चीन ने सिक्किम सेक्टर के डोकलाम एरिया से आर्मी को वापस बुलाए जाने की संभावना से इनकार किया।
Image result for चीनी मीडिया
बीजिंग/नई दिल्ली: चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है, "चीन अपनी जमीन का एक इंच हिस्सा भी खोना बर्दाश्त नहीं कर सकता।" इसके साथ ही इसने सिक्किम सेक्टर के डोकलाम एरिया से PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) सैनिकों की टुकड़ी को वापस बुलाए जाने की संभावना से इनकार किया है। बता दें कि डोकलाम में 36 दिन से भारत और चीन की सैनिक टुकड़ी आमने-सामने है। ये इलाका एक ट्राई जंक्शन (तीन देशों की सीमाएं मिलने वाली जगह) है। चीन यहां सड़क बनाना चाहता है, लेकिन भारत और भूटान इसका विरोध कर रहे हैं। 

चीन के लोगों की यही इच्छा...

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के माउथपीस द ग्लोबल टाइम्स ने शुक्रवार को अपने एक संपादकीय में यह कहा। यह डेली न्यूजपेपर आमतौर पर सत्तारूढ़ दल के विचारों के हिसाब से चलता है और दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहा है। 

- अखबार ने लिखा है, "चीन अपनी जमीन का एक इंच हिस्सा भी गंवाना बर्दाश्त नहीं कर सकता और चीन के लोग यही चाहते है, यह उनकी अटूट इच्छा और अनुरोध है। चीन सरकार लोगों की मूलभूत इच्छा (fundamental will) को नजरअंदाज नहीं करेगी और PLA चीन के लोगों को नीचा नहीं दिखाएगी।"
सुषमा पर संसद से झूठ बोलने का आरोप
- अखबार ने फाइनेंस मिनिस्टर सुषमा स्वराज पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने सिक्किम सेक्टर में भारत की कथित घुसपैठ को जायज ठहराने के लिए संसद में 'झूठ बोला' है। अखबार ने सुषमा की राज्यसभा में स्पीच का जिक्र करते हुए लिखा, "वह संसद से झूठ बोल रही थीं।" 

- सुषमा ने संसद में कहा था कि भारतीय सैनिकों ने चीनी क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की और सभी देश भारत के रुख का समर्थन करते हैं। हालांकि चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री की तरफ से सुषमा के बयान पर अब तक कोई कमेंट नहीं आया है।
भारत की ताकत चीन से काफी कम

- ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "यह एक सीधी बात है कि भारत ने चीन क्षेत्र में घुसपैठ की है।" इसने यह दावा भी किया कि भारत की मिलिट्री ताकत चीन से काफी कम है।

- संपादकीय के मुताबिक, "अगर चीन और भारत के बीच संघर्ष इस लेवल तक बढ़ जाए कि विवाद का हल मिलिट्री के जरिये ही करना पड़े तो भारत यकीनन हार जाएगा।"
सुषमा ने और क्या कहा था?

- सुषमा ने राज्य सभा में यह भी कहा था कि पहले दोनों पक्ष सिक्किम सेक्टर में गतिरोध खत्म करने के लिए अपनी आर्मी को वहां से वापस बुलाएं, इसके बाद भारत, चीन से बात करने के लिए तैयार है। उन्होंने बॉर्डर विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की जरूरत पर जोर दिया था।
चीन अपनी आर्मी को वापस नहीं बुलाएगा

- चीनी अखबार ने कहा कि चीन बातचीत की पूर्व शर्त के तौर पर अपनी आर्मी को वापस बुलाने पर कभी भी सहमत नहीं होगा और अगर भारत जिद पर अड़ा रहा तो उसे भविष्य में तनाव के गंभीर रूप से बढ़ने पर सभी संभावनाओं को लेकर तैयार रहना चाहिए।
क्या है डोकलाम विवाद?

- ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है। भारत ने 16 जुलाई को सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि वह इस इलाके में पीछे नहीं हट सकता। डोकलाम में चीन को सड़क बनाने नहीं दिया जाएगा। भारत ने चीन की इस वॉर्निंग को नजरअंदाज कर दिया है कि भारत अपने सैनिक वहां से तुरंत वापस बुला ले, नहीं तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 

- इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से कहा गया है कि जब तक चीन के सैनिक सड़क निर्माण से पीछे नहीं हटते, भारतीय सैनिक नॉन काम्बैट मोड में डोकलाम में डटे रहेंगे। उधर, चीनी मीडिया ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत की पूर्व शर्त भारतीय सैनिकों का डोकलाम से पीछे हटना है। इस मामले में मोलभाव के लिए कोई जगह नहीं है।
बॉर्डर पर दोनों देशों के सैनिक 100 मीटर पर आमने-सामने

- इंडियन आर्मी के जवानों ने चीनी सैनिकों के अड़ियल रवैये को देखते हुए सिक्किम के डोकलाम इलाके में 9 जुलाई से अपने तंबू गाड़ रखे हैं। बॉर्डर पर दोनों देशों की 60-70 सैनिकों की टुकड़ी 100 मीटर की दूरी पर आमने-सामने डटी हैं। दोनों ओर की सेनाएं भी यहां से 10-15 km की दूरी पर तैनात हैं।
भारत का क्या है तर्क?

- नई दिल्ली ने चीन को बताया है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा।

- इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।


Post a Comment

Powered by Blogger.