
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने सोमवार को अतिरिक्त जांच के बिना वोडाफोन-आइडिया विलय के लिए बिना शर्त मंजूरी दे दी
आइडिया और वोडाफोन के बीच मर्जर को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत को प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने मंजूरी दे दी। इससे टेलिकॉम सेक्टर की इन दोनों कंपनियों के एक होकर सबसे बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर के तौर पर उभरने का रास्ता साफ हो गया है।
शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी ने कहा कि नियामक ने वोडाफोन इंडिया तथा उसकी पूर्ण अनुषंगी वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज का आइडिया सेल्यूलर के साथ विलय को बिना शर्त मंजूरी दे दी है। कंपनी के बयान के अनुसार 23 अरब डालर का यह विलय सौदा भारत के विलय एवं अधिग्रहण क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सौदा होगा।
मार्च में वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर ने अपने परिचालनों के विलय की घोषणा की थी। नयी कंपनी 23 अरब डालर से अधिक मूल्य की होगी और बाजार में उसकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत होगी। इस प्रस्ताव के तहत वोडाफोन इंडिया विलय के बाद बनने वाली कंपनी में शुरु में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी। बाद में यह ब्रिटिश कंपनी विलय पश्चात बनने वाली कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 45.1 फीसदी रखेगी ।
आईडिया की पैतृक कंपनी आदित्य बिड़ला समूह 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 3,874 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी और नई कंपनी में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी। बाकी 28.9 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य शेयरधारकों की होगी।