राज: यह तस्वीरे राजकीय व्यवस्था के सामने लाचार हुए उस आदिवासी परिवार की हैं, जिसके बच्चे को अस्पताल पहुंचने के बाद भी इलाज नहीं मिला। समय पर इलाज ना मिलने से बच्चे की मौत हो गई, लेकिन लापरवाह चिकित्सकों ने उसे शहर के अस्पताल तक जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम तक नहीं किया। आखिर में अभागा पिता बच्चे की लाश को घर लाने के लिए 6 किमी तक पैदल चला। भला हो उन राहगीरों का जिन्होंने रास्ते में अपनी गाड़ी रोककर इनकी मदद की और घर तक छोड़ा।
बारां जिला के शाहाबाद उपखण्ड क्षेत्र में धरती के भगवानी की ऐसी लापरवाही देखने को मिली जिससे इंसानीयत कांप उठी। डॉक्टर यदि संवेदनशीलता दिखाते तो चौराखाड़ी गांव निवासी सात माह के मासूम सन्नी देवल सहरिया की जान बच सकती थी। जुकाम-खांसी के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर बच्चे का पिता और और मां सुमन्तरा उसे इलाज के लिए शाहाबाद चिकित्सालय लाई।
अस्पताल में पर्ची बनवाने जैसी खानापूर्ति करने में डॉक्टरों की ड्यूटी का टाइम खत्म हो गया और वह बच्चे को देखे बिना ही घर चले गए। परेशान परिवार डॉक्टर के घर भी गया, लेकिन उसने बच्चे को देखने के बजाय शाम पांच बजे आने या फिर बारां शहर के किसी अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया।
अस्पताल प्रशासन ने इतनी भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई कि ठेठ गांव के इस अस्पताल से बारां जाने के लिए वह एंबुलेंस का इंतजाम कर देते। जिसके चलते यह आदिवासी परिवार बच्चे को लेकर पैदल ही शहर की ओर चल पड़ा, लेकिन रास्ते में ही बच्चे की सांसें टूट गई।
पिता के कंधे पर बच्चे की मौत होते देख पूरा परिवार बिलख-बिलख कर रोने लगा, लेकिन उस जंगल में उनकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था। जैसे-तैसे इन लोगों ने हिम्मत जुटाई और पैदल ही घर की ओर चल पड़े.
शाहाबाद के अस्पताल से आदिवासियों का यह पूरा परिवार छह किमी तक पैदल ही चलता रहा। इसी बीच रास्ते से गुजर रहे एक राहगीर की इन पर नजर पड़ी और उसने पूरी बात पूछी। इस आदिवासी परिवार पर की वेदना सुन वह भी रो पड़ा। आखिर में उसने अपना काम छोड़कर पहले इस परिवार को घर तक पहुंचाने का फैसला किया।
राहगीर कार चालक ने इस आदिवासी परिवार को अपनी कार में लिफ्ट ना दी होती तो अस्पताल से घर तक 15 किमी का पूरा रास्ता इन्हें पैदल ही तय करना पड़ता।
वहीं दूसरी ओर जब शाहाबाद के ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. अटलराज मेहता से चिकित्सकों की लापरवाही पर कार्रवाई करने के बजाय इसी आदिवासी परिवार को अपने बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने पूरी घटना पर सफाई देते हुए कहा कि बच्चे को शाहाबाद अस्पताल लाया गया था। जहां उसे उपचार दिया गया और बैठने को कहा ताकि उसे बारां भेजा जा सके लेकिन परिजन बिना बताए उसे ले गए। बच्चे की मौत की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
source:rp