विज्ञान चाहे जितना भी प्रगति कर ले लेकिन धरती पर भूत-प्रेत व अंधविश्वास जैसी मान्यतों के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता. मामला जब पुलिस से जुड़ा हुआ हो तो कहानी कुछ ज्यादे ही रोचक हो जाती है.

ये पूरा मामला बलिया के सदर तहसील के नेशनल हाइवे संख्या 31 स्थित हल्दी थाने का है. जहां अंग्रेज़ो के द्वारा बनाई गयी इस बिल्डिंग के आगे थानाध्यक्ष के बैठने के लिए बनाए गोलनुमा कक्ष को आज भी यहां के पुलिस कर्मी अशुभ मानते हैं और इस कक्ष से खौफजदा रहते हैं.
पुलिस कर्मियों मे इस कक्ष को लेकर इतनी दहशत है कि वे इसमे बैठना तो दूर इसके आस-पास भी आने से डरते हैं.
और तो और यहां पर निरीक्षण करने वाले पुलिस के उच्चाधिकारी, मंत्री और विधायक भी आज तक इस कक्ष मे बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाये. मिथ्या को तोड़कर जिस किसी ने भी साहस दिखाया उस पुलिस अधिकारी या मंत्री विधायक का बड़े स्तर पर नुकसान ही नहीं हुया बल्कि उनकी नौकरी व पद पर भी आंच आई.
वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार थाने मे स्थित इस गोलनुमा कक्ष ने पीर बाबा का वास है और बिना उनकी अनुमति व इजाजत के कोई भी इस कक्ष मे बैठ नहीं सकता.
पूर्ववर्त मे यहां पर तैनात कई थानाध्यक्षों ने कक्ष का रंगाई-पुताई व सुंदरीकरण कराकर यहां बैठने के बारे मे अभी प्लान कर ही रहे थे कि उनका या तो यहाँ से तबादला हो गया या फिर वो सस्पेंड हो गये या फिर उनका बड़ा एक्सीडेंट या फिर किसी तरह से उनका अनिष्ट हो गया. तब से आज तक इस कक्ष मे बैठना तो दूर कोई भी पुलिस कर्मी इसके साफ-सफाई के बारे मे भी नहीं सोचता है.
थाने मे तैनात एक वृद्ध चौकीदार के अनुसार थाने मे बहुत साल पहले एक थानाध्यक्ष आए थे जिनको सपने मे कोई बाबा आए और वो थाने के आगे एक गोल कक्ष बनाने का आदेश दिए. फिर थानाध्यक्ष ने तुरन्त ही इस कक्ष का निर्माण करा दिया.
फिर एक दिन वही थानाध्यक्ष इस गोल कक्ष मे बैठकर थाना क्षेत्र मे हुई एक बड़ी वारदात मे पकड़े गए मुल्जिम से पूछ-ताछ करने के बाद आदेश-निर्देश दे रहे थे. तभी उनका बहुत बड़ा नुकसान हुआ और उनका तबादला भी हो गया. तब से आज तक कोई भी पुलिस कर्मी इस कक्ष में बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाये.
वहीं इस बाबत जब भाजपा के क्षेत्रीय विधायक आनन्द स्वरूप शुक्ल से पूछा गया तो उन्होंने जो बयान दिया वो काफी चौकने वाला था. उन्होंने बताया कि भारत वह देश है जहां अंधविश्वासो का भी इस संस्कृति को आगे बढ़ाने मे बहुत बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि गृह-नक्षत्र सभी के खेल चलते है और सब कुछ वैज्ञानिक है. जो गूढ रहस्य के वैज्ञानिक रहस्य है और जिनको हम समझ नहीं पाते है उन्ही को साधारण भाषा मे अंधविश्वास कहा जाता है.
source:news18
ये पूरा मामला बलिया के सदर तहसील के नेशनल हाइवे संख्या 31 स्थित हल्दी थाने का है. जहां अंग्रेज़ो के द्वारा बनाई गयी इस बिल्डिंग के आगे थानाध्यक्ष के बैठने के लिए बनाए गोलनुमा कक्ष को आज भी यहां के पुलिस कर्मी अशुभ मानते हैं और इस कक्ष से खौफजदा रहते हैं.
पुलिस कर्मियों मे इस कक्ष को लेकर इतनी दहशत है कि वे इसमे बैठना तो दूर इसके आस-पास भी आने से डरते हैं.
और तो और यहां पर निरीक्षण करने वाले पुलिस के उच्चाधिकारी, मंत्री और विधायक भी आज तक इस कक्ष मे बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाये. मिथ्या को तोड़कर जिस किसी ने भी साहस दिखाया उस पुलिस अधिकारी या मंत्री विधायक का बड़े स्तर पर नुकसान ही नहीं हुया बल्कि उनकी नौकरी व पद पर भी आंच आई.
वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार थाने मे स्थित इस गोलनुमा कक्ष ने पीर बाबा का वास है और बिना उनकी अनुमति व इजाजत के कोई भी इस कक्ष मे बैठ नहीं सकता.
पूर्ववर्त मे यहां पर तैनात कई थानाध्यक्षों ने कक्ष का रंगाई-पुताई व सुंदरीकरण कराकर यहां बैठने के बारे मे अभी प्लान कर ही रहे थे कि उनका या तो यहाँ से तबादला हो गया या फिर वो सस्पेंड हो गये या फिर उनका बड़ा एक्सीडेंट या फिर किसी तरह से उनका अनिष्ट हो गया. तब से आज तक इस कक्ष मे बैठना तो दूर कोई भी पुलिस कर्मी इसके साफ-सफाई के बारे मे भी नहीं सोचता है.
थाने मे तैनात एक वृद्ध चौकीदार के अनुसार थाने मे बहुत साल पहले एक थानाध्यक्ष आए थे जिनको सपने मे कोई बाबा आए और वो थाने के आगे एक गोल कक्ष बनाने का आदेश दिए. फिर थानाध्यक्ष ने तुरन्त ही इस कक्ष का निर्माण करा दिया.
फिर एक दिन वही थानाध्यक्ष इस गोल कक्ष मे बैठकर थाना क्षेत्र मे हुई एक बड़ी वारदात मे पकड़े गए मुल्जिम से पूछ-ताछ करने के बाद आदेश-निर्देश दे रहे थे. तभी उनका बहुत बड़ा नुकसान हुआ और उनका तबादला भी हो गया. तब से आज तक कोई भी पुलिस कर्मी इस कक्ष में बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाये.
वहीं इस बाबत जब भाजपा के क्षेत्रीय विधायक आनन्द स्वरूप शुक्ल से पूछा गया तो उन्होंने जो बयान दिया वो काफी चौकने वाला था. उन्होंने बताया कि भारत वह देश है जहां अंधविश्वासो का भी इस संस्कृति को आगे बढ़ाने मे बहुत बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि गृह-नक्षत्र सभी के खेल चलते है और सब कुछ वैज्ञानिक है. जो गूढ रहस्य के वैज्ञानिक रहस्य है और जिनको हम समझ नहीं पाते है उन्ही को साधारण भाषा मे अंधविश्वास कहा जाता है.
source:news18
Post a Comment
Post a Comment