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आज महाअष्टमी है. नवरात्रि के नौ दिनों में इन दिन का सबसे ज्यादा महत्व है. महाअष्टमी पर देवी दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा की जाती है. इनकी आराधना से कठिन से कठिन काम भी संभव हो जाते हैं, सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है और भक्त की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.




देवी महागौरी की कथा
कथा है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तप किया था. इससे उनका शरीर काला पड़ गया था. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव इन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करते हैं और इनके शरीर को गंगाजल से धोया जाता है. इससे वे विद्युत के समान कांतिमान हो जाती हैं. वे गौरवर्ण हैं इसलिए उन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है.



महागौरी का स्वरूप

महाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा के चार हाथों में से दो हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में होते हैं और दो हाथों में डमरू और त्रिशूल रहता है. महागौरी सफेद या हरा वस्त्र धारण करती हैं. इस दिन देवी दुर्गा के अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की जाती है. शस्त्रों के प्रदर्शन के कारण इस दिन को वीराष्टमी भी कहा जाता है. अष्टमी पर लाल फूल, लाल चंदन, दिया और धूप जैसी चीजों से मां दुर्गा का पूजन करते हैं. दुर्गा सप्तशती के पाठ का आज विशेष महत्व है.

आराधना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमस्तस्यै मनो नम:.

कन्या पूजन का फल 
अष्टमी के दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन 10 साल के कम उम्र की  कन्याओं के पूजन और उन्हें भोजन कराने से शुभ फल मिलता है. ये कन्याएं मां दुर्गा का प्रतिनिधि मानी जाती हैं. आमतौर पर कन्याभोज में नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है लेकिन 5, 7 और 11 की संख्या भी शुभ मानी जाती है. घर बुलाकर पहले उनके पैर पूजे जाते हैं, फिर उन्हें भोजन कराकर पसंदीदा तोहफे दिए जाते हैं और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है.

माता को अर्पण
मंदिरों में इस दिन महाअष्टमी का हवन होता है. इसमें भक्त बड़ी श्रद्धा से शामिल होते हैं क्योंकि मान्यता है कि इस हवन से पुण्यलाभ होता है. महिलाएं देवी मां को लाल चुनरी, लाल-हरी चूड़ियां और सिंदूर अर्पित करती और अपने सुख-सौभाग्य के लिए प्रार्थना करती हैं. पौराणिक विश्वास के अनुसार देवी के इस स्वरूप की सच्चे मन से पूजा करें तो सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

आज नवरात्र का सातवां दिन है। देवीभाग्वत पुराण के अनुसार इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है। इनकी पूजा करने वालों को इस मंत्र से ध्यान करना चाहिए। एकवेणी जपाकर्ण, पूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी, तैलाभ्यक्तशरीरिणी। वामपादोल्लसल्लोह, लताकंटकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा, कालरात्रिभयंकरी।।
नवरात्री विशेष: सातवें दिन इस विधि से करें कालरात्रि देवी की पूजा

यानी एक वेणी (बालों की चोटी) वाली, जपाकुसुम (अड़हुल) के फूल की तरह लाल कर्ण वाली, उपासक की कामनाओं को पूर्ण करने वाली, गर्दभ पर सवारी करने वाली, लंबे होठों वाली, कर्णिका के फूलों की भांति कानों से युक्त, तैल से युक्त शरीर वाली, अपने बाएं पैर में चमकने वाली लौह लता धारण करने वाली, कांटों की तरह आभूषण पहनने वाली, बड़े ध्वज वाली और भयंकर लगने वाली कालरात्रि मां हमारी रक्षा करें।
कालिख के समान स्वरूप के कारण ही इनका नाम कालरात्रि है। इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति चमकती है। इन्हें तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाला बताया गया है।
इनके तीन नेत्र हैं और चार हाथ हैं जिनमें एक में खड्ग अर्थात् तलवार है तो दूसरे में लौह अस्त्र है, तीसरे हाथ में अभयमुद्रा है और चौथे हाथ में वरमुद्रा है। इनका वाहन गर्दभ अर्थात् गधा है।
 कालरात्रि होने के कारण ऐसा विश्वास है कि ये अपने उपासकों को काल से बचाती हैं अर्थात उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती। इन्हें सभी सिद्धियों की भी देवी कहा जाता है, इसीलिये सभी तंत्र मंत्र के उपासक इस दिन इनकी विशेष रूप से पूजा करते हैं।
इनके नाम के उच्चारण मात्र से ही भूत, प्रेत, राक्षस, दानव और सभी पैशाचिक शक्तियां भाग जाती हैं। माना जाता है कि इस दिन इनकी पूजा करने वाले साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है। इनकी पूजा में गुड़ के भोग का विशेष महत्व है। अड़हुल और गुड़ के अर्पण से माता होती हैं प्रसन्न, करती हैं मनोकामना पूरी।

