जब से दीप्ति के एक्सीडेंट की खबर आई उसके साथ पढ़ने वाले विद्यार्थी उसके स्वस्थ होने की दुआ कर रहे थे

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भरतपुर. क्या दीप्ति को अपनी मौत का अहसास हो गया था। शायद हां, क्योंकि उसने राजस्थान के गोगामेड़ी दर्शन को जाने से पूर्व स्कूल में छुट्टी के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र में कुछ ऐसा ही लिखा है। पत्र में लिखा है कि वह अब स्कूल नहीं आएगी। इस लाइन को पढ़कर क्लास टीचर विवेक पलिया ने भरी क्लास में उसे टोका था।

जब से दीप्ति के एक्सीडेंट की खबर आई उसके साथ पढ़ने वाले विद्यार्थी उसके स्वस्थ होने की दुआ कर रहे थे। पर खुदा को कुछ और मंजूर था।

उसकी सहेली अंजलि चौहान ने बताया कि गोगामेड़ी जाने से पूर्व हमने ऐसे ही यूं ही पूछा था कि कहां जा रही है। बोली, ऊपर। हमने कहा पागल है क्या, तो दीप्ति ने कहा कि सच में, मैं चली जाऊंगी तो सबसे ज्यादा तुम मुझे मिस करोगे, रोओगे याद करोगे। यह कह कर वह खिलखिला उठी थी।

अंजलि ने कहा कि हमें क्या मालूम वो उस समय सच बोल रही थी। गुरुवार को दीप्ति का शव जयपुर से भरतपुर आया।

सहेली रूचि, प्राची, आशी, अंजलि, नेहा, गरिमा, आंक्षी,आकांक्षा अादि ने छलछलाई आंखों के बीच दीप्ति के शव पर फूल चढ़ाए। दीप्ति की अंत्येष्टि अनाहगेट मुक्तिधाम में हुई। मुखाग्नि भाई मयंक ने दी।

शोकसभा कर किया याद

सोनी एकेडमी स्कूल ने दीप्ति की याद में पौधरोपण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। साथ ही गुरुवार को शोकसभा कर श्रद्धांजलि दी।

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निदेशक विकास सोनी ने बताया कि दीप्ति की याद में 16 स्थानों पर पौधरोपण किया जाएगा। वहां बड़े पौधे लगाए जाएंगे और वृक्ष बनने तक उनकी देखरेख की जाएगी।

16 साल की थी, स्कूल में 16 जगह होगा पौधरोपण

कक्षा 10 में 88 प्रतिशत अंक के साथ पास हुई दीप्ति की सामाजिक सोच भी तेजी से परिपक्व हो रही थी।

उसकी खास सहेली अंजलि चौहान ने बताया कि वह अक्सर कहती थी कि लाइफ को फालतू मत बिगाड़ो।

जब भी और जहां भी रहो कुछ ऐसा करो कि लोग आपको याद करें। और उसने मरते दम अंगदान कर चार लोगों को जिंदगी देकर यह कर दिखाया।

दीप्ति सोनी एकेडमी में 12 वीं कामर्स में अध्ययनरत थी और हाल ही में उसने सीपीटी का फार्म भरा था।

12 दिन पहले हुआ था हादसा

हादसा 29 जुलाई को हुआ था। दीप्ति गुप्ता अपने परिजनों के साथ गोगामेड़ी दर्शन को गई थी।

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लौटते समय रींगस के पास दुर्घटना मंे दीप्ति सहित उसके भुआ की लड़की नीतू, ताऊ की लड़की चारू सहित पिता अनिल कुमार, मां प्रीति, ताऊ अनूप गुप्ता, ताई अरुणा, ताऊ की लड़की चारू, कीर्ति आदि के भी चोंट आई थी।

दीप्ति के सिर में गंभीर चोट लगी थी। इसके अलावा नीतू के भी काफी चोट आई थी। दीप्ति के पिता अनिल कुमार मेडिकल शॉप चलाते हैं।

चार लोगों को दे गई जिंदगी

दीप्ति तो दुनिया छोड़ गई लेकिन चार अंगदान करके चार लोगों को नई जिन्दगी दे गई।

इनमें से जयपुर में दो लोगों को किडनी और एक को लिवर लगाया गया है। हार्ट मुंबई के फोर्टिस अस्पताल भेजा गया है। जहां दामिनी के हार्ट लगाया गया।

चारों अंग के प्रत्यारोपण आपरेशन सफल रहे हैं। लिवर ट्रांसप्लांट दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल के डाक्टरों के सहयोग एसएमएस अस्पताल में तथा किडनी ट्रांसप्लांट एसएमएस अस्पताल और महात्मा गांधी अस्पताल में किया गया।

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