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अंतरिक्ष एक ऐसा विषय है जिसको हर कोई पढ़ना और समझना चाहता है. अंतरिक्ष का माहौल कैसा होता होगा, वहां जाने वाले अंतरिक्ष यात्री कैसे क्या करते होंगे, वहां का वातावरण कैसा होता होगा आदि कई तरह के सवाल हमारे और आपके ज़हन में आती रहते हैं. ऐसा ही एक बड़ा सवाल है कि स्पेस की आवाज़ कैसी होती होगी? तो इस सवाल का जवाब भी NASA हमारे लिए ले आया है.


Source: metro

NASA ने ‘Space Sounds’ एक ऑडियो क्लिप रिलीज़ की है, जो हमारे सोलर सिस्टम में रिकॉर्ड की गई है. ये आवाज़ बिलकुल ऐसी प्रतीत होती है जैसे कि वहां पर कोई बहुत, बहुत, बहुत ज़्यादा गुस्सा है. ऐसा लगता है मानो अंतरिक्ष रूपी राक्षस के पैर के अंगूठे पर कोई भारी चीज़ गिरा दी हो.
लेकिन जब तक आप इन आवाज़ों की गहराई को समझ पाएं, हम आपको बता देते हैं कि ये आवाज़ें हैलोवीन से पहले रिलीज़ की गई हैं. इन ध्वनि तरंगों को रेडियो उत्सर्जन को ध्वनि में परिवर्तित किया गया है. इसीलिए जब ये डरावनी आवाज़ें आती हैं, वो पारंपरिक अर्थों में ध्वनि नहीं होती हैं, बल्कि ‘Roaring’ Planets से निकलने वाली रेडियो वेव्ज़ का ऑडियो रिप्रज़ेंटेशन होता है, जो बहुत ही डरावनी ध्वनि निकालता है और मन में एक डर पैदा करता है.
यहां सुनिए ये आवाज़ें.


NASA के अनुसार, ‘Plasma Waves, ऐसी लगती हैं जैसे मानो समुद्र दहाड़ रहा हो, और ये Rhythmic Cacophony बनाता है. NASA के वैन एलेन प्रोब्सेज़ पर EMFISIS उपकरण के साथ – हम इन आवाज़ों को हर जगह पर सुन सकते हैं. वहीं दूसरी रिकॉर्डिंग में शनि और बृहस्पति जैसे ग्रहों की आवाज़ें शामिल हैं.’
इसके साथ ही NASA ने कहा, ‘शनि ग्रह तीव्र रेडियो उत्सर्जन का एक स्रोत है, जिसकी निगरानी कैसिनी अंतरिक्ष यान द्वारा की गई थी. रेडियो वेव्ज़ का गहरा सम्बन्ध Auroras के पास स्थित ग्रहों के पोल से होता है. ये Auroras धरती की उत्तरी और दक्षिणी लाइट्स के सामान ही होता है.’
Feature Image Source: staticSource: metro