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की साधना की जाती है. मां चंद्रघंटा का रौद्र रूप है. जब बच्चे को कोई बाहर वाला पीट देता है तो मां रौद्र रूप में आती है.

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नवरात्रा: तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की आराधना, करेंगी मुसीबतों में आपकी रक्षा!

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की साधना की जाती है. मां चंद्रघंटा का रौद्र रूप है. जब बच्चे को कोई बाहर वाला पीट देता है तो मां रौद्र रूप में आती है. उसी प्रकार जब कोई बच्चा मां चंद्रघंटा को मुसीबत में पुकारता है तो मां चंद्रघंटा बच्चे की सुरक्षा के लिए रौद्र रूप धारण कर लेती हैं. मां चंद्रघंटा असुरों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ती. अगर आप परेशान हैं तो मां चंद्रघंटा की आराधना करें.
मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान लाल या पीला वस्त्र धारण करें.
पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल करें-    
  • साबुत लोंग का जोड़ा
  • सुपारी
  • पान
  • दूध, दही या दूध दही से बनी कोई चीज जो घर में बनाई गई हो उसका सेवन माता को कराएं और स्वयं भी करें.
  • शुद्ध रोली और कुमकुम
  • मां को आल्ता लगाएं ओर घर की स्त्रियां भी आल्ता लगाएं.
  • अक्षत
  • पंच मेवा
  • संभव हो सके तो अखंड ज्योति जलाएं. दीपक मिट्टी और पीतल का हो सकता है. दीपक मां की प्रतिमा के बांईं और रहेगा.
  • रोजाना पंच दीपक जलाएं और संभव हो सके तो आटे का दीपक जलाएं.
अक्षत करें दान-
नवरात्र के तीसरे दिन अक्षत का खासतौर पर दान किया जाता है. यानि 8 साल से छोटी कन्याओं को नवरात्र के तीसरे दिन चावल का दान जरूर करें.
मन को शांत करने के लिए सबसे सरल मंत्र-
जब मन अशांत होता है तो संभव है कि आपसे कई गलतियां हो जाएं. अशांत से सफलता भी दूर चली जाती है. ऐसे में जब भी मन अशांत हो या फिर आप असफल हो मंत्र का जाप करें.

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके |

शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||

नोट: ये एक्सपर्ट के दावे पर हैं. दैनिक खबरे इसकी पुष्टि नहीं करता. 

नवरात्रि में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. आइए जानें, कैसे प्रसन्न करें मां ब्रह्मचारिणी को...


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नवरात्रि: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की ऐसे करें पूजा आराचना


शारदीय नवरात्र शुरू हो चुके हैं. हम आपको बता रहे हैं नवरात्रि‍ किस तरह पूजा-अर्चना कर आप मां दुर्गा को खुश कर सकते हैं. नवरात्रि में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. आइए जानें, कैसे प्रसन्न करें मां ब्रह्मचारिणी को.

कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी को पीला रंग अत्यधिक पंसद होता है. इसलिए मां की पूजा सफेद या पीला वस्त्र पहन कर करें. कोशिश करें की माता को भी पीले वस्त्र पहनाएं और आप जिस आसन पर पूजा कर रहें हो वो भी पीला ही हो.
पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल करें-    
  • साबुत लोंग का जोड़ा
  • सुपारी
  • पान
  • दूध, दही या दूध दही से बनी कोई चीज जो घर में बनाई गई हो उसका सेवन माता को कराएं और स्वयं भी करें.
  • शुद्ध रोली और कुमकुम
  • मां को आल्ता लगाएं ओर घर की स्त्रियां भी आल्ता लगाएं.
  • अक्षत
  • पंच मेवा
  • संभव हो सके तो अखंड ज्योति जलाएं. दीपक मिट्टी और पीतल का हो सकता है. दीपक मां की प्रतिमा के बांईं और रहेगा.
  • रोजाना पंच दीपक जलाएं और संभव हो सके तो आटे का दीपक जलाएं.
कैसे करें पूजा-
मां को प्रसन्ना करने के लिए इस मंत्र का जान करें-

‘ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।’

11 बार इस का जाप करें. इसके बाद मां का रोली से तिलक करें. मां को पान और लोंग जरूर अर्पित करें. यदि आप यज्ञ कर सकते हैं तो कर लें. यह आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है. यज्ञ में ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै वा दुर्गे दुर्गे रक्षिणी स्वाहा’ का जाप करते हुए 5 या 11 बार आहूति दें. लोंग और पान को मां के मुंह से छुआकर आहूति में डालें और उसके बाद प्रज्ज्वलित करें.

नवरात्रों से पहले रेनो और होंडा ने घटाए 1.6 लाख रुपये तक अपनी कारों के दाम

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नई दिल्ली (जेएनएन)। त्यौहारी सीजन में नई कार खरीदने का मन बना रहे हैं तो कई कार कंपनियां अलग-अलग तरीके के डिस्काउंट पेश करने जा रही हैं। ऐसे में फ्रांस की कार निर्माता कंपनी रेनो और होंडा ने नवरात्रों पर अपने मॉडल्स की कीमतों में 1.6 लाख रुपये तक की कटौती की है। कंपनी डिस्काउंट की इस पेशकश से अपना स्टॉक क्लियर करने की तैयारी में हैं। रेनो की ओर से डिस्काउंट केरल को छोड़कर पूरे देश भर में लागू है क्योंकि केरल में कंपनी ने ओणम ऑफर की पेशकश पहले ही की हुई है।
डस्टर पर 1.6 लाख रुपये की छूट:
रेनो की ओर से सबसे बड़ा डिस्काउंट कंपनी की लोकप्रिय एसयूवी डस्टर पर 1.6 लाख रुपये का दिया जा रहा है। इसके अलावा डस्टर खरीदने वाले ग्राहकों को 1 रुपये में इंश्योरेंस भी दिया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी ने इस कार पर ग्राहकों के लिए 7.99 फीसद की न्यूनतम ब्याज दर और 7,000 रुपये का कॉर्पोरेट डिस्काउंट की पेशकश की है। यह ऑफर देशभर में लागू है, हालांकि केरल में यह ऑफर लागू नहीं है।
लॉजी पर 1 लाख रुपये का डिस्काउंट:
साल 2016 में निर्मित रेनो लॉजी पर भी कंपनी शानदार डिस्काउंट ऑफर की पेशकश कर रही है। कंपनी ने इस कार पर 1 लाख रुपये के डिस्काउंट की घोषणा की है। इसके साथ ही इस कार के STD और RXE वेरिएंट पर 30 हजार रुपये का कैश डिस्काउंट दे रही है।
स्काला और पल्स पर भी आकर्षक ऑफर्स:
रेनो अपनी हैचबैक पल्स पर 40,000 रुपये तक का कैश डिस्काउंट और 4.49 फीसद का ब्याज दर से फायनेंस स्कीम दे रही है। वहीं, सेडान स्काला पर 90,000 रुपये का कैश और 6,000 रुपये का अतिरिक्त कॉर्पोरेट डिस्काउंट दिया जा रहा है।
क्विड पर मुफ्त सेलिब्रेशन किट:
कंपनी अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली एंट्री लेवल हैचबैक क्विड के 0.8 लीटर वेरिएंट पर मुफ्त में सेलिब्रेशन किट दे रही है। इस किट में पावर विंडो/सीटर कवर, रिवर्स पार्किंग सेंसर, क्रोम ग्रिल, क्रोम टेलगेट, क्रोम फिनिशिंग डोर हैंडल और क्रोम फिनिशिंग वाला गियर शिफ्ट बैजल दिया जा रहा है।
होंडा की कारों पर 1 लाख रुपये तक का डिस्काउंट:
होंडा कार्स इंडिया के डीलरशिप द्वारा भी इस त्यौहारी सीजन में 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का कैश डिस्काउंट दिया जा रहा है। कंपनी यह डिस्काउंट ब्रियो, जैज और BR-V पर ही दे रही है। कंपनी होंडा सिटी और WR-V पर यह डिस्काउंट नहीं दे रही है क्योंकि इन मॉडल्स का फेसलिफ्ट वर्जन इसी साल उतारा गया है। 


