नई दिल्ली: ऐमजॉन मार्च से अपनी सब्सिडियरी के जरिये भारत में तैयार फूड बेचने वाली है। मामले से वाकिफ दो लोगों ने यह जानकारी दी है। इस अमेरिकी रिटेल कंपनी को 8 महीने पहले इस वेंचर में 50 करोड़ डॉलर निवेश की मंजूरी मिली थी। यह यूनिट सिर्फ लोकल स्तर पर बने और पैकेज्ड फूड प्रॉडक्ट्स बेच सकती है और इसका सीधा मुकाबला ऑनलाइन सेगमेंट में ग्रोफर्स और बिगबास्केट से होगा।
ऐमजॉन भारत के फूड-ओनली रिटेलिंग सेक्टर में बड़े इनवेस्टमेंट वाली एकमात्र कंपनी है। इसके तहत 100 पर्सेंट फॉरेन ओनरशिप वाली सब्सिडियरीज की इजाजत दी गई है, जो लोकल स्तर पर बने फूड आइटम्स बेचेगी। एमेजॉन ने बताया, 'फूड रिटेल बिजनेस लॉन्च करने के लिए हमारा काम चल रहा है।'
इस वेंचर को शुरू करने के लिए फरवरी में दिया गया एमेजॉन का एप्लिकेशन सरकार के लिए राहत की तरह था। दरअसल, हाल में बनाए गए 'फूड ओनली रिटेलिंग' सेक्टर में निवेश जुटाने में सरकार नाकाम रही। सरकार का मकसद इस सेक्टर के जरिये रोजगार पैदा करना और किसानों की मदद करना है। वॉलमार्ट समेत बाकी ग्लोबल रिटेलर्स ने इस सेगमेंट में निवेश करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इन फर्मों की दलील है कि सिर्फ कम मार्जिन वाले फूट आइटम्स का बिजनेस आर्थिक तौर पर टिकाऊ नहीं है और इस तरह के वेंचर्स में शैंपू, डिटर्जेंट जैसे नॉन-फूड आइटम्स का स्टॉक रखने भी इजाजत दी जानी चाहिए।
पर्सनल केयर आइटम के लिए प्लान
ईटी ने खबर दी थी कि सरकार फूड रिटेलर्स को पर्सनल केयर आइम्टस बेचने की इजाजत देने पर विचार कर रही है। उनकी टोटल सेल्स में इसकी हिस्सेदारी की सीमा 25 फीसदी तय की जा सकती है। थर्ड पार्टी और अपने प्राइवेट लेबल फूड आइटम्स की ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री के लिए 50 करोड़ डॉलर निवेश करने की खातिर एमेजॉन को जुलाई में मंजूरी मिली थी। फूड एकमात्र ऐसा सेगमेंट है, जहां उसे सीधा कंज्यूमर्स को माल बेचने की इजाजत है।
भारत सरकार ने जोरदार विरोध को नजरअंदाज करते हुए फूड रिटेलिंग सेगमेंट तैयार करने के लिए में मल्टीब्रांड रिटेल में फॉरेन इनवेस्टमेंट को मंजूरी दी थी। इसका मकसद रोजगार पैदा करना और किसानों की मदद करना है।
फॉरेन फंडिंग वाली लोकल ऑनलाइन ग्रॉसरी फर्मों bigbasket.com और ग्रोफर्स को भी लोकल फूड प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए सरकार से मंजूरी मिली है। एमेजॉन फिलहाल भारत में ऑनलाइन मार्केटप्लेस के तहत ऑपरेट करती है और इसे सीधे कन्ज्यूमर्स को माल बेचने की इजाजत नहीं है। यह लोकल वेंडर्स को सामान बेचने के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया देकर सिर्फ तकनीकी प्लेटफॉर्म मुहैया कराती है। कंपनी का फूड रिटेल वेंचर पहले दिवाली के दौरान शुरू होने का अनुमान था, लेकिन कंपनी को इस यूनिट को मार्केटप्लेस से अलग करने की जरूरत है, लिहाजा इसमें देरी हुई।
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