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नई दिल्ली: ‘12 अगस्त को रात नहीं होगी’ इस दावे ने सोशल मीडिया पर हडकंप मचा रखा है. दावा है कि 12 अगस्त को 24 घंटे उजाला रहेगा यानि उस दिन रात में भी दिन जैसा उजाला रहेगा और अंधेरा ही नहीं होगा. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि 96 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने वाला है.
सोशल मीडिया पर किए जा रहे इस दावे की सच्चाई क्या है?
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सोशल मीडिया पर अखबारों का एक टुकड़ा वायरल हो रहा. इन अखबारों में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है कि ”96 साल में पहली बार 12 अगस्त को नहीं होगी रात”. वहीं एक अन्य अखबार जो वाराणसी, गोरखपुर,इलाहाबाद और कानपुर जैसे शहरों में प्रकाशित होता है उसमें भी यही हेडिंग है.
किए जा रहे हैं कई दावे
इतना ही नहीं एक दावे में यह भी कहा जा रहा है कि ‘’दुनिया की सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थान नासा ने कहा है कि ऐसा चमत्कार दुनिया में पहली बार होगा.’’ एक दावे में लोगों को डराया भी जा रहा है कि ‘’इसे नहीं देखेने वाले लोगों को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है.’’
अंतरिक्ष वैज्ञानिक सी बी देवगन ने बताई अहम बातें
हमने ने इस दावे की पड़ताल की. पड़ताल के दौरान अंतरिक्ष वैज्ञानिक सी बी देवगन ने बताया, ‘’12 तारीख को मेट्योर शॉवर होना है जिसे हम उल्कापिंड कहते हैं, जिसे टूटता तारा भी कहते हैं. जिसे देखकर हम मुराद मांगते हैं. नासा टीवी ने ये जानकारी दी है कि ये 12 तारीख को इतने से इतने बजे के बीच मेट्योर शॉवर होगा.’’
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वैज्ञानिक ने बताया, ‘’12 अगस्त खास जरूर है, क्योंकि उस दिन मेट्योर शॉवर यानि उल्का वर्षा होने वाली है लेकिन उल्कावर्षा या मेट्योर शॉवर क्या है, ये समझने के लिए आपको टूटते तारे के बारे में जानना जरूरी है.’’
क्या होता है उल्कावर्षा या मेट्योर शॉवर
सी बी देवगन ने बताया, ‘’पहले जब हमें नहीं मालूम था कि तारा टूटना क्या होता है तो ये मानते थे कि तारा टूट गया है, लेकिन असल में ये अंतरिक्ष में छोटे-छोटे रेत के दाने जैसे होते हैं. जब वो हमारे वातावरण में घुसते हैं तो फ्रिकशन की वजह से गर्म हो जाते हैं और हमें जलते हुए नजर आते हैं. उन्हें हम टूटता तारा कहते हैं वो सिर्फ एक जलता हुआ कण होता है, लेकिन जब एक साथ एक दिशा से कई सारे जलते हुए कण जमीन पर गिरते हैं तो उसे उल्कावर्षा या मेट्योर शॉवर कहते हैं.”
मेट्योर शॉवर का रात या दिन होने से क्या संबंध है? इस संबंध में वैज्ञानिक ने हमें बताया, ‘’मेट्योर शॉवर में करीब 1 घंटे के अंदर 70 से 80 पार्टिकल गिरते हुए देखे जा सकते हैं, जिससे काफी उजाला होगा. जिस समय मेट्योर शॉवर हो रहा होगा उस वक्त भारत में रात के तकरीबन 10.30 बज रहे होंगे. मेट्योर शॉवर भारत से इतनी दूरी पर होगा कि हम इसे नहीं देख पाएंगे. पश्चिमी देशों में मेट्योर शॉवर बिल्कुल साफ नजर आएगा. मेट्योर शॉवर किसी देश में दिखना या ना दिखना पृथ्वी की स्थिति पर निर्भर करता है.’’
उल्कावर्षा भारत में नहीं नजर आने के पीछे और क्या वजहें हो सकती हैं
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‘’मीटिओर शॉवर तब अच्छे से नजर आता है जब आसमान में कोई और चमकीली चीज ना हो. 12 तारीख को चांद आधा होगा और अपनी रोशनी बिखेर रहा होगा. चांद नजर आ रहा होगा तो इनकी रोशनी अच्छे से नजर नहीं आएगी. ये तब अच्छे से नजर आएगा जब आसमान में चांद ना हो यानी ये अगर आमवस्या के दिन होगा तो ज्यादा बढ़िया से नजर आएगा. अगस्त में हमेशा यहां पर बादल होते हैं. मानसून का सीजन होता है तो अगर आप ऐसे जगह पर है जहां मानसून ना होता हो वो वहां अच्छे से देख सकते हैं. 12 अगस्त को रात नहीं होगी ये पूरी तरह से गलत है. हर साल ये झूठी खबर फैलाई जाती है.’’

