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व्हाट्सएप पर बात करना हुआ बंद, सरकार ने लगाया पूर्ण प्रतिबंध

चीन ने अपने यहां व्‍हाट्सएप पर पहले इमेज, वीडियो, वॉइस चैट और इसे पूर्ण रूप से प्रतिबंध कर दिया है. फेसबुक की मालिकाना हक वाली लोकप्रिय मैसेजिंग सर्विस को पूर्ण रूप से प्रतिबंध कर दिया है. जानकारी के मुताबिक ओपन ऑब्जर्वेटरी ऑफ नेटवर्क इंटरफेरेंस के अनुसार चीन के इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने 23 सितंबर से व्हाट्सप की सेवा बंद करनी शुरू कर दी थी.
चीन में कुछ महीनों से व्हाट्सएप सेवा में कुछ समस्या भी आ रही थीं. हालांकि व्हाट्सएप ने इस घटना पर किसी तरह का कोई आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया. फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और गूगल जैसी सेवाएं चीन में पहले ही प्रतिबंधित हैं. कुछ लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के जरिये इन सेवाओं का इस्तेमाल आज भी करते हैं.

वरिष्ठ अंतरराष्‍ट्रीय रक्षा अनुसंधान विश्लेषक टिमोथी हीथ के अनुसार चीन की सरकार को यह पसंद नहीं है कि व्हाट्सएप में मजबूत एनक्रिप्‍शन का इस्तेमाल होता है. हीथ ने सीएनएन को जानकारी देते हुए बताया कि चीन की सरकार इंटरनेट संचार पर निगरानी रखना चाहती है और इसलिए वह लोगों को उस तरह की टेक्‍नोलॉजी भी प्रदान करा रही है. जिसकी सहायता से सरकार आसानी से नजर रख सकती है. सरकार को इसमें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी.
2009 में फेसबुक पर चीन ने प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद 2014 में इंस्‍टाग्राम को भी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था. फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग ने कई चीनी राजनीतिज्ञों के साथ बैठक की थी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी के प्रोपेगंडा का अध्‍ययन किया था इसके बावजूद चीन ने यह कदम उठाया गया है. चीनी ऑनलाइन मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए फेसबुक ने हाल ही में एक नया एप लॉन्‍च किया है जो इसके नाम से नहीं है.

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42 ऐसे मोबाइल एप हैं जो चीन के लिए जासूसी कर रहे हैं

चीन ने भारत से डोकलाम विवाद में मुंह की खाने के बाद अब साइबर वॉर छेड़ रखा है। चीन अब इंडियन आर्मी के खुफिया राज जानने के लिए कई तरह के स्मार्टफोन्स और एप्स की मदद ले रहा है। इसके चलते रक्षा मंत्रालय ने भी सभी फील्ड कमांडरों, सैन्य अधिकारियों व जवानों को अपने स्मार्टफोन्स से लगभग 42 एप्स को तुरंत रिमूव करने के निर्देश दिए हैं। 

आपको बता दें कि चीन ऐसा सिर्फ भारतीय सेना ही नहीं बल्कि आम यूजर्स के लिए साइबर सुरक्षा से संबंधित खतरा पैदा कर सकता है। बताया गया है कि चीन के सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स ने कई एंड्रॉयड और आईओएस एप्स तैयार किए हैं जो यूजर्स का डाटा व अन्य जानकारियां चुराते हैं।


42 एप्स चुरा रहे डाटा


सैन्य प्रशासन ने अपने निर्देश में ऐसे 42 एप्स की के बारे में बताया है जो सेना समेत सभी यूजर्स की पर्सनल डिटेल चुरा रहे हैं। ऐसे में यदि आप आपका जानकार अथवा अधिकारी या जवान इन एप्स को यूज कर रहे हैं तो उन्हें तुरंत अनइंस्टाल करने के लिए कहें। इसके साथ ही स्मार्टफोन को भी फॉर्मेट करें। 



यदि कोई व्यक्ति इन एप्स का यूज पहले से करता आ रहा है तो फोन फॉर्मेट करना पड़ेगा। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जवानों व अधिकारियों के स्मार्ट फोन्स में कुछ एप्स विशेष को अनइंस्टाल किए जाने की एडवाईजरी की पुष्टि करते हुए कहा कि जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

