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उनका कहना है कि इसकी मदद से रेप के बढ़ते मामलों को कम करने में मदद मिल सकेगी और कानूनी मामलों को सुलझाने में सहायता मिल सकेगी। सेक्स करने से पहले लड़की और लड़के को ऐप के जरिये एक सेल्फी लेनी होगी। इसके बाद उसे सेंट्रल कंप्यूटर सिस्टम पर भेजना होगा, जिसे उसके पार्टनर के साथ मिलाया जाएगा, जिसने एक सेल्फी भेजी है।
एक बार कंप्यूटर को यह विश्वास हो जाएगा कि दोनों में से किसी को भी सेक्स करने में मजबूर नहीं किया जा रहा है, तो यह प्रेमी जोडे़ को यूनीक पासवर्ड भेज देगा। इसके बाद वे शारीरिक संबंध बना सकेंगे। उन्हें यह पता होगा कि मार्क के डाटाबेस में उनका रिकॉर्ड दर्ज है।
मार्क ने अपने पेटेंट आवेदन में लिखा है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता और विकास के साथ समाज यौन उत्पीड़न से संबंधित घटनाओं के बारे में अधिक जागरूक हो गया है।
कॉलेज परिसर में हमले की रिपोर्टों में वृद्धि हो रही है और परस्पर विरोधी कहानियों ने भी यौन संबंध बनाने की सहमति के मुद्दे को आगे किया है। इस बढ़ी हुई जागरूकता ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर दबाव बढ़ाया है कि वे यौन उत्पीड़न से जुड़ी हुई शिकायतों को निपटाने के लिए नीतियां बनाएं या उन्हें संशोधित करें। इस समस्या को हल करने का एक तरीका यह है कि सहमति के संदेह को खत्म किया जाए।
ऐसा करने के लिए दोनों पक्षों को इस तरह की गतिविधि में शामिल होने से पहले सकारात्मक, सचेत और स्वैच्छिक समझौता करना जरूरी है। मार्क ने कहा कि उनका आविष्कार सहमति से संबंध बनाने के बाद रेप के आरोपों का अंत करेगा।
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