऐसा ना हो कि बैंक में जमा कराएं और पकड़े जाएं।
विजय– एक साथ पूरे रुपए जमा मत कराना। बैंक में पता नहीं लगेगा। एसबीआई के अलावा कहीं भी जमा करा देना।


हम बिजनेसमेन हैं। पैसे लेकर यहां आने की रिस्क नहीं ले सकते। हमारे पास जयपुर ही रुपया पहुंच सकता है क्या?

विजय – रिस्क क्या है। कुछ भी नहीं है। और भी लोग आते हैं। अपनी आंखों के सामने रुपए बनते देखना और थोड़ी देर में माल ले जाना।


तीन लाख रुपए के नकली देने में कितना समय लगेगा?

विजय- हमारे चार लोग और आप बैठोंगे। आपको भी नम्बर चिपकाने के लिए दिए जाएंगे ताकि काम जल्दी हो जाए। तीन से चार घंटे तो लगेंगे ही।


यदि पुलिस वालों ने गांव में या भरतपुर में रोक लिया तो?

विजय- क्या बात करते हो यार, आप तो बेवजह ही डर रहे हो। यह हमारा गांव है। किसी की हिम्मत है क्या। यदि फिर भी आपको डर लग रहा है, तो हमारा आदमी आपको गांव के बाहर तक छोड़ कर आएगा।



मामला गंभीर है, तुरंत कार्रवाई करेंगे

नकली नोट बनाए जा रहे होंगे, इसकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती। वीडियो में काफी कुछ नजर आ रहा है। बहुत ही गंभीर मामला है। इसमें त्वरित कार्रवाई की जाएगी। 


-पुष्पेन्द्र सिंह, एडिशनल एसपी, एसओजी।





SOURCE:DB

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