
नई दिल्ली। स्मार्टफोन पर बढ़ने इंटरनेट के यूज को देखते हुए इस साल कंपनियों की ओर से होने वाले डिजिटल ऐडवर्टाइजमेंट पर होने वाला खर्च बढ़ सकता है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) और इंडियन मार्केट रिचर्स ब्यूरो (IMRB) की ज्वाइंट रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल भारत का डिजिटल ऐडवर्टाइजमेंट खर्च 1.5 अरब डॉलर (9700 करोड़ रुपए) के पार हो सकता है। डिजिटल ऐड पर होने वाले खर्च में ज्यादातर हिस्सेदारी ई-कॉमर्स सेक्टर की रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि कस्टमर्स को अपने साथ जोड़ने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां ऐड पर खर्च करना जारी रखेंगी। यह सेगमेंट 33 फीसदी की सालाना ग्रोथ रेट से बढ़ सकता है। मौजूदा समय में देश में होने वाली टोटल ऐड खर्च में करीब 14 फीसदी हिस्सेदारी डिजिटल ऐड खर्च की है।
डिजिटल ऐड खर्च में ई-कॉमर्स आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च में ई-कॉमर्स इंडस्ट्री 1,361 करोड़ रुपए के साथ लिस्ट में टॉप पर है। इसके बाद, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्युरेबल, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) का नंबर आता है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन सेक्टर में पारंपरिक तरीके की तुलना में डिजिटल तरीके के हिसाब से शेयर के तौर पर बीएफएसआई ऑर्गेनाइजेशन ज्यादा खर्च करते हैं। इन ऑर्गेनाइजेशंस की ओर से करीब 40
फीसदी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐडवर्टाइजिंग का खर्च किया जाता है। इसमें बाद, ई-कॉमर्स, टेलिकॉम और ट्रैवल का नंबर आता है।
मिले फंड को यूज करेंगी कंपनियां
ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर ने हम को बताया कि फ्लिपकार्ट, पेटीएम और अमेजन इंडिया को इन्वेस्टर्स की ओर से बड़ी संख्या में फंड मिला है। ऐसे में ई-कॉमर्स कंपनिया अपने फंड का इस्तेमाल कस्टमर्स को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने पर भी किया जाएगा। कंपनियों की ओर से फेस्टिव सीजन के दौरान ऐड कैंपेन पर खर्च किया जाएगा।
वीडियो पर बढ़ रहा है ऐड पर खर्च
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 की शुरुआत से ही वीडियो ऐड्स पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है। इनमोबि की ओर से हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 के पहले क्वार्टर में ब्रांड एडवर्टाइजर्स ने 60 फीसदी ज्यादा वीडियो ऐड्स का यूज किया है। वहीं, मोबाइल वीडियो ऐडवर्टाइजिंग की ग्रोथ बैनर ऐड्स से ज्यादा है।
ऐसे खर्च होता है ऐड पर पैसा
बीते साल टोटल ऐड खर्च में सर्च ऐड की हिस्सेदारी करीब 28 फीसदी थी, इसमें 2,044 करोड़ रुपए खर्च किया गया। वीडियो ऐड्स की हिस्सेदारी करीब 19 फीसदी रही। जिस पर 1,387 करोड़ रुपए का खर्च किया गया। वहीं, मोबाइल और सोशल मीडिया दोनों की हिस्सेदारी लगभग 19 फीसदी रही। इसके अलावा, डिस्प्ले ऐड्स पर 1,168 करोड़ रुपए का खर्च किया गया।
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