महान गणतिज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह की गिनती दुनिया के महान गणतिज्ञों में होती हैं जिन्होनें आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत E=MC2 को चुनौती दी थी. आज वह भारत में दर-दर की ठोकरें खाकर दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है.
पटना : महान गणतिज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह की गिनती दुनिया के महान गणतिज्ञों में होती हैं जिन्होनें आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत E=MC2 को चुनौती दी थी. आज वह भारत में दर-दर की ठोकरें खाकर दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है.

'साइकिल वेक्टर थ्योरी' का शोध किया था
डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह ने अमरिका में 'साइकिल वेक्टर थ्योरी' पर शोध करने वाले वेज्ञानिक है जिसके बाद पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. आज भी अमेरिकी वेज्ञानिक आज भी उन्के शोध पर अध्यन करते हैं, देश भले ही डॉ. नारायण सिंह को भुला चुका है लेकिन अमेरीका में इनका सम्मान आज भी बरक़रार है.
70 साल का 'पगला सा' आदमी अपने जवानी में 'वैज्ञानिक जी' थे
पटना से 72 माईलस दूर पैदा हुये डॅा वशिष्ठ बेहद ग़री परिवार से ताल्लुक रखते हैं. मैट्रिक और साइंस कॉलेज से इंटर की परीक्षा में वशिष्ठ नारायण ने पूरे बिहार में टॉप किया था. पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद 1965 में वे अमेरिका चले गये और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वशिष्ठ अमेरिकी अंतरिक्ष रिसर्च एजेंसी नासा से जुड़ गए. नासा के साथ इन्होंने 3 साल तक काम किया और उसके बाद 1974 में भारत लौट आए.

अमेरिका से सब कुछ छोटकर भारत आना गलत फैसला
वशिष्ठ को नासा ने कई लुभावने अवसर दिये, लेकिन इन्होंने सब कुछ छोड़कर भारते आने का फ़ैसला किया और शायद यही फ़ैसला इनके जीवन का सबसे ग़लत फ़ैसला साबित हुआ
आईआईटी कानपुर से की पढ़ाई
1972 से 1977 तक आईआईटी कानपुर में अध्यापन के दौरान ये सीजोफ्रेनियां रोग से ग्रसित हो गये और उन्हें बीमार हालत में आरा लौटना पड़ा
किसी सरकार ने नहीं रखा ख्याल
किसरकार ने नहीं रखा ख्याल
महान वैज्ञानिक आरा की सड़को पर पागलो की तरह घूमता है. तब से लेकर आज तर सरकारें बदलीं, लेकिन इस महान वैज्ञानिक को गुमनामि के अंधेरों में धकेल दिया हैं
Post a Comment
Post a Comment