नई दिल्ली. 10 साल बाद इन्फोसिस में नंदन नीलेकणी की वापसी हुई। उन्हें नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है। नीलेकणी इन्फोसिस के 5 फाउंडर्स में एक हैं। इस फैसले के बाद चेयरमैन आर. शेषासयी और को-चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने इस्तीफे की पेशकश की। बता दें कि विशाल सिक्का ने भी बीते शुक्रवार को सीईओ पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था। बोर्ड ने कहा था कि कंपनी के फाउंडर एनआर. नारायण मूर्ति के आरोपों के मद्देनजर सिक्का को इस्तीफा देने का फैसला लेना पड़ा। इसके बाद फाउंडर और बोर्ड के बीच आरोपों का दौर शुरू हो गया। नीलेकणी के CEO रहते 5 गुना बढ़ा था प्रॉफिट...
- बुधवार को कई बड़े फंड मैनेजरों और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने इन्फोसिस बोर्ड को लेटर लिखकर नीलेकणी को दोबारा लाने के लिए कहा था। उनका कहना है कि नीलेकणी पर कस्टमर, शेयरहोल्डर और इम्प्लॉइज तीनों को भरोसा है। उनकी वापसी से कंपनी की प्रतिष्ठा लौटेगी।
- नीलेकणी 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के सीईओ थे। उनके पांच साल के टेन्योर में कंपनी का रेवेन्यू पांच गुना और टैक्स बाद मुनाफा 4.7 गुना बढ़ा। उनके आने से पहले 2001-02 में इन्फोसिस का रेवेन्यू 2,604 करोड़ था। यह 2006-07 में 13,149 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान मुनाफा 808 करोड़ से बढ़कर 3,777 करोड़ रु. हो गया। कंपनी में उनके और उनके परिवार की 2.29% इक्विटी होल्डिंग है।
दो आला अफसरों ने की इस्तीफे की पेशकश
- सिक्का के सीईओ और एमडी पद से इस्तीफे के बाद इन्फोसिस में सब कुछ ठीक नहीं था। बोर्ड ने नारायण मूर्ति को इस्तीफे के लिए जिम्मेदार ठहराया था। मूर्ति और कई पूर्व एग्जीक्यूटिव कंपनी में बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस नहीं होने के चलते मैनेजमेंट और बोर्ड में बदलाव की मांग कर रहे थे।
- कंपनी के पूर्व सीएफओ और मूर्ति के करीबी वी. बालाकृष्णन ने कहा, "नीलेकणी को लाना इन्फोसिस के लिए बेहतर होगा। नीलेकणी पूरी दुनिया में जाना-माना नाम है। वह चेयरमैन बनें और नया सीईओ तलाशें। मौजूदा चेयरमैन आर.शेषासायी और को-चेयरमैन रवि वेंकटेशन को हटना चाहिए, क्योंकि उन्होंने शेयरहोल्डर्स को निराश किया है।"
- माना जा रहा है कि इसी वजह से चेयरमैन आर. शेषासयी और को-चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने इस्तीफे की पेशकश की है।
29 अगस्त को इन्वेस्टर्स कॉल करेंगे मूर्ति
- प्रॉक्सी एडवाइजर फर्म इंस्टीट्यूशन इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विस ने इन्फोसिस के बोर्ड और मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों पर करीब हफ्तेभर में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। इसके चेयरमैन अनिल सिंघवी ने कहा कि इन्फोसिस को नीलेकणी की वापसी और बोर्ड में बदलाव पर सफाई देनी चाहिए।
- मूर्ति इन्फोसिस के मौजूदा घटनाक्रमों पर 29 अगस्त को एक इन्वेस्टर्स कॉल करेंगे, जिसमें वह इन्वेस्टर्स की आशंकाओं पर बात कर सकते हैं।
सिक्का ने दिया था इस्तीफा
- इन्फोसिस के पहले नॉन-फाउंडर सीईओ विशाल सिक्का ने शुक्रवार, 18 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था। बोर्ड ने इसके बाद एक बयान जारी किया था, जिसमें सिक्का के इस्तीफे के लिए मूर्ति के लगातार हमलों को जिम्मेदार ठहराया था। इन्फोसिस की तीसरी बड़ी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर ओपनहाइमरफंड्स का कहना है कि सिक्का मामले से कंपनी में उनका भरोसा कम नहीं हुआ है। फंड के पास कंपनी के 2.16% या 4.96 करोड़ शेयर हैं।
आईआईएएस ने दी थी सलाह
- इन्वेस्टर्स को सलाह देने वाली संस्था इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेस (आईआईएएस) ने सिक्का के इस्तीफे के दिन ही कहा था कि नीलेकणी को नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाया जाना चाहिए। बुधवार को इसने कहा कि इन्फोसिस के फाउंडर्स में पहले भी मतभेद रहे हैं। इसलिए मूर्ति द्वारा मैनेजमेंट की आलोचना का मतलब यह नहीं कि ये सभी प्रमोटरों की राय हो। प्रमोटरों ने कभी मैनेजमेंट के प्रस्तावों के खिलाफ वोटिंग नहीं की। अगर वे नाखुश होते तो विरोध में वोटिंग कर सकते थे या गैरमौजूद रहते।
देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट 'आधार' को लीड कर चुके हैं नंदन
- देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट 'आधार' के लिए सरकार ने 2009 में नीलेकणी को यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया का चेयरमैन बनाया था। वह 2014 तक इस पद पर थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के अनंत कुमार से 2.28 लाख वोटों से हार गए। नीलेकणी ने कई स्टार्टअप्स में इन्वेस्टमेंट कर रखा है।
इन्फोसिस को इससे मिलेंगे ये 4 फायदे
1. खुलेआम आलोचना के डर से कोई बाहरी सीईओ नहीं बनना चाहेगा, लेकिन नीलेकणी के रहते सीईओ सहज महसूस कर सकता है।
2. कहा जाता है कि मूर्ति सिर्फ नीलेकणी की सुनते हैं। वे आए तो मूर्ति नरम पड़ सकते हैं। खुलेआम आलोचना से वह भी बचेंगे।
3. विरोधी भी नीलेकणी को पसंद करते हैं। पिछले चुनाव में इन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। फिर भी मोदी सरकार ने सलाहकार बनाया।
4. नीलेकणी पर इन्फोसिस के कस्टमर, शेयरहोल्डर और इम्प्लॉइज तीनों को भरोसा है। उनकी वापसी से विवादों में फंसी कंपनी की प्रतिष्ठा लौटेगी।
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