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Jaipur: देश के किसान समुदाय में क्रेडिट कार्ड संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी अपनी अनुषंगी एसबीआई कार्डस एंड पेमेंट्स सर्विसेज के जरिए किसानों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का फैसला किया है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना को प्रायोगिक आधार पर गुजरात, राजस्थान व मध्य प्रदेश में कार्यान्वित किया जा रहा है। इसकी सफलता के आधार पर ही इसे देश भर में कार्यान्वित किया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के विपरीत एसबीआई कार्ड में किसानों को 40 दिन का कर्ज दिया जाएगा और ब्याज दर भी अन्य एसबीआई कार्ड की तरह सामान्य होंगी।
उन्होंने संकहा कि इसमें बड़ा अंतर यह होगा कि बकाया का भुगतान नहीं किए जाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि सामान्य एसबीआई कार्ड की तुलना में काफी कम होगी। किसानों को अपनी ऋण सीमा का 20 प्रतिशत उपभोक्ता उत्पादों पर खर्च करने की अनुमति होगी जबकि बाकी सीमा केवल कृषिगत कच्चा माल खरीदने में किया जाएगा। केसीसी के मामले में किसान द्बारा लिया गया कर्ज तत्काल उसके खाते से कट जाता है जबकि एसबीआई कार्ड के मामले में 40 दिन की ऋण अवधि मिलेगी।

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Jaipur: बैंकों की ब्रांच से होने वाले कामों पर अब मुफ्त सेवाओं के लिए भी शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

20 जनवरी से सभी सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक शाखाओं में दी जाने वाली उन तमाम सेवाओं के लिए शुल्क वसूलने की तैयारी कर रहे हैं जो अब तक मुफ्त हैं।
हालांकि, कुछ सुविधाओं के लिए शुल्क की समीक्षा होगी। इन सुविधाओं में पैसा निकालने, जमा करने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी, पता बदलवाने, नेट बैंकिंग और चेक बुक के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अपने खाते वाली शाखा के अलावा, बैंक की दूसरी शाखा से सेवा लेने के लिए अलग से शुल्क चुकाना होगा। शुल्क के अलावा जीएसटी भी लगेगा। इसके लिए बैंक आपको अलग से चार्ज नहीं करेगा बल्कि जो भी शुल्क होगा वह आपके खाते से काट लिया जाएगा।
बैंक से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नए शुल्कों को लेकर आंतरिक आदेश मिल चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, सभी बैंक आरबीआई के निर्देशों का पालन करते हैं। नियमों के अनुसार संबंधित बैंक का बोर्ड सभी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क का फैसला लेता है। बोर्ड की मंजूरी के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाता है। बैंकों के इस कदम से देशभर के सभी खाताधारक प्रभावित होंगे।

बैंक से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक इस कदम से ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे चेक और डिमांड ड्राफ्ट भी अप्रासंगिक हो जाएंगे। एटीएम और कियॉस्क मशीनों से पासबुक अपडेट और पैसों का लेनदेन भी निशुल्क खत्म किया जा सकता है।

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आम आदमी के लिए 1 अक्टूबर से कई चीजें बदलने वाली हैं | ये सारे बदलाव हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हुए हैं| बैंकिंग और आप दुकान से जो सामान खरीदते हैं, उनसे सबसे ये बदलाव जुड़े हुए हैं| इन बदलाव की जानकारी रखकर आप न सिर्फएक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएंगे, बल्कि आपको भी इसका फायदा होगा| आगे जानिए ऐसे 5 नियम, जो 1 अक्टूबर से बदले गये|
1. सामान की नई MRP
1 जुलाई से GST लागू हो चुका है। सरकार ने व्यापारियों को सुविधा दी थी कि वह 30 सितंबर पर पुराने MRP पर सामान बेच सकते हैं, लेकिन उसके बाद सभी को नए MRP पर ही सामान बेचना होगा। ऐसे में 1 अक्टूबर से सबसे बड़ा बदलाव तो यही होगा कि आपको नए MRP पर सामान मिलेगा। अगर 30 सितंबर के बाद भी व्यापारी पुरानी MRP पर सामान बेचेंगे तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
2. SBI की मिनिमम बैलेंस की सीमा
हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक ने मिनिमम बैलेंस की सीमा में कटौती करके  ग्राहकों को तोहफा दिया था।  शहरों के बैंकों में न्यूनतम बैलेंस की सीमा 5000 रुपए रखना निर्धारित किया था, लेकिन अब बैंक ने इसे घटाकर 3000 रुपए कर दिया।
3.SBI नहीं लेगा इन बैंकों के चेक
30 सितंबर के बाद भारतीय स्टेट बैंक कुछ बैंकों के चेक नहीं लेगा। साथ ही उन बैंकों के IFSC Code भी अमान्य हो जाएंगे। इसे लेकर भारतीय स्टेट बैंक ने अपने पूर्व सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक के ग्राहकों से आवेदन भी किया है कि वह नए चेक के लिए आवेदन कर दें।SBI में स्‍टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्‍टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्‍टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्‍टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और भारतीय महिला बैंक का विलय हो चुका है।
4. टोल टैक्स से बिना लाइन लगाए गुजर सकेंगे
1 अक्टूबर से नेशनल हाइवे पर बने टोल प्लाजा पर उन वाहनों को रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिन पर फास्टैग लगा होगा। सभी टोल प्लाजा पर 1 अक्टूबर से डेडिकेटेड फास्टैग लेन तैयार हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपको देर तक टोल टैक्स देने के लिए लाइन में नहीं लगना होगा। यह फास्टैग गाड़ी के शीशे पर लगेगा, जिसे टोल प्लाजा पर लगा डिवाइस स्कैन कर लेगा। इस फास्टैग को ऑनलाइन भी रिचार्ज करने की सुविधा होगी।
5- IUC चार्ज होगा कम 
1 अक्टूबर से आपकी कॉल रेट भी कम हो सकती हैं। दरअसल, ट्राई ने नियमों में बदलाव करते हुए इंटरकनेक्शन चार्जेस (IUC) चार्ज में 50 फीसदी से भी अधिक की कटौती कर दी है। पहले जो IUC चार्ज 14 पैसे प्रति मिनट था उसे अब 8 पैसे कर दिया गया है। आपको बता दें कि इनकमिंग कॉल के लिए IUC  चार्ज एक कंपनी दूसरी कंपनी को देती है।

