मलाला ने ट्विटर अपना अकाउंट साल 2012 में ही बना लिया था लेकिन पहला पोस्ट उन्होंने बीते शुक्रवार यानी 7 जुलाई को किया है.
कौन हैं मलाला यूसुफजई
नई दिल्ली: नोबेल विजेता पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला युसुफजई ने शुक्रवार को पहली बार ट्विटर पर एक पोस्ट डाला और आधे घंटे में उनके एक लाख फॉलोवर्स बढ़ गए. यह पक्की तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. मलाला ने इस पहली पोस्ट में लिखा ' Hi, Twitter'. इसके बाद उन्होंने लिखा कि आज स्कूल में आखिरी दिन था लेकिन ट्विटर पर पहला दिन.. हालांकि मलाला ने ट्विटर अपना अकाउंट साल 2012 में ही बना लिया था लेकिन पहला पोस्ट उन्होंने बीते शुक्रवार यानी 7 जुलाई को किया है. मलाला को ट्विटर पर लोग स्वागत करते हुए "दिलचस्प" सलाह भी दे रहे हैं. इससे पहले मलाला अपने संगठन के आधिकारिक ट्विटर पेज पर ही मैसेज देती रही हैं. इस ट्विटर हैंडल से भी उनके निजी तौर पर इस सोशल साइट से जुड़ने पर स्वागत किया गया है.
Hi, Twitter.— Malala (@Malala) July 7, 2017
Today is my last day of school and my first day on @Twitter [THREAD]— Malala (@Malala) July 7, 2017
Graduating from secondary school (high school) is bittersweet for me. I'm excited about my future, but... 2/— Malala (@Malala) July 7, 2017
....I know that millions of girls around the world are out of school and may never get the opportunity to complete their education. 3/— Malala (@Malala) July 7, 2017
Next week, I will be back on my #GirlPowerTrip to meet girls in Middle East, Africa & Latin America. 4/— Malala (@Malala) July 7, 2017
Each girl’s story is unique — and girls' voices are our most powerful weapons in the fight for education and equality. 5/— Malala (@Malala) July 7, 2017
On and off Twitter, I'm fighting for girls — will you join me?✋🏾 6/— Malala (@Malala) July 7, 2017
किसने क्या कहा
No. You are the disgrace and shame for the Yousafzai tribe. May you mend your ways and enter humankind again.— Abbas Nasir (@abbasnasir59) July 7, 2017
Proud of you Malala— Aaliya Shah (@AaliyaShah1) July 7, 2017
कौन हैं मलाला यूसुफजई
मलाला केवल 11 साल की थीं जब उन्होंने लड़कियों की शिक्षा पर ब्लॉग लिखना शुरू किया था. साल 2012 में जब वह 15 साल की थीं जब उनके ऊपर तालिबान ने उन पर जानलेवा हमला किया था. घायल मलाला का इलाज ब्रिटेन में हुआ और इस दौरान पूरी दुनिया में उनके ठीक होने की दुआएं की जा रही थीं. डॉक्टरों ने काफी मेहनत के बाद मलाला को बचा लिया तब से वह ब्रिटेन में रहकर ही पढ़ाई कर रही हैं. इसके बाद से वह पूरी दुनिया में वह मशहूर हो गईं. 10 दिसंबर 2014 को उन्हें कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया.

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