मैकडॉनल्ड्स के बर्गर तो आपने भी खाए होंगे. हो सकता है कि खबर पढ़ते वक्त आप खा भी रहे हों. तो खबर आपके लिए ये है कि जितना भी बर्गर खाना हो, आने वाले कुछ दिनों में खा लीजिए. आपका बस चले तो खरीद के स्टोर भी कर लीजिए. क्योंकि कुछ ही दिनों की बात है, उसके बाद आपको नॉर्थ इंडिया में मैकडॉनल्ड्स का बर्गर नहीं मिलेगा. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने कनॉट प्लाजा रेस्ट्रॉन्ट लिमिटेड (सीपीआरएल) की ओर से चलाए जा रहे सभी 169 रेस्त्रां के साथ करार खत्म कर लिया है. इसका मतलब है कि अब आपको मैकडॉनल्ड नाम का बर्गर खाने को नहीं मिलेगा.
क्यों बंद हो रहा है सबका फेवरेट मैक्डी
‘मैक्डी ‘ नाम से मशहूर मैकडॉनल्ड्स अमेरिका की बर्गर रेस्त्रां कंपनी है. भारत में यह मैकडॉनाल्ड्स इंडिया के नाम से चलती है. 22 साल पहले 1995 में मैकडॉनल्ड इंडिया ने देश में कदम रखा था. इंडिया में मैक्डी के कुल 430 आउटलेट हैं. इनमें से 169 आउटलेट विक्रम बख्शी की कनॉट प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड (सीपीआरएल) के पास हैं, जो पूरे उत्तर और पूर्वी भारत में फैले हुए हैं. बाकी 261 आउटलेट हार्डकैसल रेस्ट्रॉन्ट की ओर से चलाए जा रहे हैं. 21 अगस्त को मैकडॉनल्ड इंडिया ने विक्रम बख्शी की कनॉट प्लाजा प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार खत्म करने का ऐलान कर दिया. इसके बाद सीआरपीएल अपने बिक्री केंद्रों पर मैक्डॉनल्डस ब्रैंड का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी.
क्यों खत्म हुआ करार
सीपीआरएल का मैकडॉनल्ड्स इंडिया से 2013 से ही विवाद चल रहा था, जो कंपनी के मैनेजमेंट को लेकर था. बख्शी की सीपीआरएल में मैकडॉनल्ड्स इंडिया आधे-आधे के भागीदार थे. अगस्त 2013 में विक्रम बख्शी को सीपीआरएल के प्रबंध निदेशक पद से हटा दिया गया था. इसके बाद बख्शी ने कंपनी के खिलाफ लॉ बोर्ड में अपील की थी. कंपनी की ओर से इस मामले को लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन पहुंचाया गया. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने बख्शी को कंपनी का एमडी पद वापस जारी करने का आदेश दिया, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद और भी बढ़ गया. इस बीच 21 अगस्त को मैकडॉनल्ड इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा है कि सीपीआरएल ने फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन किया है. एग्रीमेंट की जो जरूरी शर्तें हैं, वक्त मिलने के बाद भी सीपीआरएल उनको पूरा करने में नाकाम रही है.
अब आगे क्या होगा
मैकडॉनल्ड की ओर से सीपीआरएल से करार तोड़ने के बाद सीआरपीएल अमेरिकी कंपनी का नाम , कंपनी का लोगो और उससे जुड़ी किसी भी चीज का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी. करार खत्म होने की नोटिस के 15 दिन के अंदर ये फैसले लागू हो जाएंगे. इससे पहले भी सीपीआरएल को दिल्ली के अपने 43 रेस्त्रां बंद करने पड़े थे, क्योंकि स्थानीय नगर निकाय ने मैकडॉनाल्ड्स के नाम से चल रही इन दुकानों का लाइसेंस का नवीनीकरण करने से इनकार कर दिया था.
क्या पड़ेगा असर
फूड चेन से जुड़े लोगों की माने तो हर आउटलेट से 40-60 से लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं. इसके अलावा अप्रत्यक्ष तौर पर और भी लोग जुड़े होते हैं. कुल मिलाकर इस फैसले से 10 हजार से ज्यादा लोग बेरोजगार होने की कगार पर हैं. डॉमिनोज के पिज्जा की वजह से मैकडॉनल्ड को पहले से ही नुकसान उठाना पड़ रहा था. अब आउटलेट बंद होने के बाद कंपनी फिर से अपने नए पार्टन तलाश रही है. अगर नए पार्टनर मिल भी गए, तो कंपनी को फिर से मार्केट में स्थापित होने में खासा वक्त लगेगा. मैकडॉनल्ड्स के बंद होने का सीधा फायदा अन्य ग्लोबल चेन जैसे बर्गर किंग, वेन्डी इत्यादि को मिल सकता है.
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