बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद समस्तीपुर के राणा तपेश्वर सिंह उर्फ़ ललन सिंह को शराब मिलनी बंद हो गई तो उसने नशे के लिए कोबरा सांप पाल लिया और जब उसे नशे की जरुरत महसूस होती तो वह कोबरा से खुद को डसवा लेता था.
घर से अलग एक सुनसान झोपड़ी में उसने जहरीले कोबरा को एक प्लास्टिक के डब्बे में बंद कर रखा था और चोरी छुपे यह काम वह कई महीनों से कर रहा था.
कोबरा सांप को खाने के लिए डिब्बे में ही मेढ़क डाल दिया करता था और जब उसे नशे की जरुरत होती अपनी ऊंगली डब्बे में डालता और कोबरा उसे एक बार डंस लेता. कोबरा के डसने से उसे एक बोतल विदेशी शराब के बराबर नशे की अनुभूति होती और वह दो दिनों तक नशे की हालत में ही रहता था. घर के लोग यह समझते कि कहीं से चोरी छुपे वह शराब खरीद कर पिता है.
6 अगस्त 2017 को फिर उसे नशे की आवश्यकता महसूस हुई तो वह झोपडी में जाकर डिब्बा खोला और उसमे हाथ डाला लेकिन चूंकि दो तीन से मेढ़क नहीं मिलने की वजह से शायद कोबरा सांप गुस्से में था इसलिए उसके अंगूठे को जोड़ से पकड़ लिया और कसकर डंस लिया.
इसके बाद उसे और दिनों की बजाय ज्यादा नशे का एहसास हुआ. उसका कंठ सूखने लगा तो उसने पानी पिया और फिर नहाने चला गया लेकिन उसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी. पहले तो घरवालों ने समझा की ज्यादा शराब पी ली है इसलिए बेहोश हो रहा है लेकिन जब मुंह से झाग आने लगा तो लोगों को शक हुआ और डॉक्टर से दिखाया तो उसे सांप काटने के लक्षण का पता चला.
इलाज करने वाले डॉ जयकांत पासवान
फिर उसे आनन फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने पाया कि इसे किसी जहरीले सांप ने डंस लिया है. चूँकि वह पूरी तरह बेहोश हो चूका था. उसे 12 घंटो तक लगातार 18 वाइल सर्पदंश दवा नश में चढ़ाई गयी,तब जाकर उसके सेहत में सुधार हुआ .
उसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उससे पूछा कि आखिर उसे किस सांप ने काटा था और इसके जबाब में उसने अपनी जो कहानी बताई सबके होश उड़ गए .
35 सालों से था शराब का आदी
राणा तपेश्वर सिंह उर्फ़ ललन सिंह ने बताया कि करीब 35 साल से वह शराब का आदी है लेकिन अचानक शराबबंदी के बाद उसे शराब नहीं मिलता तो असहज होने लगा. कुछ दिन नशे की दवा वेलियम भी ली लेकिन साइड इफेक्ट भी होने लगा. फिर उसने कुछ सुनी सुनाई बातों के मुताबिक एक तरकीब सोची और एक संपेरे से कोबरा सांप खरीद लिया और छुपाकर उसे पाल लिया .
इसी बर्तन में रखता था कोबरा सांप
अस्पताल से घर वापस आने के बाद परिजनों को उसने वह डब्बे में बंद सांप को भी दिखाया. तब लोगों ने उस सांप को मारकर फेंक दिया लेकिन जिसने भी यह कहानी सुनी यह सोचकर उसका देह सिहर उठा की आखिर कोई इंसान नशे के लिए इतने दिनों से किस प्रकार खतरनाक कोबरा के डंसवाता रहा और जिंदा भी रहा.
डॉक्टर भी हैं आश्चर्यचकित
इलाज करने वाले सदर अस्पताल के डॉक्टर जयकांत पासवान भी इस बात से आश्चर्यचकित हैं. उन्होंने भी किताबो में ऐसा पढ़ा जरुर था लेकिन हकीकत में पहली बार उनके सामने इस तरह का केस आया था.
राणा ने शरीर में जितनी जहर की मात्रा फ़ैल चुकी थी किसी साधारण इंसान के लिए बचना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन था ,चूँकि गुस्से में सांप ज्यादा जहर छोड़ता है जिससे इंसान कुछ मिनटों में ही दम तोड़ देता है ,परिजनों को इस बात की राहत है की आखिरकार उसकी जान बच गयी.
राणा तपेश्वर सिंह उर्फ़ ललन सिंह समस्तीपुर जिले के वारिसनगर के सारी गांव के रहने वाले हैं. वो सुखी संपन्न किसान हैं और उनके दो बच्चे बाहर रहकर पढ़ाई करते हैं.
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