छठ महापर्व आज से शुरू हो चुका है. पूर्वी भारत में इस त्यौहार की बड़ी मान्यता है. कहते हैं कि छठ पूजा करने से सूर्यदेव सारे कष्ट हर लेते हैं. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत आज नहाय-खाय से है. इसके बाद 25 को खरना, 26 अक्टूबर को शाम का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को सुबह के अर्ध्य के साथ छठ पूजा संपन्न होगी. जानें, छठपर्व का महत्व और कुछ टिप्स उनके लिए जो  किसी वजह से छठ का व्रत नहीं कर पा रहे हैं.

छठ के चार दिन
छठ का पहला दिन यानी कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय है. इस दिन सुबह सूरज उगने से पहले नहाकर घर की साफ-सफाई करते हैं और कुछ मीठा खाते हैं. इस दिन व्रतधारी के घर में प्याज-लहसुन कुछ भी नहीं पकता है. दूसरे दिन को खरना कहा जाता है. इस दिन उपवास किया जाता है. व्रती पूरे दिन पानी भी नहीं पीता है. शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर का प्रसाद बांटा और खाया जाता है. तीसरे दिन का काफी महत्व है. इस दिन उपवास के बाद शाम को डूबते सूरज को अर्ध्य देते हैं. इसे सूर्य षष्ठी भी कहते हैं. चौथा दिन छठ का सबसे महत्वपूर्ण और आखिरी दिन है. इस दिन आधी रात से ही घाट पर व्रतधारी अपने परिवार और मित्रों समेत पहुंच जाते हैं. उगते सूरज को अर्ध्य दिया जाता है और पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है. प्रसाद खाकर ही व्रत खोला जाता है.

व्रत के बिना भी पा सकते हैं फल

दिवाली के छठवें दिन शुरू होने के कारण इसे छठ पूजा कहते हैं. ये दिन सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है जो स्वास्थ्य के देवता हैं. इनकी पूजा से त्वचा रोग दूर होते हैं. संतान सुख मिलता है. सुख-संपन्नता में इजाफा होता है. बहुत से लोग किसी वजह से छठ का व्रत नहीं कर सकते हैं. व्रत किए बिना भी पूजा का फल मिल सकता है. जानें क्या है वे तरीके

*छठ के पूरे चार दिनों तक विधि-विधान से सूर्यदेव की पूजा करें.

*तांबे के लोटे में पानी भरकर सूर्य को अर्ध्य दें. साथ में दीप दिखाएं.

*स्नान के बाद हमेशा पूजा के वक्त साफ और नए कपड़े पहनें.

*व्रतधारी अगर इजाजत दें तो स्नान के बाद उनके साथ प्रसाद की तैयारी कर सकते हैं.

*छठ के लिए कोई मानता ली हुई है तो प्रसाद किसी और के जरिए भी चढ़वा सकते हैं.

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