पिछले कुछ समय से भारत की शिक्षा प्रणाली का स्तर गिरा है. ख़ास कर, जबसे शिक्षा का बाज़ारीकरण हुआ है. साधारण स्कूल-कॉलेजों की बात छोड़िए, विश्वविद्यालय की मान्यता लिए कॉलेज भी ऐसी ग़लतियां करते हैं, जिन्हें सुन कर लोग अपना सिर पकड़ लेते हैं. ताज़ा मामले में एक विश्वविद्यालय ने मेरिट लिस्ट में ऐसे बच्चे को टॉप करा दिया, जिसने वहां अप्लाई ही नहीं किया था.
पश्चिम बंगाल बोर्ड के 12वीं के टॉपर Panigrahi Archisman का नाम Jadavpur University की मेरिट लिस्ट में आया है, जिसमें उन्हें चार विषयों में टॉपर दिखाया गया है. यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन समस्या तब खड़ी हुई, जब इसका पता 'टॉपर' Archisman को चला.

Source: IndianExpress
Archisman का कहना है, 'मैंने तो इस विश्वविद्यालय में कभी अप्लाई ही नहीं किया था. मुझे अपने टॉप करने का पता अपने एक दोस्त के माध्यम से चला, जिसने बताया कि मैंने Physics, Chemistry, Geology और Mathematic में टॉप किया है.'
इस मामले को लेकर Archisman ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित कर दिया है कि उसने यहां पर कभी अप्लाई नहीं किया था. फिर भी उसे मेरिट लिस्ट में टॉपर दिखाया जा रहा है. इस बात पर विश्वविद्यालय  प्रशासन भी हैरान है. विश्वविद्यालय के उप कुलपति ने बताया कि मामले को साइबर पुलिस को सौंप दिया गया है.

Source: Getmyuni
पुलिस की जांच का नतीजा जो भी आए, लेकिन ऐसे मामले शिक्षा विभाग में फैली गंभीर खामी को उजागर करते हैं. अगर किसी विश्वविद्यालय में कोई छात्र बिना अप्लाई किए टॉपर बन जाता है, तो रूबी राय और के गणेश कुमार के टॉपर बनने पर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए.

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