नई दिल्ली। क्रिकेट की दुनिया में 'श्रीमान भरोसेमंद, 'संकटमोचक और 'भारत की दीवार जैसे नामों से जाने जाने वाले भारतीय पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का बल्लेबाजी करने का तरीका उनके स्वाभाव की तरह ही था बेहद शांत और आत्मविश्वास से भरा हुआ। यूं तो द्रविड़ ने अपने 15 साल के लम्बे करियर में बहुत सी ऊचाईयों को छुआ और ढेरों कीर्तिमान अपने नाम किए। लेकिन वर्ल्डकप जीतने का सपना वो कभी पूरा नहीं कर पाए। किसे पता था जो काम ये दिग्गज बतौर खिलाड़ी नहीं कर पाया एक दिन कोच बन के कर दिखाएगा।
नहीं मिली विश्व विजेता टीम में जगह
जी हां भारत ने जब 2007 में पहला विश्व टी20 जीता था तब द्रविड़ उस टीम का हिस्सा नहीं थे। वहीं जिस भारतीय टीम ने 24 साल बाद 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीत कर सचिन का सपना पूरा किया उसमें भी द्रविड़ को नहीं चुना गया और द्रविड़ का वर्ल्डकप जीतने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन शनिवार को उनके करियर की एक अदद विश्वकप ट्राफी जीतने की ये बड़ी कमी दूर हो गई। द्रविड़ अपने सफल-सुनहरे कैरियर में भले ही यह सपना पूरा नहीं कर पाए लेकिन उनके शिष्यों ने अंडर 19 विश्वकप जीतकर यह ट्राफी आज 'गुरूदक्षिणा के रूप में उनकी झोली में डाल दी।
जी हां भारत ने जब 2007 में पहला विश्व टी20 जीता था तब द्रविड़ उस टीम का हिस्सा नहीं थे। वहीं जिस भारतीय टीम ने 24 साल बाद 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीत कर सचिन का सपना पूरा किया उसमें भी द्रविड़ को नहीं चुना गया और द्रविड़ का वर्ल्डकप जीतने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन शनिवार को उनके करियर की एक अदद विश्वकप ट्राफी जीतने की ये बड़ी कमी दूर हो गई। द्रविड़ अपने सफल-सुनहरे कैरियर में भले ही यह सपना पूरा नहीं कर पाए लेकिन उनके शिष्यों ने अंडर 19 विश्वकप जीतकर यह ट्राफी आज 'गुरूदक्षिणा के रूप में उनकी झोली में डाल दी।
हमेशा टीम के लिए खेला
अपने 15 साल लम्बे करियर को बिना किसी फेयरवेल के ऐसे ही अलविदा कहने वाले राहुल द्रविड़ ने हमेशा अपने से पहले टीम को रखा। चाहे टीम के लिए विकेट कीपिंग करना हो या कठिन परिस्थितियों में विकेट बचाना हो द्रविड़ ने टीम द्वारा दिए गए अपने हर किरदार को बखूबी निभाया। द्रविड़ को साल 2015 में भारतीय अंडर 19 टीम का मुख्य कोच चुना गया। जूनियर टीम का कोच बनने के पीछे द्रविड़ का एक ही मकसद था। भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को सही सांचे में ढाला जाए ताकि भारत का भविष्य सुनहरा हो और ऐसा करने में वे सफल रहे। द्रविड़ के कोच बनने के बाद भारत दो बार अंडर 19 विश्व कप का फाइनल खेल चुका है।
अपने 15 साल लम्बे करियर को बिना किसी फेयरवेल के ऐसे ही अलविदा कहने वाले राहुल द्रविड़ ने हमेशा अपने से पहले टीम को रखा। चाहे टीम के लिए विकेट कीपिंग करना हो या कठिन परिस्थितियों में विकेट बचाना हो द्रविड़ ने टीम द्वारा दिए गए अपने हर किरदार को बखूबी निभाया। द्रविड़ को साल 2015 में भारतीय अंडर 19 टीम का मुख्य कोच चुना गया। जूनियर टीम का कोच बनने के पीछे द्रविड़ का एक ही मकसद था। भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी को सही सांचे में ढाला जाए ताकि भारत का भविष्य सुनहरा हो और ऐसा करने में वे सफल रहे। द्रविड़ के कोच बनने के बाद भारत दो बार अंडर 19 विश्व कप का फाइनल खेल चुका है।