ये एप्स चुरा रहे डेटा


रिपोर्ट के मुताबिक ब्यूटीप्लस, न्यूजडॉग, वाईवा वीडियो, पैरेलल स्पेस, एपीयूएस ब्राऊजर, प्रफेक्ट कार्प, वायरस क्लीनर-हाय सिक्योरिटी लैप, सीएम ब्राऊजर, डीयू रिकॉर्डर, वॉल्ट हाईड-एनक्यू मोबाईल सिक्योरिटी, यूकैम मेकअप, कैच क्लीनर डीयू एप्स स्टोर, डीयू बैटरी सेवर, डीयू क्लीनर, डीयू प्राईवेसी, डीयू ब्राऊजर, बेडू ट्रांसलेट, बेडू मैप, वंडर कैमरा, क्यूक्यू इंटरनेशनल, क्यूक्यू म्यूजिक, क्यूक्यू मेल, क्यूक्यू प्लेयर, क्यूक्यू न्यूजफीड, डब्लयूईसवाईएनसी, क्यूक्यू सिक्योरिटी सेंटर, सेल्फी सिटी, मेल मास्टर और उला लांचर ऐसे एप्स हैं जो सेनिकों और आम यूजर्स की पर्सनल डिटेल चुरा रहे हैं।

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बीजिंग। चीनी इन्टरनेट कंपनी टेंसेंट ने मार्किट वैल्यू के हिसाब से सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक को पीछे छोड़ दिया है। इसी के साथ टेंसेंट अब विश्व की पांचवी सबसे बड़ी कंपनी बन गयी है। टेंसेंट से बड़ी कंपनियां अल्फाबेट (गूगल), एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न हैं।
जाहिर है कल ही टेंसेंट की कुल मार्किट वैल्यू 500 बिलियन डॉलर (30 लाख करोड़ रूपए) के पार पहुंची थी। इसके बाद आज टेंसेंट ने फेसबुक को पछाड़ दिया है।
इस खबर के बाद टेंसेंट के शेयर बड़े स्तर में उछाले। होन्ग कोंग के शेयर बाजार में टेंसेंट कंपनी की कुल वैल्यू 4.17 ट्रिलियन होन्ग कोंग डॉलर (535.5 अमेरिकी डॉलर) पहुँच गयी है। इस समय टेंसेंट एशिया की सबसे बड़ी कंपनी है।
इससे पहले सोमवार को टेंसेंट के मार्किट वैल्यू के हिसाब से अलीबाबा को पछाड़ दिया था। अब टेंसेंट के लिए अगली चुनौती अमेज़न होगी। अमेज़न की कुल वैल्यू 542 बिलियन डॉलर है, जो टेंसेंट से बहुत ज्यादा नहीं है।
टेंसेंट कंपनी के विकास दर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सिर्फ 13 सालों में कंपनी का शेयर 11000 फीसदी बढ़ गया है। 2004 में कंपनी होन्ग-कोंग के शेयर बाजार पर सिर्फ 3.70 होन्ग-कोंग डॉलर में लिस्ट हुई थी।
टेंसेंट कंपनी चीन की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास चीन की सबसे बड़ी सोशल वेबसाइट वीचैट है, जिसके 1 अरब से ज्यादा ग्राहक हैं। इसके अलावा टेंसेंट गेम, कृत्रिम बुद्धिमता, विज्ञान आदि कई क्षेत्रों से जुडी है।
टेंसेंट के इस विकास की बदौलत कंपनी के संस्थापक की कुल संपत्ति में भी काफी बढौतरी हुई है। हालिया ख़बरों की मानें तो इनकी कुल संपत्ति गूगल के संस्थापक से भी ज्यादा हो गयी है।
इसके संस्थापक मा हुआटेंग की कुल संपत्ति 48.3 बिलियन डॉलर पहुँच गयी है। इसी के साथ वे विश्व के 9 वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
अब कंपनी के संस्थापक कंपनी को अन्य देशों तक भी पहुँचाना चाहते हैं। इसके लिए कंपनी ने मलेशिया को सबसे पहले चुना है। मलेशिया के बाद सिंगापुर आदि देशों में भी टेंसेंट काम बढ़ा सकती है।