नई दिल्लीः ऑनलाइन टिकट यानी आईआरसीटीसी की मदद से टिकट कटा कर भारतीय रेल की सवारी करने वाले मुसाफिरों के लिए ये खबर बेहद ही खास है, क्योंकि आईआरसीटीसी ने आईसीआईसीआई और स्टेट बैंक के सथ करीब 6 बैंकों के कार्ड बैन कर दिया, इसके बाद अब ऐसे कार्ड धारक आईआरसीटीसी की वेबसाइट ऑनलाइन टिकट के लिए भुगतान नहीं कर सकते हैं।
ऑनलाइन टिकट बुक करने वालों को IRCTC ने दिया झटका- SBI और ICICI समेत 6 बैंकों के कार्ड ब्लॉक

मीडिया रिपोर्ट्स में बैंकों के हवाले से कहा जा रहा है कि रेलवे ने ये फैसला इसलिए उठाया है क्योंकि उसके और बैंको के बीच सुविधा शुल्क की साझेदारी को लेकर विवाद चल रहा है। जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी की चाहता है कि पूरा सुविधा शुल्क उसके पास पास ही रहे, जबकि इससे बैंकों को आपत्ति है।
खबरों के अनुसार अगर आप मौजूदा समय में टिकट बुकिंग कराना चाहते हैं तो आप एचडीएफसी, इंडियन ओवरसीज बैंक, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक के कार्ड से भुगतान कर सकते हैं, इसके अलावा अन्य बैकों के कार्ड को फिलहाल बैन कर दिया गया है।
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बता दें कि आनलाइन भुगतान लेने वाले सभी मर्चेंट को एक हिस्सा संबंधित बैंक को देना होता है जिसके कार्ड के जरिए भुगतान किया जा रहा है, लेकिन आईआरसीटीसी ने ऐसा करने से मना करते हुए 6 बैंकों को बुकिंग प्रॉसेस को ब्लॉक कर दिया है। इससे पहले आईआरसीटीसी ने बैंको से सुविधा शुक्ल की आधी राशि बांटने को कहा था।
खबरों के अनुसार इस मसले पर इंडियन बैंक एसोसिएशन और आईआरसीटीसी ने बातचीत कर मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत कोई नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। बता दें कि नोटबंदी के बाद आईआरसीटीसी ने सुविधा शुल्क 20 रुपये कम दिए है।

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SBI:   मिनिमम बैलेंस नही रखने वाले  खाता धारकों से SBI ने वसूले 235 करोड़ रुपये


नई दिल्ली. देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने खातों में तय मासिक औसत जमा राशि नहीं रखने वाले लोगों से 235.06 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है. सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, कुल 388.74 लाख खातों से जुर्माने की भारी-भरकम राशि वसूल की है.
मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एसबीआई को यह फायदा हुआ है. मध्यप्रदेश के नीमच में रहने वाले सामजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने आरटीआई के तहत एसबीआई से सवाल पूछा था कि मिनिमम बैलेंस नहीं रखने वाले खाता धारकों से बैंक ने कितना जुर्माना वसूल किया है.
बैंक ने गौड़ को पांच अगस्त को भेजे जवाब में बताया कि 30 जून 2017 को खत्म हुई तिमाही के दौरान मासिक औसत शेष नहीं रखने के चलते वसूली गई राशि 235.06 करोड़ रुपए है. यह रकम 388.74 लाख खाता धारकों से वसूल की गई है. हालांकि, बैंक ने जवाब में यह नहीं बताया है कि तय मासिक औसत जमा राशि नहीं रखे जाने पर किस श्रेणी के खातों से जुर्माना वसूला गया है.
मगर, गौड़ का मानना है कि इससे बचत खातों में छोटी रकम जमा करने और निकालने वाले गरीब ग्राहक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. उन्होंने कहा कि एसबीआई को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के हितों में इस शुल्क वसूली के नियमों की समीक्षा करनी चाहिए. इस तबके के ज्यादातर ग्राहक अपने खातों में लंबे समय तक बड़ी रकम जमा नहीं रख पाते हैं.
आरटीआई से मिली जानकारी से पता चला है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सेविंग अकाउंट्स में जमा मिनिमम बैलेंस को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए हैं. मगर, केंद्रीय बैंक ने इन खातों में न्यूनतम जमा राशि नहीं रखने पर ग्राहकों से जुर्माने वसूलने को लेकर बैंकों के लिए कुछ शर्तें जरूर रखी हैं.
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