शारदीय नवरात्र 2017: कलश स्थापना शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

नवरात्र के पहले दिन मंगल कामना के लिए कलश स्थापना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से पूजन सफल होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष गुरुवार के दिन नवरात्र आरंभ होने के कारण राहुकाल 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा। इस समय कलश स्थापना जिसे घटस्थापना भी कहते हैं नहीं करना चाहिए। पंचांग में इसके लिए जो शुभ मुहूर्त बताया गया है उसका ध्यान रखना चाहिए।

१. नवरात्र कलश स्थापना और पूजन विधि

नवरात्र कलश स्थापना और पूजन विधि कलश स्थापना और पूजन विधिशारदीय नवरात्र इस साल 21 सितंबर गुरुवार से शुरू हो रहा है और 30 सितंबर को नवरात्र का अंतिम दिन है। शास्त्रों के अनुसार अश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि व्रत व दुर्गा पूजन किया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा का विधान है।
२. कलश स्थापना और राहुकाल
कलश स्थापना और राहुकाल
नवरात्र के पहले दिन मंगल कामना के लिए कलश स्थापना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से पूजन सफल होता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष गुरुवार के दिन नवरात्र आरंभ होने के कारण राहुकाल 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक रहेगा। इस समय कलश स्थापना जिसे घटस्थापना भी कहते हैं नहीं करना चाहिए। पंचांग में इसके लिए जो शुभ मुहूर्त बताया गया है उसका ध्यान रखना चाहिए।
३. घट स्थापना शुभ मुहूर्त कब से कब तक
घट स्थापना शुभ मुहूर्त कब से कब तक
गुरुवार को सुबह 10.34 बजे तक प्रतिपदा है, इसलिए जो प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना करना चाहते हैं, उनके लिए सुबह 6.30 बजे से 8.19 बजे तक का मुहूर्त शुभ है। इसके बाद मंगलकारी मुहूर्त दोपहर 12.07 बजे से 12.55 बजे तक है जो अभिजीत मुहूर्त है।
४. नवरात्र घट स्थापना विधिनवरात्र घट स्थापना विधि
आचार्य बालकृष्ण मिश्र के अनुसार, प्रतिपदा तिथि सुबह 10.57 बजे तक ही है। लेकिन देवी कार्य में उदया तिथि ग्राह्य है। इसलिए दिनभर घटस्थापना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को रात्रि 11. 23 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र शुभ माना जाता है। अब घट स्थापना की विधि जानिए।
५. घट स्थापना, सबसे पहले करें ये काम
घट स्थापना, सबसे पहले करें ये काम
सबसे पहले ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ मंत्र से खुद को शुद्ध करलें। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल, और जल लेकर दुर्गा पूजन का संकल्प करें।
६. ये है घट स्थापना की विधि
ये है घट स्थापना की विधि
माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरुण देव का आह्वान करें। कलश में सर्वऔषधी एवं पंचरत्न डालें। कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते कलश में डालें। कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर इसके ऊपर एक दीप जलाएं। कलश में पंचपल्लव डालें इसके ऊपर एक पानी वाला नारियल रखें जिस पर लाल रंग का वस्त्र लपिटा हो। अब कलश के नीचे मिट्टी में जौ के दानें फैला दें। 
इसके बाद देवी का ध्यान करें- 

खडगं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:,
शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम। 
नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम, यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥

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