बैंगलुरु (दैनिक खबरे): कंप्यूटर पर लगातार ऑनलाइन सक्रिय रहना या फिर मोबाइल फ़ोन पर बहुत देर तक पढ़ना या एक्टिव रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है, ये बात नई नहीं रह गई है। लेकिन भारत में अब जाकर विशेषज्ञ ये कह रहे हैं कि टैबलेट और मोबाइल फ़ोन में इंटरनेट के ज़्यादा इस्तेमाल से लोगों की नींद का पैटर्न प्रभावित हो रहा है।

Image result for इंटरनेट की लत से बर्बाद हो रही जिंदगी

नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहैंस) बेंगलुरु में हुए एक अध्ययन के मुताबिक कंप्यूटर, टैबलेट और मोबाइल फ़ोन पर होने वाली ऑनलाइन एक्टिविटी के चलते लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। निमहैंस के तकनीक के बेहतर इस्तेमाल वाले विभाग सर्विस फॉर हेल्दी यूज ऑफ़ टेक्नॉलॉजी (एसएचयूटी क्लीनिक) के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. मनोज कुमार शर्मा कहते हैं, लोग इसके चलते रात में एक या डेढ़ घंटे देर से सोते हैं। इतना ही नहीं अधूरे चैट को पूरा करने के लिए वे सुबह में भी एक घंटे जल्दी उठते हैं।

इन सबसे नींद का समय कम होता है। इतना ही नहीं लोग रात में भी दो-तीन बार उठकर सोशल मीडिया वाले ऑनलाइन संदेश देखने की कोशिश करते हैं। नींद की गुणवत्ता पर भी असर दिखता है। इस तरह की समस्या हमारे क्लीनिक में आने वाले लोगों में दिखती है।

ये अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ़ आक्यूपेशनल एंड एन्वायरन्मेंटल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन 21 साल से लेकर 64 साल की उम्र तक के 250 लोगों से बातचीत पर आधारित है। इनमें सरकारी विभागों से लेकर, निजी क्षेत्र और आईटी कंपनियों में काम करने वाले लोग शामिल हैं।

इस अध्ययन में एक ख़ास निष्कर्ष की ओर इशारा करते हुए डॉ. शर्मा कहते हैं, कई बार तो लोग नहाते भी नहीं, दांतों को ब्रश भी नहीं करते, कपड़े नहीं बदलते। ऑनलाइन चैटिंग के चलते ये विचित्र पहलू भी देखने को मिला है। जबकि भारतीय परंपरा तो भिन्न रही है, लेकिन हमारे शहरों में ऐसा हो रहा है।

इंटरनेट कनेक्टेड उपकरण ख़तरनाक 


इस अध्ययन के मुताबिक, तीन से पांच प्रतिशत लोग अपने काम, खाना, सफ़ाई, नींद और परिवार के लोगों से बातचीत पर इंटरनेट को तरजीह देते हैं। इस अध्ययन में शामिल 64 फ़ीसदी लोगों ने माना है कि इंटरनेट पर सक्रियता के चलते उनकी उत्पादकता प्रभावित हुई है। तीन प्रतिशत लोगों की सेक्स लाइफ़ भी इससे प्रभावित हुई है। बातचीत के दौरान 28 फ़ीसदी लोग प्राय: मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं जबकि 19 प्रतिशत लोग कुछ बार।


इस अध्ययन से पहले एक अध्ययन वीडियो गेम्स एडिक्शन पर भी आया था, जब ऑनलाइन एक्टिविटी के चलते 15 साल के एक छात्र की जीवनशैली में काफी बदलाव देखने को मिला था। वह लड़का सुबह चार बजे सो पाता और उसके बाद दोपहर एक बजे जगता और जगते ही ऑनलाइन हो जाता। उसकी लोगों से बातचीत तक बंद हो गई थी।


इंटरनेट की लत का इलाज होगा एम्स में 

वीडियो गेम्स वाले अध्ययन में एक 17 साल के लड़के का मामला भी सामने आया था जो कंप्यूटर के सामने 10 से 14 घंटे व्यतीत करता था। वह कंप्यूटर के सामने ही भोजन करता था और उसका व्यवहार काफी रफ़ हो गया था। जब उसके माता-पिता कंप्यूटर बंद करने की बात करते तो वह लड़का घरों के समान को तोड़ने-फ़ोड़ने लग जाता है। 


डॉ. शर्मा ने कहा, इन सब लोगों के नींद के पैटर्न में मुश्किलें देखने को मिलीं। ऐसे में लोगों को कब चिकित्सीय मदद लेनी चाहिए, इस बारे में डॉ. शर्मा की टीम ने क्या करें और क्या ना करें कि एक सूची बनाई है। उनके मुताबिक अगर नीचे के सवालों में चार या उससे ज्यादा के जवाब अगर हां में हैं तो फिर आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। अगर समस्या दिखे तो जीवनशैली और ऑनलाइन एक्टिविटी के बीच संतुलन साधने की ज़रूरत है।


– क्या आपको लगातार ऑनलाइन एक्टिव रहने की इच्छा होती है? 
– जब आप ऑनलाइन होते हैं तो क्या आपका ख़ुद पर नियंत्रण नहीं रहता? 
– क्या आपको ऑनलाइन एक्टिविटी खुद को रिलैक्स करने का तरीका लगती है या फिर निगेटिव मूड से उबरने का तरीका?
 – क्या आपको इसकी लत लग चुकी है? 
– क्या ऑनलाइन होने के चलते आपकी जीवनशैली प्रभावित हो रही है? 

– क्‍या आंखों, गर्दन और शरीर में दर्द हो रहा है?


क्या करें, क्या ना करें? 

– अगर आपको ऑनलाइन 30 मिनट से ज़्यादा काम करना पड़े तो आंखों को झपकाने के लिए ब्रेक लीजिए। हाथ, गर्दन और गले को हिलाइए। 
– ऑनलाइन एक्टिविटी के चलते अपने सोने के समय को टालें नहीं। 
– सोने से आधे घंटे पहले ऑनलाइन एक्टिविटी बंद कर लें। 
– पास में मोबाइल रख कर नहीं सोएं, ना ही उसे वाइब्रेटर मोड पर रखें। 
– दिन की शुरुआत रिलैक्स करने वाली एक्टिविटी से करें। 
– अगर ये रणनीति काम नहीं कर रही हो तो मदद लें। 
– विकल्प के तौर पर आप लोगों से ऑफ़लाइन बातचीत करें और दूसरे आनंददायक काम करें। 


वैसे डॉक्टर शर्मा की योजना अब नेट कनेक्टिविटी का नींद पर असर पर अध्ययन करने की है।




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