मुख्य कोच बनने का मिला था मौका
जब सीनियर भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। ठीक उसी समय टीम इंडिया अंडर-19 वर्ल्ड कप का अपना सफर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही थी। पृथ्वी शॉ के नेतृत्व वाली इस टीम ने टूर्नामेंट में बिना कोई मैच हारे वर्ल्ड कप जीत लिया। सायद इसके पीछे द्रविड़ की कड़ी मेहनत ही थी। द्रविड़ के पास सीनियर टीम का मुख्य कोच बनने का भी मौका था लेकिन उन्होंने उसे ये कह कर ठुकरा दिया की वे अभी जूनियर टीम के साथ काम करना चाहते है।
जब सीनियर भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। ठीक उसी समय टीम इंडिया अंडर-19 वर्ल्ड कप का अपना सफर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही थी। पृथ्वी शॉ के नेतृत्व वाली इस टीम ने टूर्नामेंट में बिना कोई मैच हारे वर्ल्ड कप जीत लिया। सायद इसके पीछे द्रविड़ की कड़ी मेहनत ही थी। द्रविड़ के पास सीनियर टीम का मुख्य कोच बनने का भी मौका था लेकिन उन्होंने उसे ये कह कर ठुकरा दिया की वे अभी जूनियर टीम के साथ काम करना चाहते है।

सहवाग ने कहा
विश्व कप जीतने के बाद पूर्व बिस्फोटक बल्लेबाज सहवाग ने द्रविड़ की तारीफ करते हुए कहा, 'दुनिया में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जिसने 150 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हों और जूनियर टीम के साथ काम करना चाहता हों। द्रविड़ ऐसा करने वाले अकेले खिलाड़ी हैं। आमतौर पर इतना प्रतिष्ठित खिलाड़ी जूनियर टीम के साथ काम करना पसंद नहीं करता, लेकिन द्रविड़ पिछले दो साल से यह काम कर रहे हैं। इसलिए वह प्रशंसा के हकदार हैं।
विश्व कप जीतने के बाद पूर्व बिस्फोटक बल्लेबाज सहवाग ने द्रविड़ की तारीफ करते हुए कहा, 'दुनिया में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जिसने 150 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हों और जूनियर टीम के साथ काम करना चाहता हों। द्रविड़ ऐसा करने वाले अकेले खिलाड़ी हैं। आमतौर पर इतना प्रतिष्ठित खिलाड़ी जूनियर टीम के साथ काम करना पसंद नहीं करता, लेकिन द्रविड़ पिछले दो साल से यह काम कर रहे हैं। इसलिए वह प्रशंसा के हकदार हैं।
राजस्थान रॉयल्स को संभाला
द्रविड़ ने अपने करियर में जिस चीज़ को छुआ है वह सोना बन गई है। जहां आईपीएल में सारे खिलाड़ी महंगी और अच्छी टीमों से खेलना पसंद करते हैं वह द्रविड़ ने राजस्थान रॉयल्स जैसी कमज़ोर टीम का हाथ थामा और उसे पहली बार चैंपियंस लीग के फाइनल तक पहुंचाया। इतना ही नहीं आईपीएल से सन्यास लेने के बाद भी वे राजस्थान रॉयल्स के मार्गदर्शक बने रहे और विश्व क्रिकेट को स्टीव स्मिथ, संजू सेमसन और अजिंक्य रहाणे जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए।
द्रविड़ ने अपने करियर में जिस चीज़ को छुआ है वह सोना बन गई है। जहां आईपीएल में सारे खिलाड़ी महंगी और अच्छी टीमों से खेलना पसंद करते हैं वह द्रविड़ ने राजस्थान रॉयल्स जैसी कमज़ोर टीम का हाथ थामा और उसे पहली बार चैंपियंस लीग के फाइनल तक पहुंचाया। इतना ही नहीं आईपीएल से सन्यास लेने के बाद भी वे राजस्थान रॉयल्स के मार्गदर्शक बने रहे और विश्व क्रिकेट को स्टीव स्मिथ, संजू सेमसन और अजिंक्य रहाणे जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए।
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