शारदीय नवरात्र 2017: कलश स्थापना शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

नवरात्र के पहले दिन मंगल कामना के लिए कलश स्थापना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से पूजन सफल होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष गुरुवार के दिन नवरात्र आरंभ होने के कारण राहुकाल 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा। इस समय कलश स्थापना जिसे घटस्थापना भी कहते हैं नहीं करना चाहिए। पंचांग में इसके लिए जो शुभ मुहूर्त बताया गया है उसका ध्यान रखना चाहिए।

१. नवरात्र कलश स्थापना और पूजन विधि

नवरात्र कलश स्थापना और पूजन विधि कलश स्थापना और पूजन विधिशारदीय नवरात्र इस साल 21 सितंबर गुरुवार से शुरू हो रहा है और 30 सितंबर को नवरात्र का अंतिम दिन है। शास्त्रों के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि व्रत व दुर्गा पूजन किया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा का विधान है।
२. कलश स्थापना और राहुकाल
कलश स्थापना और राहुकाल
नवरात्र के पहले दिन मंगल कामना के लिए कलश स्थापना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से पूजन सफल होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष गुरुवार के दिन नवरात्र आरंभ होने के कारण राहुकाल 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा। इस समय कलश स्थापना जिसे घटस्थापना भी कहते हैं नहीं करना चाहिए। पंचांग में इसके लिए जो शुभ मुहूर्त बताया गया है उसका ध्यान रखना चाहिए।
३. घट स्थापना शुभ मुहूर्त कब से कब तक
घट स्थापना शुभ मुहूर्त कब से कब तक
गुरुवार को सुबह 10.34 बजे तक प्रतिपदा है, इसलिए जो प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 6.30 बजे से 8.19 बजे तक का मुहूर्त शुभ है। इसके बाद मंगलकारी मुहूर्त दोपहर 12.07 बजे से 12.55 बजे तक है जो अभिजीत मुहूर्त है।
४. नवरात्र घट स्थापना विधिनवरात्र घट स्थापना विधि
आचार्य बालकृष्ण मिश्र के अनुसार, प्रतिपदा तिथि सुबह 10.57 बजे तक ही है। लेकिन देवी कार्य में उदया तिथि ग्राह्य है। इसलिए दिनभर घटस्थापना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को रात्रि 11. 23 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र शुभ माना जाता है। अब घट स्थापना की विधि जानिए।
५. घट स्थापना, सबसे पहले करें ये काम
घट स्थापना, सबसे पहले करें ये काम
सबसे पहले ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र से खुद को शुद्ध करलें। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल, और जल लेकर दुर्गा पूजन का संकल्प करें।
६. ये है घट स्थापना की विधि
ये है घट स्थापना की विधि
माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरुण देव का आह्वान करें। कलश में सर्वऔषधी एवं पंचरत्न डालें। कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते कलश में डालें। कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर इसके ऊपर एक दीप जलाएं। कलश में पंचपल्लव डालें इसके ऊपर एक पानी वाला नारियल रखें जिस पर लाल रंग का वस्त्र लपिटा हो। अब कलश के नीचे मिट्टी में जौ के दानें फैला दें। 
इसके बाद देवी का ध्यान करें- 

खडगं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:,
शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम। 
नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम, यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥
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