झूठे हैं सभी दावे

उल्कापात भारत से काफी दूरी पर होने की वजह से नजर नहीं आएगा. इसलिए भारत में रात में भी दिन जैसे उजाले की बात झूठी है. मेट्योर शॉवर लगभग हर महीने होता है लेकिन कुछ ही बार अच्छे से दिखता है इसलिए 96 साल में पहली बार हो रहा है ये बात बिल्कुल गलत है.
मेट्योर शॉवर कई घंटो तक होता है लेकिन सिर्फ 1-2 घंटे जब सबसे चमकीले कण गिरते हैं तभी साफ दिखता है और रोशनी भी पैदा करता है इसलिए 24 घंटे दिन की तरह उजाला होने की बात झूठी है.
नासा ने सिर्फ ये बताया है कि 12 अगस्त को मेट्योर शॉवर होगा और इतने बजे होगा. नासा ने कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया है कि ये चमत्कार दुनिया में पहली बार होगा क्योंकि हर साल अगस्त में मेट्योर शॉवर होता है.
भारत में मेट्योर शॉवर दिखेगा ही नहीं इसलिए नहीं देखने वालों का नुकसान होने की बात भी निराधार है.
हमारी पड़ताल में 12 अगस्त को रात नहीं होने की बात पूरी तरह से झूठी साबित हुई है.



SOURCE:ABP

नासा ने निकाली थीं जॉब, सामने आयी ये दिलचस्प बात

यूं तो दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) में काम करने के लिए न जाने लोगों को कितनी पढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन इस बार एक नौ साल के बच्चे ने यहां नौकरी के लिए आवेदन किया है. दिलचस्प यह है कि महज नौ साल के इस बच्चे ने खुद को ‘गार्जियन ऑफ गैलेक्सी’ बताया है और नासा में नौकरी करने की इच्छा जताई है.

अमेरिका के न्यूजर्सी में रहने वाला जैक डेविस चौथी क्लास में पढ़ता है, लेकिन इसके कांफिडेंस ने नासा के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को भी अचंभित कर दिया है. बच्चे के इस आवेदन का नासा ने बड़े ही शानदार तरीके से जवाब दिया है.


बता दें कि नासा ने एलियन के प्रभाव से दुनिया को बचाने के लिए पोस्ट निकाली थीं. इसमें जैक डेविस ने भी आवेदन किया था. 


चौथी कक्षा के जैक ने नासा को लिखा यह पत्र-


प्रिय नासा,
मेरा नाम जैक डेविस है और मैं प्लैनेटनरी प्रोटेक्शन ऑफिसर की जॉब के लिए आवेदन करना चाहता हूं. मैं अभी नौ साल का हूं लेकिन मुझे लगता है कि मैं इस पद के लिए एकदम फिट रहूंगा. क्योंकि, मेरी बहन कहती है कि मैं भी एक एलियन की तरह ही दिखता हूं और मैंने हर तरह की स्पेस और एलियन की फिल्में देखी हैं जिससे मुझे अंतरिक्ष और इस दुनिया के बारे में काफी जानकारी है.
आपका
जैक डेविस
गार्जियन ऑफ गैलेक्सी
कक्षा-4


खासबात यह है कि नासा को इस बच्चे के पत्र का जवाब देने में पूरा एक दिन लग गया. नासा के ग्रह विज्ञान विभाग के निदेशक जिम ग्रीन ने जैक डेविस को नासा में रूचि रखने के लिए धन्यवाद देते हुए पत्र लिखा.


प्रिय जैक,
'आप 'गार्जियन ऑफ द गैलेक्सी' हैं और आप नासा प्लैनेटरी प्रोटेक्शन ऑफिसर बनना चाहते हैं. ये बहुत अच्छी बात है लेकिन हमें उज्जवल भविष्य वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की खोज है जो हमारी इस काम में मदद कर सकें, इसलिए आप पहले अच्छे से पढ़ाई करें. हमें आशा है कि आप एक दिन नासा का हिस्सा जरुर बनेंगे.'
जेम्स एल. ग्रीन
निदेशक,
ग्रह विज्ञान विभाग, नासा
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