विवाह के बाद ही महिलायें अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती है, इससे जुड़ी कुछ रोचक बातें आपको विस्तार से बताते हैं। 

नई दिल्ली: अगर अगर आप किसी भी व्यक्ति से सवाल करेंगे महिला हो या पुरुष की महिलायें अपने मांग में सिंदूर क्यों लगाती है तो इसका जवाब तो एक ही आएगा ये की ये हिन्दू धर्म की रीति रिवाजों में से एक है। सिंदूर के बिना शादी संपन्न नही मानी जाती है और हर मर्द की निशानी होती है महिलाओं के मांग का सिंदूर। लेकिन, क्या आपको पता है सिंदूर से जुड़ी ये रोचक बातें।

भारतीय वैदिक परंपरा यानी खास तौर पर हिंदू समाज में शादी होने के बाद सिंदूर लगाना काफी जरूरी होता है। घर के बुजुर्गों का कहना है कि अगर पत्नी रोज अपने मांग में सिंदूर लगाए तो पति की उम्र भी बढ़ती है। दरसल बड़ा सवाल यह है कि सिंदूर ही क्यों मांग में लगाया जाता है? दरअसल, इसके भी पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है और यह पूरी तरह महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है।
उस स्थान पर जहां हरेक महिलाओं के मांग भरी जाने की परंपरा है वहां पर मस्तिष्क का एक काफी महत्वपूर्ण भी ग्रंथी होती है जिसे हम ब्रह्म रंध्र भी कहते हैं और यह मांग के स्थान पर कपाल के अंत से लेकर सिर के मध्य तक ही होती है। एक प्रकार से सिंदूर इसलिए भी लगाया जाता है क्योंकि इसमें पारा नामक धातु भी काफी मात्रा में पाई जाती है पारा ब्रह्म रन्ध्र के लिए एक बड़ी औषधि का भी काम करता है।
महिलाओं को कई प्रकार के तनाव से भी दूर रखता है और मस्तिष्क को चैतन्य अवस्था में रखता है। सवाल ये भी है कि विवाह के बाद ही सिंदूर क्यों लगाया जाता है विवाह से पहले क्यों नही क्योंकि विवाह के बाद गृहस्थी का दबाव महिलाओं पर आता है तो उसे तनाव और चिंता अनिंद्रा जैसी बीमारियां घेर लेते हैं। पर एकमात्र ऐसी धातु है जो तरल रूप में रहती है यह मस्तिष्क के लिए लाभकारी है इस कारण सिंदूर ही मांग में भरा जाता है।

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