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नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच पिछले दो महीनों से तनाव चल रहा है. चीन युद्ध की धमकियां तो देता रहा है लेकिन अभी तक भारत का कुछ बिगाड़ नहीं पाया था. हालांकि अब एक ऐसी सनसनीखेज और डराने वाली खबर सामने आयी है, जिस देख भारत सरकार तक के कान खड़े हो गए हैं. खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गयी हैं. देश के लाखों लोगों की सुरक्षा दांव पर लग चुकी है.
आपकी जानकारियां चुरा रहा है चीन !
दरअसल सस्ते के चक्कर में देश में बिक रहे लाखों चाइनीज स्मार्टफोन के लेकर खुफिया अलर्ट आया है, जिसने खतरे की घंटी बजा दी है. ऐसी जानकारी सामने आई है कि चीनी कंपनियों के फोन ग्राहकों के पर्सनल डाटा को चीन की एजेंसियों तक पहुंचा रहे हैं. इसका मतलब है कि यदि आप चाइनीज फोन इस्तमाल करते हैं तो हो सकता है कि आपका फोन आपकी बैंक डिटेल से लेकर आपकी बेहद निजी फोटोज तक चोरी-चुपके चीनी एजेंसियों तक भेज रहा हो.
अलर्ट इतना गंभीर है कि इसके मिलते ही आनन्-फानन में केंद्रीय टेलीकॉम और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक हाईलेवल बैठक बुलाई, जिसमें फैसला लिया गया कि भारत में व्यापार कर रही सभी मोबाइल कंपनियों को अपने फोन की सिक्योरिटी की जानकारी भारत सरकार को उपलब्ध करवानी होगी. सरकार द्वारा इनकी कड़ी जांच की जायेगी.

गंभीर खतरे का मिला है अलर्ट !
कुल 21 फोन कंपनियों को सरकार ने नोटिस भिजवाए हैं. खुफिया अलर्ट के मुताबिक़ चीन की कुछ कंपनियों के फोन ग्राहकों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, मैसेज लोकेशन और ऐसी तमाम जरूरी और निजी जानकारियां चीन भेज रहे हैं. आजकल ज्यादातर ग्राहक अपना मोबाईल नंबर अपने बैंक अकाउंट के साथ भी लिंक रखते हैं. कई लोग तो फोन में बैंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी रखते हैं.

ऐसे में इसे एक काफी बड़ा ख़तरा बताया जा रहा है. सुरक्षा मानक पूरा न करने के चलते चीन के अलावा कई अन्य देशों की मोबाईल कंपनियों को भी नोटिस भेजे गए हैं. इसके अलावा कुछ भारतीय कंपनियों जैसे माइक्रोमैक्स, लावा और कार्बन इत्यादि को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है. हालांकि खुफिया एजेंसियों के मुताबिक़ सबसे ज्यादा ख़तरा चीनी फोन कंपनियों से ही है.
भारतीय सेना अधिकारियों ने चीनी फोन रखना किया बंद !
इससे पहले चीनी मोबाइल कंपनी श्याओमी के बारे में भी खबर आयी थी कि ये फोन ग्राहकों के पर्सनल डेटा किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को भेज रहे हैं. अलर्ट इतना गंभीर था कि भारतीय सेना ने अपने अफसरों के लिए एडवाइजरी जारी करके श्याओमी के फोन न रखने की सलाह दी थी. लेकिन ऐसे संदिग्ध फोन की लिस्ट काफी लंबी है.

जिन कंपनियों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें श्याओमी, वीवो, ओप्पो और जियोनी जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं. इसके अलावा आईफोन और सैमसंग से भी सिक्योरिटी डिटेल्स मांगी गई हैं. मोबाईल कंपनियों से उनके फोन में इस्तमाल किये जा रहे ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र और पहले से लोडेड ऐप्स के बारे में पूछा गया है.
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक़ भारी संख्या में लोगों की निजी जानकारियां चीन की एजेंसियां पहले ही चोरी कर चुकी हैं. सरकारी अधिकारियों, भारतीय सेना व् सुरक्षा से जुड़ी अन्य एजेंसियों के लोगों के हाथ में ये फोन किसी खतरे से कम नहीं हैं. क्योंकि इनके जरिये देश की खुफिया बातें आसानी से चीन तक पहुंच सकती हैं.

केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के देशों में चीनी फोन को शक की नज़रों से देखा जाता है. अमेरिका, जापान और कई यूरोपीय देशों में लोग इन्हे खरीदने से बचते हैं. लेकिन भारत में ज्यादा फीचर्स और कम दाम के लालच में लोग इन्हें खरीद लेते हैं. कौन सा स्मार्टफोन किस देश में बनता है, ये जानने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं.

