New Delhi : माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।
माना जाता है कि इसी दिन शब्दों की शक्ति मनुष्य की झोली में आई थी। इस दिन बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। इस दिन पितृ तर्पण किया जाता है और कामदेव की पूजा भी की जाती है। आइए जानते हैं इस दिन कौन से काम वर्जित हैं और साथ ही सरस्वती पूजा के पीछे की पौराणिक कहानियां।
इस दिन काले और लाल रंग के वस्त्र बिल्कुल ना धारण करें। बसंत पंचमी के दिन पीले, सफेद या धानी रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। यह प्रकृति का त्योहार है और हरियाली का उत्सव। अत: इस दिन फसल काटने के काम को टाल देना चाहिए। साथ ही घर में भी किसी भी पेड़ की छंटाई भी नहीं करनी चाहिए। हो सके तो इस दिन वृक्षारोपण करें।
सरस्वती पूजा के दिन भूलकर भी किसी के लिए अनाप-शनाप ना बोलें। कहा जाता है कि इस दिन सरस्वती जुबान पर होती हैं। इसलिए अपनी वाणी पर संयम रखें और गुस्सा ना करें। किसी को बुरे बोल ना बोलें। सबके साथ मधुरता का व्यवहार करें। खुद के लिए भी कुछ बुरा या कोसने वाली बातें ना कहें क्योंकि वह सच साबित हो सकता है। आज के दिन शुभ बोले और शुभ सोचें।
इस दिन पितृ तर्पण भी किया जाता है इसलिए घर में भूलकर भी कलह नहीं करनी चाहिए। इससे पितरों को कष्ट होता है। बिना स्नान किए भोजन ना ग्रहण करें। पहले सरस्वती वंदना करें और मां सरस्वती को भोग लगाएं।
बसंत पंचमी के दिन मांसाहार और शराब का सेवन नहीं करें। केवल सात्विक भोजन करें तथा प्रसन्न रहें। आज खीर जरूर बनायें और खाएं व घर को सुगन्धित बनाये रखें।
आज के दिन पुखराज,और मोती धारण करना अतीव लाभकारी होता है। आज के दिन स्फटिक की माला को अभिमंत्रित करके धारण करना भी श्रेष्ठ परिणाम देगा।
सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत् पूजा करनी चाहिए। इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करें। सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं। सरस्वती माता को सिन्दूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है। देवी सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं।
प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदियां अर्पित करनी चाहिए। इस दिन सरस्वती माता को मालपुए और खीर का भी भोग लगाया जाता है। माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्ठी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए। संध्या काल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
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