Image result for अमेरिकी टेक कंपनी अपने कर्मचारियों के शरीर में लगाएगी माइक्रो चिप

कैसा हो कि आप जिस कंपनी में काम करते हैं वह आपके शरीर में चिप लगा दे। जी हां, अमेरिका की थ्री स्‍क्‍वायर एम(32M) में इसकी शुरुआत हो चुकी है।

नई दिल्‍ली। कैसा हो कि आप जिस कंपनी में काम करते हैं वह आपके शरीर में चिप लगा दे। जी हां, अमेरिका की थ्री स्‍क्‍वायर एम(32M) में इसकी शुरुआत हो चुकी है। खास बात यह है कि कंपनी के 85 में से 50 कर्मचारियों ने चिप अपने शरीर के भीतर इंप्‍लांट करवाने के लिए हामी भी भर दी है। कंपनी के मुताबिक यह चिप लोगों के आईडी कार्ड की तरह काम करेगी। साथ ही ऑफिस में उनके रोज के जरूरी काम भी आसान कर देगी। इसका आकार चावल के दाने के बराबर होगा जिसे त्‍वचा के भीतर इंप्‍लांट करवाना होगा। 
थ्री स्‍क्‍वायर मार्केट एक वेंडिंग मशीन कंपनी है। यदि कंपनी अपने इस प्रयोग में सफल हो जाती है तो यह दुनिया की पहली ऐसी कंपनी होगी जिसने अपने कर्मचारियों के शरीर में चिप को इंप्‍लांट करवाया है। कंपनी ने 1 अगस्‍त से कर्मचारियों के शरीर में चिप इंप्‍लांट करने का फैसला किया है। कंपनी के मुताबिक इस चिप में रेडियो फ्रिक्वेंसी इडेंटिफिकेश (RFID) टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह तकनीक इलेक्ट्रोमेगेनेटिक फील्‍ड की मदद से इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्रित जानकरी को पहचानता है। 
कंपनी ने स्‍पष्‍ट किया है कि यह चिप पूरी तरह से सुरक्षित है, साथ ही कंपनी इससी मदद से कर्मचारियों की जासूसी भी नहीं करेगी। इसमें जीपीएस भी नहीं है। यह सिर्फ कर्मचारियों की मदद के लिए तैयार की गई है। यह चिप NFC (नियर-फिल्ड कम्यूनिकेशन) तकनीक से लैस है। इस चिप में उस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जोकि कॉन्टेक्टलेस क्रेडिट कार्ड और मोबाइल पेमेंट सर्विस में इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी के अनुसार, इस चिप की मदद से कर्मचारी दरवाजे खोलने, अपने कंप्यूटर में लॉग इन करने, फोटो कॉपी मशीन का इस्तेमाल करने जैसे अन्य काम कर सकते हैं। 
कंपनी की ओर से कहा गया है कि शरीर में चिप को इंप्‍लांट करवाना किसी भी कर्मचारी के लिए अनिवार्य नहीं है। अगर कोई कर्मचारी इस तकनीक में रूचि रखता है लेकिन इंप्लांट नहीं कराना चाहता है तो वह इसे कलाई बैंड या स्मार्ट रिंग में लगा सकते हैं। आपको बता दें कि कंपनी में 85 कर्मचारी हैं, जिसमें से 50 ने इस तकनीक में रुचि दिखाते हुए अपनी सहमति दे दी है। इस डिवाइस को 2004 में FDA से मंजूरी मिल चुकी है। इस डिवाइस को आसानी से लगाया और शरीर से निकाला जा सकता है। 
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