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Image result for चीनी अखबार की धमकी

डोकलाम पर चीन-भारत के बीच गतिरोध अपने चरम पर है. भारत जहां युद्ध को स्थायी समाधान न बताकर शांति से समस्या के हल की वकालत कर रहा है, वहीं चीन की धमकियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. इस बीच चीन के एक प्रमुख अखबार में संपादकीय लिखा गया है, जिसमें भारत को वक्त रहते हालात सुधारने की नसीहत दी गई है.

चाइना डेली अखबार के संपादकीय में लिखा गया है कि चीन और भारत के बीच युद्ध का काउंटडाउन शुरू हो गया है. इसके आगे लिखा गया है कि भारत को अब जल्द इस दिशा में कोई कदम उठा लेना चाहिए, क्योंकि शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाएं खत्म होती जा रही हैं.

भारत सेना हटाकर करे समाधान

चीन के सरकारी मीडिया और सरकार के साथ सुर मिलाते हुए संपादकीय में भी भारत को डोकलाम से अपनी सेना हटाने की हिदायत दी गई है. इसमें लिखा गया है कि डोकलाम समस्या का समाधान दिल्ली के हाथों में है और डोकलाम से बिना शर्त जवानों को हटाकर हालात सामान्य किए जा सकते हैं.

चीन की धमकी

चीन ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है. चीन ने कहा है कि क्या होगा अगर हम उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाएंगे. डोकलाम मुद्दे पर चीन की ओर से इस प्रकार के लगातार बयान आ रहे हैं, इससे पहले मंगलवार को भी कहा गया था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1962 वाली गलती दोहरा रहे हैं.

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने वीडियो जारी कर चेतावनी दी थी कि अगर भारत अपने सैनिक नहीं हटाता तो युद्ध होगा. वीडियो में ये भी कहा गया था कि भारत खुद को विपरीत हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं कर रहा बल्कि देश की जनता को सब कुछ ठीक होने का दिलासा दे रहा है.

नेपाल ने मुंह मोड़ा

इस मसले पर नेपाल के उप प्रधानमंत्री कृष्ण बहादुर महारा ने कहा है कि वह सिक्किम में भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध में किसी का पक्ष नहीं लेगा. कृष्ण बहादुर महारा नेपाल के विदेश मंत्री का भी पदभार भी संभाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि नेपाल चाहता है कि भारत और चीन डोकलाम मुद्दे के हल के लिए शांतिपूर्ण राजनयिक माध्यमों का इस्तेमाल करें.

चीन और भूटान के बीच विवादित क्षेत्र है डोकलाम

चीन और भूटान के बीच डोकलाम एक विवादित क्षेत्र है. भारत और भूटान इसे भूटानी क्षेत्र मानते हैं. डोकलाम में 16 जून को चीनी सेना द्वारा सड़क निर्माण को लेकर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध शुरू हुआ था. डोकलाम पर स्वामित्व पर कोई फैसला न होने का हवाला देते हुए भारतीय सैनिकों ने चीन के सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया था. उन्होंने कहा कि भारत के लिए सैन्य अधिकारियों को चीनी क्षेत्र में भेजना अवैध है. फिर चाहे वह भूटान की सुरक्षा चिंताओं या संरक्षण के बहाने ही क्यों न हो. भारत ने अपनी कार्रवाई के संबंध में कोई कानूनी आधार प्रदान नहीं किया है.'



टारगेट पूरा नहीं होने पर चीनी की एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को ऐसी सजा दी, जिसे जानकर लोग हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें ऑफिस कर्मी के ऊपर जुल्मी बॉस का कहर दिखाया जा रहा है।

दरअसल, इस वीडियो में कंपनी के दो कर्मी टॉयलेट के फ्लश से निकलने वाले पानी को ग्लास में भरकर पी रहे हैं। उन्हें यह सजा उनके बॉस ने इसलिए दी क्योंकि वे अपना टारगेट पूरा करने से चूक गए। दोनों ने अपने गले में कंपनी की आईडी कार्ड भी पहन रखी है। ऐसा करने के बाद उन दोनों को ही डायरिया हो गया है और वह इस समय गंभीर रूप से बीमार हैं।

उन्हें खाना खाने में भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ कंपनी इन आरोपो से साफ इंकार कर रही है। कंपनी का कहना है कि ये कर्मी कंपनी को बदनाम करने के लिए झूठ बोल रहे हैं। फिलहाल मामला पुलिस के पास पहुंच गया है और वह इसकी जांच कर रही हैं।
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