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राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रदेशभर में संचालित छात्रावासों की मॉनिटरिंग हाईटैक तरीके से होगी. पहले चरण में अभी सम्भागवार छात्रावासों के ग्रुप बनाए गए जिस पर हर छात्रावास अधीक्षक को सुबह और शाम के छात्रावास के फोटो अपलोड करने पडेंगे. वहीं इसके अगले चरण में छात्रावास के जियो लोकेशन मंगवाई जा रही है, यही नहीं राजधारा अटैंडेंस ऐप भी तैयार करवाया गया है.

विभाग के 789 हॉस्टल और 22 आवासीय स्कूल संचालित किए जा रहे हैं. यह हॉस्टल शहरों में भी हैं और प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं. इस स्कूलों और आवासीय विद्यालयों पर निदेशालय स्तर से सीधी मॉनिटरिंग करने की कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन रोजाना मॉनिटरिंग करने की व्यवस्था की जा रही है, जिसके पहले चरण में सम्भाग स्तर पर वॉट्सऐप ग्रुप तैयार किए जा रहे हैं. जिस पर संबंधित अधीक्षक को रोजाना फोटो सुबह और शाम को अपलोड़ करना होगा.

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वहीं इन आवासीय स्कूलों और छात्रावासों की जियो लोकेशन मंगवाई जा रही है. यही नहीं doit के माध्यम से राजधारा अटैंडेंस ऐप तैयार करवाया जा रहा है. विभाग के निदेशक डॉ. समित शर्मा ने बताया कि असल में छात्रावासों की मॉनिटरिग प्रभावी तरीके से हो सकेगी. वहीं अधीक्षकों को छात्रावासों में रुकना अनिवार्य होगा.

इस बार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने छात्रावासों में विद्यार्थियों की पूरे प्रवेश हो सकें इसके प्रयास भी किए और इस बार 90 फीसदी से ज्यादा छात्रावासों में छात्रों ने दाखिला लिया. असल में विभाग के इन छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को रहने, खाने, पीने, पढ़ने तक की सुविधाएं राज्य सरकार की ओर से दी जाती हैं. लिहाजा विभाग का मकसद है कि जो सुविधाएं दी जा रही हैं वो गुणवत्तापूर्ण मिल सकें.

बहरहाल, विभाग की नई हाईटैक तकनीक से निदेशालय स्तर पर मॉनिटरिंग की जा सकेगी. वहीं छात्रावासों में अधीक्षकों के नदारद होने पर भी लगाम लग सकेगी.

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