इस बार राखी पर्व पर रक्षाबंधन का मुहूर्त सिर्फ पौने तीन घंटे रहेगा। वजह चंद्र ग्रहण और भद्रा है। ब्राह्मणों का मुख्य कर्म श्रावणी उपाकर्म भी रक्षाबंधन पर नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में शहर के विद्वानों ने एकमत होकर शास्त्रोक्त समाधान निकाला। इसके तहत 28 जुलाई को श्रावणी उपाकर्म करना उचित माना है।
पंडित डॉ. भगवतीशंकर व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन को सुबह 11.07 बजे तक भद्रा रहेगी। इधर, चंद्र ग्रहण से तीन प्रहर पूर्व दोपहर 1.52 बजे से सूतक शुरू हो जाएगा। श्रावणी उपाकर्म के लिए काल विवेचन ग्रंथ विषे संग्रह कारिका में बताया गया है कि ग्रहण और संक्रांति करके नहीं दूषित हो। एेसी पूर्णिमा और श्रवण नक्षत्र होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अस्थल आश्रम महंत रासबिहारी शरण, पंडित निरंजन भट्ट, पं. भंवर व्यास, पं. सुरेंद्र द्विवेदी, पं. भंवर दवे ने चर्चा की। पूर्णिमा 7 अगस्त को ग्रहण, भद्रा के चलते श्रावण शुक्ला पंचमी युक्त हस्त नक्षत्र में ऋग्वेदी, एवं अथर्ववेदियों को श्रावणी उपाकर्म करना चाहिए। धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु के अनुसार भी ऐसा होगा। एेसे में 28 जुलाई सुबह 8 बजे से मध्याह्न तक श्रावणी उपाकर्म होगा। इधर, राखी पर सुबह 11.07 से दोपहर 1.52 बजे तक राखी बांधने का श्रेष्ठ महूर्त रहेगा।